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Kaithal News: ट्रक चालक की बेटी नैतिक रोशन कर रही नाम
Tue, 23 Dec 2025 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 23 Dec 2025 01:11 AM IST
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गांव करोड़ा की जूनियर अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज नैतिक कोच अमरजीत कुलतारन के साथ
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। दुबई (अबू धाबी) में अगस्त 2024 में हुई एशियन जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली नैतिक आज भी अभ्यास में जुटी रहती हैं। उनका ओलंपिक खेलों में पदक जीतने का सपना है। करोड़ा की रहने वाली नैतिक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता रणदीप सिंह ट्रक चालक हैं, जो सीमित आय के बावजूद परिवार का पालन-पोषण करते हुए अपनी बेटी के खेल के सपने को पूरा करने में हमेशा साथ खड़े रहे। मां मैना गृहिणी हैं।
गांव में कई लोग लड़कियों के खेल को लेकर प्रोत्साहित नहीं करते थे। नैतिक के खेलने पर आपत्ति तक जताई जाती थी और परिवार को खेल बंद करवाने की सलाह भी दी गई, लेकिन परिवार और बेटी दोनों ने हार नहीं मानी। खेल की प्रेरणा और आगे बढ़ने की चाह में नैतिक ने गांव से शुरुआत की और बाद में कैथल में कोच अमरजीत सिंह की एकेडमी में अभ्यास शुरू किया।
नैतिक की खेल यात्रा एथलेटिक्स से शुरू हुई थी। करनाल में हुई एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता था, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान यह खेल छूट गया। इसके बाद गांव में लगी एक मुक्केबाजी अकादमी के पोस्टर ने पिता को प्रेरित किया और उन्होंने बेटी को बॉक्सिंग की ओर बढ़ने के लिए उत्साहित किया। धीरे-धीरे नैतिक ने बॉक्सिंग में रुचि ली और नियमित अभ्यास के साथ अपने प्रदर्शन को निखारना शुरू किया।
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करीब तीन वर्ष पूर्व उनके पिता ने उनका दाखिला कैथल स्थित चौधरी छोटूराम इंडोर स्टेडियम की बॉक्सिंग नर्सरी में कराया, जहाँ कोच अमरजीत सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने अनुशासित और कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्तमान में नैतिक 50 से 52 किलोग्राम भार वर्ग में खेलती हैं और लगातार अपने खेल को बेहतर कर रही हैं।
नैतिक 10वीं कक्षा की छात्रा हैं और मध्यम वर्गीय परिवार से आती हैं। उनकी बड़ी बहन हैप्पी और छोटा भाई कीर्त भी मुक्केबाजी में रुचि रखते हैं। उनका सपना ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश और माता-पिता का नाम ऊँचा करना है। कैथल की यह उभरती प्रतिभा आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
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कैथल। दुबई (अबू धाबी) में अगस्त 2024 में हुई एशियन जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली नैतिक आज भी अभ्यास में जुटी रहती हैं। उनका ओलंपिक खेलों में पदक जीतने का सपना है। करोड़ा की रहने वाली नैतिक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता रणदीप सिंह ट्रक चालक हैं, जो सीमित आय के बावजूद परिवार का पालन-पोषण करते हुए अपनी बेटी के खेल के सपने को पूरा करने में हमेशा साथ खड़े रहे। मां मैना गृहिणी हैं।
गांव में कई लोग लड़कियों के खेल को लेकर प्रोत्साहित नहीं करते थे। नैतिक के खेलने पर आपत्ति तक जताई जाती थी और परिवार को खेल बंद करवाने की सलाह भी दी गई, लेकिन परिवार और बेटी दोनों ने हार नहीं मानी। खेल की प्रेरणा और आगे बढ़ने की चाह में नैतिक ने गांव से शुरुआत की और बाद में कैथल में कोच अमरजीत सिंह की एकेडमी में अभ्यास शुरू किया।
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नैतिक की खेल यात्रा एथलेटिक्स से शुरू हुई थी। करनाल में हुई एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता था, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान यह खेल छूट गया। इसके बाद गांव में लगी एक मुक्केबाजी अकादमी के पोस्टर ने पिता को प्रेरित किया और उन्होंने बेटी को बॉक्सिंग की ओर बढ़ने के लिए उत्साहित किया। धीरे-धीरे नैतिक ने बॉक्सिंग में रुचि ली और नियमित अभ्यास के साथ अपने प्रदर्शन को निखारना शुरू किया।
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करीब तीन वर्ष पूर्व उनके पिता ने उनका दाखिला कैथल स्थित चौधरी छोटूराम इंडोर स्टेडियम की बॉक्सिंग नर्सरी में कराया, जहाँ कोच अमरजीत सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने अनुशासित और कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्तमान में नैतिक 50 से 52 किलोग्राम भार वर्ग में खेलती हैं और लगातार अपने खेल को बेहतर कर रही हैं।
नैतिक 10वीं कक्षा की छात्रा हैं और मध्यम वर्गीय परिवार से आती हैं। उनकी बड़ी बहन हैप्पी और छोटा भाई कीर्त भी मुक्केबाजी में रुचि रखते हैं। उनका सपना ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश और माता-पिता का नाम ऊँचा करना है। कैथल की यह उभरती प्रतिभा आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।