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शहरवासियों के पास सरकार के फंसे हैं 12 करोड़
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
Updated Fri, 08 Jan 2016 12:28 AM IST
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शहर में करीब 30 हजार से अधिक प्रॉपर्टी इकाइयों के मालिकों की ओर से 12 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स बकाया है। जिसे इकट्ठा करने के लिए नगर परिषद अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। 31 मार्च तक परिषद द्वारा लोगों से टैक्स जमा करवाने की अपील की जा रही है लेकिन टैक्स जमा न होने के कारण परिषद को विकास कार्य संचालित करने में परेशानी आ रही है।
शहर में 60 हजार इकाइयों पर प्रॉपर्टी टैक्स लगता है। जिसके लिए अलग-अलग स्लैब बनाई हुई हैं। 100 वर्ग गज से लेकर 200 वर्ग गज, 500 वर्ग गज एवं 1000 वर्ग गज तक के कामर्शियल एवं रिहायशी इलाकों पर सरकार द्वारा निर्धारित फार्मूले के आधार पर टैक्स लगाया जाता है। प्लॉट के साइज के हिसाब से प्रॉपर्टी टैक्स की गणना होती है।
पांच करोड़ रुपये है चालू वित्त वर्ष का टारगेट
चालू वित्त वर्ष में शहर से पांच करोड़ रुपये का टैक्स जमा करवाने का टारगेट था लेकिन वित्त वर्ष के तीन महीने भी नहीं बचे हैं। अब तक लगभग 1 करोड़ 40 लाख रुपये की राशि जमा हो पाई है। अब बचे हुए तीन माह से भी कम समय में तय टारगेट की राशि ही मुश्किल जमा हो पाएगी।
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परिषद अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार पूरे शहर में चालू वित्त वर्ष सहित इससे पिछले सालों का 12 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है जिसे लोग जमा नहीं करवा रहे हैं। इन लोगों पर हर साल जुर्माने की राशि भी बढ़ती जा रही है। नगर परिषद में सरकार द्वारा पिछले करीब एक साल से कोई विशेष ग्रांट भी नहीं दी गई है। सीएम द्वारा घोषित की गई पांच करोड़ रुपये की राशि भी अभी केवल स्वीकृत हुई है। राशि के अभाव में परिषद के कार्य रुके पड़े हैं। कई बड़े प्रोजेक्ट भी बीच में ही लटक गए हैं।
परिषद की टैक्स ब्रांच को अपडेट करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। टैक्स ब्रांच में लोगों को टैक्स जमा करवाने में कोई परेशानी न हो इसके लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। लोगों को भी चाहिए कि वे अपना टैक्स जमा करवाएं।
डीसी, निखिल गजराज
परिषद का करीब 12 करोड़ रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स शहर में लोगों की ओर से बकाया है। कुल 60 हजार इकाइयों से इस साल 5 करोड़ रुपये का टैक्स जमा करवाने का टारगेट था लेकिन अभी तक लगभग 1 करोड़ 40 लाख रुपये की राशि ही जमा हो पाई है। जो लोग टैक्स जमा नहीं करवा रहे हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे।
एसके गोयल, ईओ नगर परिषद
शुरू में भारी भरकम टैक्स के बाद सरकार ने टैक्स की दरों को सरल कर दिया था। इसके बाद रिहायशी एवं कामर्शियल प्रॉपर्टी पर सामान्य दरों से टैक्स लगाया जाता है। लोगों को चाहिए कि वे टैक्स जमा करवाएं।
रामनिवास मित्तल, अध्यक्ष, नगर परिषद कैथल।
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शहर में 60 हजार इकाइयों पर प्रॉपर्टी टैक्स लगता है। जिसके लिए अलग-अलग स्लैब बनाई हुई हैं। 100 वर्ग गज से लेकर 200 वर्ग गज, 500 वर्ग गज एवं 1000 वर्ग गज तक के कामर्शियल एवं रिहायशी इलाकों पर सरकार द्वारा निर्धारित फार्मूले के आधार पर टैक्स लगाया जाता है। प्लॉट के साइज के हिसाब से प्रॉपर्टी टैक्स की गणना होती है।
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पांच करोड़ रुपये है चालू वित्त वर्ष का टारगेट
चालू वित्त वर्ष में शहर से पांच करोड़ रुपये का टैक्स जमा करवाने का टारगेट था लेकिन वित्त वर्ष के तीन महीने भी नहीं बचे हैं। अब तक लगभग 1 करोड़ 40 लाख रुपये की राशि जमा हो पाई है। अब बचे हुए तीन माह से भी कम समय में तय टारगेट की राशि ही मुश्किल जमा हो पाएगी।
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परिषद अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार पूरे शहर में चालू वित्त वर्ष सहित इससे पिछले सालों का 12 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है जिसे लोग जमा नहीं करवा रहे हैं। इन लोगों पर हर साल जुर्माने की राशि भी बढ़ती जा रही है। नगर परिषद में सरकार द्वारा पिछले करीब एक साल से कोई विशेष ग्रांट भी नहीं दी गई है। सीएम द्वारा घोषित की गई पांच करोड़ रुपये की राशि भी अभी केवल स्वीकृत हुई है। राशि के अभाव में परिषद के कार्य रुके पड़े हैं। कई बड़े प्रोजेक्ट भी बीच में ही लटक गए हैं।
परिषद की टैक्स ब्रांच को अपडेट करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। टैक्स ब्रांच में लोगों को टैक्स जमा करवाने में कोई परेशानी न हो इसके लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। लोगों को भी चाहिए कि वे अपना टैक्स जमा करवाएं।
डीसी, निखिल गजराज
परिषद का करीब 12 करोड़ रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स शहर में लोगों की ओर से बकाया है। कुल 60 हजार इकाइयों से इस साल 5 करोड़ रुपये का टैक्स जमा करवाने का टारगेट था लेकिन अभी तक लगभग 1 करोड़ 40 लाख रुपये की राशि ही जमा हो पाई है। जो लोग टैक्स जमा नहीं करवा रहे हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे।
एसके गोयल, ईओ नगर परिषद
शुरू में भारी भरकम टैक्स के बाद सरकार ने टैक्स की दरों को सरल कर दिया था। इसके बाद रिहायशी एवं कामर्शियल प्रॉपर्टी पर सामान्य दरों से टैक्स लगाया जाता है। लोगों को चाहिए कि वे टैक्स जमा करवाएं।
रामनिवास मित्तल, अध्यक्ष, नगर परिषद कैथल।