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Kaithal News: सरल उपचार की प्रक्रिया है प्राकृतिक चिकित्सा ः डॉ. शिव कुमार
Tue, 19 Nov 2024 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 19 Nov 2024 01:23 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आयुष विभाग एवं हरियाणा योग आयोग के संयुक्त तत्वावधान में नागरिक अस्पताल में राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ एवं महर्षि दयानंद चिकित्सालय के संचालक डॉ. शिव कुमार ने प्राकृतिक चिकित्सा के विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने जानकारी दी कि यह सरल सहज, उपचार की प्रक्रिया है, जिसे हमें जीवन में अपनाना चाहिए।
नोडल अधिकारी एवं सिविल सर्जन डॉ. रेणु चावला ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ शकुंतला दहिया ने बताया कि भारत में हर साल 18 नवंबर को प्राकृतिक चिकित्सा दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक चिकित्सा नामक दवा रहित चिकित्सा प्रणाली के माध्यम से सकारात्मक मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम में प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ एवं महर्षि दयानंद चिकित्सालय के संचालक डॉ. शिव कुमार ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा में विभिन्न विधियां आहार चिकित्सा, उपवास चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा, जल चिकित्सा, मालिश चिकित्सा, सूर्य किरण चिकित्सा, वायु चिकित्सा, क्षेत्रीय वनौषधियां का बिना दुष्प्रभाव प्रयोग होता है।
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उन्होंने कहा कि इस चिकित्सा में मुख्य उपचार मिट्टी की पट्टी, मिट्टी का स्नान, सूर्य स्नान, गर्म और ठंडा सेक, कटी स्नान, मेहन स्नान, पैर-हाथ का गर्म सेंक, वाष्प स्नान, पूर्ण टब स्नान, रीढ़ स्नान, सर्वांग गीली चादर
लपेट, छाती की पट्टी, घुटने की पट्टी, एनिमा, जलनेती, वमन, माथे की पट्टी, पेट की पट्टी रोग अनुसार मालिश की क्रियाएं की जाती हैं।
इस अवसर पर प्राकृतिक चिकित्सा विधियों की प्रदर्शनी लगाई गई जिसमें आयुष विभाग से पूजा शर्मा, अंजू, संदीप सिंह, विवेक कुमार, नरेश ढुल, सतविंदर, संजू आर्या, सीमा देवी, कुलदीप व राजकुमार शामिल हुए।
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कैथल। आयुष विभाग एवं हरियाणा योग आयोग के संयुक्त तत्वावधान में नागरिक अस्पताल में राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ एवं महर्षि दयानंद चिकित्सालय के संचालक डॉ. शिव कुमार ने प्राकृतिक चिकित्सा के विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने जानकारी दी कि यह सरल सहज, उपचार की प्रक्रिया है, जिसे हमें जीवन में अपनाना चाहिए।
नोडल अधिकारी एवं सिविल सर्जन डॉ. रेणु चावला ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ शकुंतला दहिया ने बताया कि भारत में हर साल 18 नवंबर को प्राकृतिक चिकित्सा दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक चिकित्सा नामक दवा रहित चिकित्सा प्रणाली के माध्यम से सकारात्मक मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।
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कार्यक्रम में प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ एवं महर्षि दयानंद चिकित्सालय के संचालक डॉ. शिव कुमार ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा में विभिन्न विधियां आहार चिकित्सा, उपवास चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा, जल चिकित्सा, मालिश चिकित्सा, सूर्य किरण चिकित्सा, वायु चिकित्सा, क्षेत्रीय वनौषधियां का बिना दुष्प्रभाव प्रयोग होता है।
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उन्होंने कहा कि इस चिकित्सा में मुख्य उपचार मिट्टी की पट्टी, मिट्टी का स्नान, सूर्य स्नान, गर्म और ठंडा सेक, कटी स्नान, मेहन स्नान, पैर-हाथ का गर्म सेंक, वाष्प स्नान, पूर्ण टब स्नान, रीढ़ स्नान, सर्वांग गीली चादर
लपेट, छाती की पट्टी, घुटने की पट्टी, एनिमा, जलनेती, वमन, माथे की पट्टी, पेट की पट्टी रोग अनुसार मालिश की क्रियाएं की जाती हैं।
इस अवसर पर प्राकृतिक चिकित्सा विधियों की प्रदर्शनी लगाई गई जिसमें आयुष विभाग से पूजा शर्मा, अंजू, संदीप सिंह, विवेक कुमार, नरेश ढुल, सतविंदर, संजू आर्या, सीमा देवी, कुलदीप व राजकुमार शामिल हुए।