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Kaithal News: अक्षय तृतीया पर मां लक्ष्मी और कुबेर देव की बरसेगी कृपा

Tue, 29 Apr 2025 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 29 Apr 2025 01:06 AM IST
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Mother Lakshmi and Kuber Dev will shower their blessings on Akshaya Tritiya
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया पर्व का बहुत अधिक महत्व होता है। अक्षय तृतीया का पर्व इस वर्ष अत्यंत विशिष्ट संयोगों के साथ मनाया जाएगा। 30 वर्षों बाद इस पावन दिन पर बुधवार का दिन, रोहिणी नक्षत्र, शोभन योग, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग एक साथ बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दिन मां लक्ष्मी और कुबेर देव की एक साथ कृपा बरसेगी।

पंडित विशाल शांडिल्य के अनुसार इस दुर्लभ संयोग में किया गया हर पुण्यकर्म अक्षय फल देने वाला होगा और जीवन में सुख, समृद्धि तथा उन्नति के द्वार खोलेगा। उन्होंने बताया की अक्षय तृतीया की पुण्य तिथि पर इस साल गजकेसरी नाम का शुभ राजयोग भी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह राजयोग तब बनता है जब गुरु और चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं। 30 अप्रैल 2025 यानि अक्षय तृतीया के दिन गुरु और चंद्रमा वृषभ राशि में गजकेसरी नामक शुभ योग बनाएंगे। इस योग के बनने से कुछ राशियों को शुभ लाभ प्राप्त हो सकते है।
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मनाया जाता है भगवान परशु राम का जन्मोत्सव
शांडिल्य ने बताया कि अक्षय तृतीया को भगवान परशुराम का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने पृथ्वी से अधर्म और अत्याचार का अंत कर धर्म की स्थापना की थी।
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उन्हें आज भी अमर अवतार माना जाता है जो समय आने पर भगवान कल्कि को दिव्य अस्त्र प्रदान करेंगे। जब-जब संसार में अधर्म और अन्याय अपनी सीमाएं पार करता है, तब-तब भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर संतुलन स्थापित करते हैं। परशुराम जी इन्हीं दिव्य अवतारों में से एक हैं जिन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है।



दान है महत्व

अक्षय तृतीया के दिन जल, कुल्हड़, पंखे, छाता, नमक, घी, मौसमी फल जैसे खरबूजा व तरबूज आदि का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इन चीजों का दान करने से अक्षय पुण्य मिलता है और धन संबंधी परेशानियां दूर होती हैं। गरीबों को वस्त्र, छाता एवं अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें और इक्षुरस (गन्ने का रस) का वितरण करें। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि दान केवल जरूरतमंदों को ही किया जाए।

संशय में न रहें, कल है अक्षय तृतीया

शांडिल्य ने बताया कि दृक पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया की वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि 29 अप्रैल को सायं 05: 31 से शुरू होकर 30 अप्रैल को दोपहर 02:12 तक रहेगी। इसलिए संशय में न रहे। अक्षय तृतीया बुधवार को है। काशी पंचांग के अनुसार देखा जाए तो तृतीया तिथि 29 अप्रैल को शुरू होकर 30 अप्रैल को सायं 5:50 तक है। दोनों ही पंचांग को आधार बनाकर देखा जाए तो सूर्योदय के समय वैशाख शुक्ल की तृतीया तिथि 30 अप्रैल को है।







ऐसे में अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को ही मनाई जाएगी।
सतयुग और त्रेता युग का आरंभ माना जाता है अक्षय तृतीया को
पूंडरी। भारत त्योहारों का देश है उत्सवों और पर्वों के कारण यहां जीवन चेतना अपने संपूर्ण रस के साथ प्रवाहित होती है। आध्यात्मिकता के साथ-साथ जीवन को पूरी तरह जी लेने का संदेश देते यह त्योहार हमारी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है।

पर्वों की शृंखला में अक्षय तीज का अपना विशिष्ट महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन से सतयुग और त्रेता युग का आरंभ माना जाता है।इस दिन किया हुआ जप, तप, दान, ज्ञान, अक्षय फलदायक होता है। इसीलिए इसे अक्षय तृतीया कहते हैं। अक्षय तृतीया एक स्वयंसिद्ध शुभ मुहूर्त है। इस कारण इसके लिए किसी पंचांग को देखने की भी आवश्यकता नहीं रह जाती।


जिन जातकों के शुभ मिलाना का मुहूर्त नहीं मिल पाते हैं उनको इस तरह स्वयंसिद्ध मुहूर्त में अपने सब शुभ कार्य संपन्न करने चाहिए। अक्षय तृतीया के दिन बड़ी संख्या में विवाह संपन्न होते हैं, कन्यादान के लिए यह परम पवित्र तिथि है। इस दिन व्रत उपवास रखना चाहिए। संवाद
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