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ग्राम सचिवालयों तो बना दिए पर कर्मचारी कौन बिठाएगा
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
Updated Mon, 28 Dec 2015 12:02 AM IST
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गांवों में खोले गए ग्राम सचिवालयों में जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इनमें अब तक कर्मचारी बैठने शुरू नहीं हुए हैं। जिले में 10 गांवों में ग्राम सचिवालय खोले हैं। कई गांवों में तो ग्राम सचिवालयों में इंटरनेट तक की सुविधा नहीं है जिस कारण लोगों को अपने कामों के लिए जिला मुख्यालय या फिर उपमंडल मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। गांव दयौरा, क्योड़क, रोहेड़ा, तारागढ़, फतेहपुर, अजीमगढ़, सैर, हरिपुरा व चौशाला में ग्राम सचिवालय शुरू किए गए हैं।
सीएम द्वारा गोद लिए हुए गांव क्योड़क में खुले ग्राम सचिवालय में प्रमाण पत्र बनना शुरू नहीं हुए हैं। गांववासी रमेश कुमार, काला राम, सुरेंद्र कुमार ने बताया कि गांव में ग्राम सचिवालय शुरू तो कर दिया गया है लेकिन यहां अब तक प्रमाणपत्र बनना शुरू नहीं हुए हैं। प्रमाणपत्रों के लिए लोगों को कैथल ही जाना पड़ता है। यहां केवल बिजली बिलों के लिए बिजली कर्मचारी आते हैं। वे पहले भी आते रहे हैं। गांव में पटवारी रामफल ने बताया कि पटवारी गांव के पटवार भवन में बैठते हैं। प्रमाणपत्रों के लिए उनसे पहले की तरह लोग आवेदन फार्म पर हस्ताक्षर करवाकर ले आते हैं। अभी ग्राम सचिवालय में प्रमाण पत्र बनना शुरू नहीं हुए हैं।
गांव दयौरा में लोगों ने बताया कि यहां एएनएम ही बैठती हैं। यहां कुछ आधार कार्ड बनाने के लिए युवक ने काम किया लेकिन अब वह भी गांव की चौपाल में बैठने लगा है। गांव वासी सक्रीम, मेजर सिंह, रामफल, राधेश्याम, नन्हा ने बताया कि यहां प्रशासनिक कर्मचारी नहीं बैठते। गांव वासी रामफल ने बताया कि वे कागजात के लिए लघु सचिवालय में ही चक्कर काटते रहते हैं। इस ग्राम सचिवालय में प्रमाणपत्र मिलने जैसी कोई सुविधा शुरू नहीं हुई। गांव के निवर्तमान सरपंच रघुबीर सिंह ने बताया कि ग्राम सचिव एवं पटवारी कभी कभार आते हैं।
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गांव तारागढ़ में तैयारियां चल रही हैं लेकिन प्रमाणपत्र मिलना शुरू नहीं हुए हैं। गांव के निवर्तमान सरपंच रामफल ने बताया कि ग्राम सचिव व पटवारी तो एकाध दिन आते हैं। कंप्यूटर रखे जा रहे हैं। यहां बिजली का कनेक्शन नहीं है।
गांव सैर के निवर्तमान सरपंच हरजिंद्र सिंह ने बताया कि ग्राम सचिवालय में ग्राम पंचायत का सामान तो रख दिया गया है लेकिन अभी तक यहां कोई प्रमाणपत्र बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है और न ही कोई कर्मचारी बैठता। केवल ग्राम सचिव कभी कभार आ जाते हैं। प्रमाणपत्रों के लिए अभी भी गुहला ही जान पड़ता है।
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सीएम द्वारा गोद लिए हुए गांव क्योड़क में खुले ग्राम सचिवालय में प्रमाण पत्र बनना शुरू नहीं हुए हैं। गांववासी रमेश कुमार, काला राम, सुरेंद्र कुमार ने बताया कि गांव में ग्राम सचिवालय शुरू तो कर दिया गया है लेकिन यहां अब तक प्रमाणपत्र बनना शुरू नहीं हुए हैं। प्रमाणपत्रों के लिए लोगों को कैथल ही जाना पड़ता है। यहां केवल बिजली बिलों के लिए बिजली कर्मचारी आते हैं। वे पहले भी आते रहे हैं। गांव में पटवारी रामफल ने बताया कि पटवारी गांव के पटवार भवन में बैठते हैं। प्रमाणपत्रों के लिए उनसे पहले की तरह लोग आवेदन फार्म पर हस्ताक्षर करवाकर ले आते हैं। अभी ग्राम सचिवालय में प्रमाण पत्र बनना शुरू नहीं हुए हैं।
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गांव दयौरा में लोगों ने बताया कि यहां एएनएम ही बैठती हैं। यहां कुछ आधार कार्ड बनाने के लिए युवक ने काम किया लेकिन अब वह भी गांव की चौपाल में बैठने लगा है। गांव वासी सक्रीम, मेजर सिंह, रामफल, राधेश्याम, नन्हा ने बताया कि यहां प्रशासनिक कर्मचारी नहीं बैठते। गांव वासी रामफल ने बताया कि वे कागजात के लिए लघु सचिवालय में ही चक्कर काटते रहते हैं। इस ग्राम सचिवालय में प्रमाणपत्र मिलने जैसी कोई सुविधा शुरू नहीं हुई। गांव के निवर्तमान सरपंच रघुबीर सिंह ने बताया कि ग्राम सचिव एवं पटवारी कभी कभार आते हैं।
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गांव तारागढ़ में तैयारियां चल रही हैं लेकिन प्रमाणपत्र मिलना शुरू नहीं हुए हैं। गांव के निवर्तमान सरपंच रामफल ने बताया कि ग्राम सचिव व पटवारी तो एकाध दिन आते हैं। कंप्यूटर रखे जा रहे हैं। यहां बिजली का कनेक्शन नहीं है।
गांव सैर के निवर्तमान सरपंच हरजिंद्र सिंह ने बताया कि ग्राम सचिवालय में ग्राम पंचायत का सामान तो रख दिया गया है लेकिन अभी तक यहां कोई प्रमाणपत्र बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है और न ही कोई कर्मचारी बैठता। केवल ग्राम सचिव कभी कभार आ जाते हैं। प्रमाणपत्रों के लिए अभी भी गुहला ही जान पड़ता है।