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Kaithal News: मासिक कालाष्टमी का व्रत 30 मई को रखा जाएगा

Mon, 27 May 2024 05:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 27 May 2024 05:34 AM IST
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Monthly Kalashtami fast will be observed on 30th May
कैथल। हर महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कालाष्टमी मनाई जाती है। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 30 मई को सुबह 11.44 बजे से शुरू होकर 31 मई को सुबह 9.38 बजे तक रहेगी। इसलिए मासिक कालाष्टमी का व्रत 30 मई वीरवार को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ समय सुबह 8.32 से शाम 5.40 तक रहेगा। भगवान काल भैरव की पूजा इस दिन की जाती है। शहर के मंदिरों में भी भक्त पहुंचकर पूजा करते हैं और काल भैरव को कई चीजें भेंट कर मनोकामनाएं मांगते हैं। इस दिन बव और बालव करण के योग का निर्माण भी हो रहा है। इन योग में काल भैरव देव की पूजा करने से व्यक्ति को शुभ फल की प्राप्ति होती है।
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हनुमान वाटिका के पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि मान्यता है कि भगवान काल भैरव की पूजा व व्रत से दुखों से निजात मिलती है। घर में खुशियों का आगमन होता है। इस दिन काल भैरव के चरणों में काला धागा बांधकर ऊं ह्रीं बटुकाय आपउद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ऊं का जाप करने से व्यक्ति को किसी भी तरह के भय से मुक्ति मिलती है। इस दिन व्यक्ति को किसी भी व्यक्ति का अपमान करने से बचना चाहिए। इस दिन मांसाहार का सेवन करने से बचना चाहिए। इस दिन किसी पशु पक्षी को परेशान न करें।
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कालाष्टमी पर इच्छानुसार प्रसाद चढ़ाते हैं भक्त-

माता गेट स्थित काली माता मंदिर में शनिवार के दिन काला कपड़ा, लड्डू, पान व पताशे चढ़ाया जाता है। श्री दुख भंजनी काली माता मंदिर में भी भैरव बाबा पर काला कपड़ा, उड़द, खोये का पेड़ा, उड़द के दाल भल्ले चढ़ाए जाते हैं। भक्त शनिवार व कालाष्टमी के दिन मंदिर में अपनी इच्छा अनुसार प्रसाद चढ़ाकर मनोकामना मांगते हैं। कालाष्टमी के दिन मंदिर में हवन होता है।
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पूजन विधि... सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें-

पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि व्रत रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र वस्त्र धारण करें और भगवान सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें। इसके बाद शिव के काल भैरव रूप की विधि विधान से पूजा करें। उनका अभिषेक करके दीपक जलाएं। पूजा के दौरान शिव चालीसा, शिव स्त्रोत का पाठ और शिव मंत्रों का जाप करते रहें। भगवान शिव की आरती करें। भगवान भैरव देव की पूजा करें। फिर आरती करके भगवान को भोग लगाएं। सूर्य को जल का अर्पण कर व्रत शुरू करें। सात्विक भोजन करें।
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