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Kaithal News: प्रदेश के 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों की इमारतें जर्जर, सरकार लापरवाह ः आप
Sat, 09 Aug 2025 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 09 Aug 2025 01:30 AM IST
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17 कैथल। जानकारी देते हुए आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी। प्रवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार को जिला कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी के जिला अध्यक्ष जगमग मटौर और शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष मास्टर सतबीर गोयत ने कहा कि राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल भवन गिरने से सात बच्चों की मौत हृदयविदारक घटना है, लेकिन हरियाणा के हालात भी किसी विस्फोटक स्थिति से कम नहीं हैं।
नेताओं ने दावा किया कि प्रदेश के 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों की इमारतें जर्जर स्थिति में हैं, लेकिन सरकार आंख मूंदे बैठी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे भाजपा की मौजूदा सरकार हो या पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन, किसी ने भी सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए।
आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि प्रदेश के 290 प्राइमरी और 61 मिडिल स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि 98 मिडिल स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। कई स्कूलों में बेंच, टॉयलेट और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं।
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चिराग योजना को सरकारी स्कूलों को कमजोर करने की नीति बताते हुए मास्टर सतबीर ने इसे गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में बच्चों को तकनीकी रूप से तैयार किए बिना टैबलेट बांटे गए, जिनका बाद में न तो समुचित उपयोग हुआ, न ही देखरेख।
नेताओं ने बताया कि जिले में जिला शिक्षा अधिकारी, जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी और डाइट प्रिंसिपल के पद लंबे समय से खाली हैं। स्कूलों को दिए गए करोड़ों के जनरेटर ईंधन के अभाव में धूल खा रहे हैं, जबकि कई स्कूल गंदे पानी और मच्छरों के खतरे से घिरे हुए हैं।
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कैथल। आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार को जिला कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी के जिला अध्यक्ष जगमग मटौर और शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष मास्टर सतबीर गोयत ने कहा कि राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल भवन गिरने से सात बच्चों की मौत हृदयविदारक घटना है, लेकिन हरियाणा के हालात भी किसी विस्फोटक स्थिति से कम नहीं हैं।
नेताओं ने दावा किया कि प्रदेश के 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों की इमारतें जर्जर स्थिति में हैं, लेकिन सरकार आंख मूंदे बैठी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे भाजपा की मौजूदा सरकार हो या पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन, किसी ने भी सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए।
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आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि प्रदेश के 290 प्राइमरी और 61 मिडिल स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि 98 मिडिल स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। कई स्कूलों में बेंच, टॉयलेट और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं।
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चिराग योजना को सरकारी स्कूलों को कमजोर करने की नीति बताते हुए मास्टर सतबीर ने इसे गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में बच्चों को तकनीकी रूप से तैयार किए बिना टैबलेट बांटे गए, जिनका बाद में न तो समुचित उपयोग हुआ, न ही देखरेख।
नेताओं ने बताया कि जिले में जिला शिक्षा अधिकारी, जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी और डाइट प्रिंसिपल के पद लंबे समय से खाली हैं। स्कूलों को दिए गए करोड़ों के जनरेटर ईंधन के अभाव में धूल खा रहे हैं, जबकि कई स्कूल गंदे पानी और मच्छरों के खतरे से घिरे हुए हैं।