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श्रद्धा के साथ शुरू हुए नवरात्र
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Navratri started with reverence
- फोटो : Kaithal
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नवरात्र उत्सव शुरू होते ही माता रानी के दर्शन व पूजा अर्चना के लिए सुबह के समय मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लग गया। महामारी को देखते हुए श्रद्धालुओं को दूर से ही माता के दर्शन किए व माथा टेका। सोशल डिस्टेंस व फेस मास्क लगाकर ही माता के दर्शन के लिए अंदर प्रवेश करने दिया। इससे पहले मंदिर के प्रवेश द्वारा पर ही श्रद्धालुओं के हाथों को सैनिटाइज किया गया। इसके बाद श्रद्धालु माता रानी की पूजा अर्चना को और मंदिर से माता की जलती जोत लेकर अपने अपने घरों तक पैदल पहुंचे। बड़ी देवी मंदिर के पुजारी पंडित शिवचरण शर्मा ने कहा कि पहले नवरात्र पर काफी संख्या में माता के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचे।
अखंड ज्योत प्रज्वलित की-पुजारी शिवचरण ने बताया कि कई श्रद्धालुओं मंदिरों से अपने घरों, मंदिरों व गोशाला में अखंड ज्योत ले गए और घट की स्थापना की गई। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की पूजा करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। मां दुर्गा के स्वरूप मां शैलपुत्री को पूजा अर्चना की। नवरात्रों के पावन अवसर पर मंदिरों को खूब सजाया गया है। शहर में बड़ी देवी मंदिर, श्री ग्यारह रुद्री मंदिर सहित अन्य मंदिरों को बड़े ही भव्य तरीके से सजाया गया है। जो श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र बने हुए हैं। इनमें से कई मंदिरों का इतिहास महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है।
ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंतफल देने वाला है। इसकी उपसना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उनका कर्तव्य पथ से विचलित नहीं होता। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।
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शारदीय नवरात्र वीरवार से प्रारंभ हो गए हैं। नवरात्रों में मां दुर्गा के अलग-अलग 9 स्वरूपों की 9 दिन पूजा होती है। कई श्रद्धालुओं ने अपने घर ही अखंड ज्योत प्रज्वलित की। महंत बंसी पुरी ने कहा कि इन दिनों जौ उगाने की भी परंपरा है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि शब्द 2 शब्दों को जोडर्क बना है। जिसमें पहला शब्द नव और दूसरा शब्द रात्रि है जिसका अर्थ होता है 9 रातें। नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवसर पर कई श्रद्धालु पूरे 9 दिनों तक उपवास रख मां दुर्गा की अराधना करते हैं। नवरात्रों में व्रत का रखना काफी महत्व रखता है। कई श्रद्धालु नवरात्रों के 8वें दिन कन्याओं का पूजन कर अपना व्रत खोल लेते है जिसे अष्टमी कहा जाता है तो कई श्रद्धालु 8 दिन व्रत रख 9वें दिन पूजन कर व्रत खोलते हैं। इसे नवमी के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा बड़ी ही दयालु है व अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करने वाली है। महंत ने कहा कि हिंदू धर्म के इस पावन पर्व पर मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। आज नवरात्रि के प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की। महंत ने कहा कि शैलपुत्री का संस्कृत में अर्थ होता है पर्वत की बेटी। मां शैलपुत्री के स्वरूप की बात करें तो मां के माथे पर अर्ध चंद्र स्थापित है। मां के दाहिने हाथ में त्रिशूल है और बाएं हाथ में कमल का फूल है। वे नंदी बैल की सवारी करती हैं। संवाद
