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Kaithal News: मशरूम का आकार फूलगोभी जैसा
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सरकारी स्कूल में उगी खास तरह के मशरूम को दिखाते शिक्षक मुकेश कुमार। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की बगिया में किए जा रहे मशरूम उत्पादन के दौरान करीब एक किलोग्राम वजन का विशाल मशरूम सामने आया है। आकार में यह मशरूम फूलगोभी जैसा दिखाई देता है और विद्यालय में सभी के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
प्रधानाचार्य सुखदेव सिंह ने बताया कि असामान्य आकार और वजन के इस मशरूम को देखकर विद्यालय के शिक्षक ही नहीं, बल्कि बागवानी क्षेत्र से जुड़े लोग भी हैरान हैं। उनके सुझाव पर विद्यार्थियों को खेती-बागवानी और स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से मशरूम उत्पादन गतिविधि शुरू की गई थी।
उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उत्पादन और व्यावहारिक कृषि गतिविधियों से परिचित करवाना है। शिक्षक मुकेश कुमार ने बताया कि सामान्य बटन मशरूम की तुलना में विद्यालय में तैयार हुआ यह मशरूम कई गुना बड़ा है।
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उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अनुसार बटन मशरूम की आदर्श कटाई अवस्था में इसकी कैप का आकार करीब 2.5 से 4 सेंटीमीटर होता है। ऐसे में करीब एक किलोग्राम वजन का यह मशरूम अपने असामान्य आकार के कारण खास आकर्षण बना हुआ है।
आहार में प्रयोग से पहले जांच जरूरी: अमरजीत श्योकंद : बागवानी विभाग के एचडीओ अमरजीत श्योकंद ने बताया कि यह मशरूम मिल्की किस्म से मिलता-जुलता है, जिसे हिंदी में दूधिया मशरूम कहा जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी मशरूम को आहार के रूप में प्रयोग करने से पहले उसकी जांच जरूरी है। केवल रंग और आकार के आधार पर इसका सेवन नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि दूधिया मशरूम अपने आकर्षक सफेद रंग, आकार और पौष्टिक गुणों के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। इसकी खासियत यह है कि इसे नियंत्रित वातावरण में भी तैयार किया जा सकता है।
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कलायत। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की बगिया में किए जा रहे मशरूम उत्पादन के दौरान करीब एक किलोग्राम वजन का विशाल मशरूम सामने आया है। आकार में यह मशरूम फूलगोभी जैसा दिखाई देता है और विद्यालय में सभी के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
प्रधानाचार्य सुखदेव सिंह ने बताया कि असामान्य आकार और वजन के इस मशरूम को देखकर विद्यालय के शिक्षक ही नहीं, बल्कि बागवानी क्षेत्र से जुड़े लोग भी हैरान हैं। उनके सुझाव पर विद्यार्थियों को खेती-बागवानी और स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से मशरूम उत्पादन गतिविधि शुरू की गई थी।
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उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उत्पादन और व्यावहारिक कृषि गतिविधियों से परिचित करवाना है। शिक्षक मुकेश कुमार ने बताया कि सामान्य बटन मशरूम की तुलना में विद्यालय में तैयार हुआ यह मशरूम कई गुना बड़ा है।
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उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अनुसार बटन मशरूम की आदर्श कटाई अवस्था में इसकी कैप का आकार करीब 2.5 से 4 सेंटीमीटर होता है। ऐसे में करीब एक किलोग्राम वजन का यह मशरूम अपने असामान्य आकार के कारण खास आकर्षण बना हुआ है।
आहार में प्रयोग से पहले जांच जरूरी: अमरजीत श्योकंद : बागवानी विभाग के एचडीओ अमरजीत श्योकंद ने बताया कि यह मशरूम मिल्की किस्म से मिलता-जुलता है, जिसे हिंदी में दूधिया मशरूम कहा जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी मशरूम को आहार के रूप में प्रयोग करने से पहले उसकी जांच जरूरी है। केवल रंग और आकार के आधार पर इसका सेवन नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि दूधिया मशरूम अपने आकर्षक सफेद रंग, आकार और पौष्टिक गुणों के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। इसकी खासियत यह है कि इसे नियंत्रित वातावरण में भी तैयार किया जा सकता है।