माता के नवरात्रे आरंभ हो चुके हैं। सभी मंदिरों में सजावट की गई है। बाजार भी सज चुके हैं। कपड़े की दुकानों पर माता की चुन्नी, सिंगार व अन्य कपड़ों की बिक्री जोरों पर चल रही है। किराना की दुकानों पर नारियल माता की मूर्तियां, करियाना की दुकानों पर व्रत का सामान, चलाई के लड्डू, नमकीन, आटा कुटु का, सांवक, सिंगाड़े का आटा,, आलू के चिप्स, चिलाई के लड्डू व नमकीन की बिक्री जोरों हो रही है। मंदिरों में हवन किए जा रहे है। नगर के शनि मंदिर में नवरात्रों के अवसर पर हवन आरंभ किए गए। इस हवन में रविंद्र शर्मा, अभिषेक मेहता, सुदर्शन भारद्वाज, उर्मिला देवी, राज कुमार शर्मा व अन्य ने पूर्णाहुति डाली। समाजसेवी अभिषेक मेहता ने बताया कि यह हवन नगर की सुख शांति के लिए किए जा रहे हैं। पूरे नवरात्रे रोजाना मंदिर में हवन का आयोजन किया। संवाद
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अखंड ज्योत प्रज्वलित की-पुजारी शिवचरण ने बताया कि कई श्रद्धालुओं मंदिरों से अपने घरों, मंदिरों व गोशाला में अखंड ज्योत ले गए और घट की स्थापना की गई। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की पूजा करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। मां दुर्गा के स्वरूप मां शैलपुत्री को पूजा अर्चना की। नवरात्रों के पावन अवसर पर मंदिरों को खूब सजाया गया है। शहर में बड़ी देवी मंदिर, श्री ग्यारह रुद्री मंदिर सहित अन्य मंदिरों को बड़े ही भव्य तरीके से सजाया गया है। जो श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र बने हुए हैं। इनमें से कई मंदिरों का इतिहास महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है।
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ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंतफल देने वाला है। इसकी उपसना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उनका कर्तव्य पथ से विचलित नहीं होता। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।
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शारदीय नवरात्र वीरवार से प्रारंभ हो गए हैं। नवरात्रों में मां दुर्गा के अलग-अलग 9 स्वरूपों की 9 दिन पूजा होती है। कई श्रद्धालुओं ने अपने घर ही अखंड ज्योत प्रज्वलित की। महंत बंसी पुरी ने कहा कि इन दिनों जौ उगाने की भी परंपरा है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि शब्द 2 शब्दों को जोडर्क बना है। जिसमें पहला शब्द नव और दूसरा शब्द रात्रि है जिसका अर्थ होता है 9 रातें। नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवसर पर कई श्रद्धालु पूरे 9 दिनों तक उपवास रख मां दुर्गा की अराधना करते हैं। नवरात्रों में व्रत का रखना काफी महत्व रखता है। कई श्रद्धालु नवरात्रों के 8वें दिन कन्याओं का पूजन कर अपना व्रत खोल लेते है जिसे अष्टमी कहा जाता है तो कई श्रद्धालु 8 दिन व्रत रख 9वें दिन पूजन कर व्रत खोलते हैं। इसे नवमी के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा बड़ी ही दयालु है व अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करने वाली है। महंत ने कहा कि हिंदू धर्म के इस पावन पर्व पर मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। आज नवरात्रि के प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की। महंत ने कहा कि शैलपुत्री का संस्कृत में अर्थ होता है पर्वत की बेटी। मां शैलपुत्री के स्वरूप की बात करें तो मां के माथे पर अर्ध चंद्र स्थापित है। मां के दाहिने हाथ में त्रिशूल है और बाएं हाथ में कमल का फूल है। वे नंदी बैल की सवारी करती हैं। संवाद
माता के नवरात्रे आरंभ हो चुके हैं। सभी मंदिरों में सजावट की गई है। बाजार भी सज चुके हैं। कपड़े की दुकानों पर माता की चुन्नी, सिंगार व अन्य कपड़ों की बिक्री जोरों पर चल रही है। किराना की दुकानों पर नारियल माता की मूर्तियां, करियाना की दुकानों पर व्रत का सामान, चलाई के लड्डू, नमकीन, आटा कुटु का, सांवक, सिंगाड़े का आटा,, आलू के चिप्स, चिलाई के लड्डू व नमकीन की बिक्री जोरों हो रही है। मंदिरों में हवन किए जा रहे है। नगर के शनि मंदिर में नवरात्रों के अवसर पर हवन आरंभ किए गए। इस हवन में रविंद्र शर्मा, अभिषेक मेहता, सुदर्शन भारद्वाज, उर्मिला देवी, राज कुमार शर्मा व अन्य ने पूर्णाहुति डाली। समाजसेवी अभिषेक मेहता ने बताया कि यह हवन नगर की सुख शांति के लिए किए जा रहे हैं। पूरे नवरात्रे रोजाना मंदिर में हवन का आयोजन किया। संवाद