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Kaithal News: मोबाइल ने छीनी बच्चों की नींद, बढ़ी मानसिक समस्याएं

Tue, 23 Dec 2025 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 23 Dec 2025 01:20 AM IST
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Mobile phones rob children of their sleep, increasing mental problems
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। यदि आपका बच्चा लंबे समय तक मोबाइल पर समय बिता रहा है, तो सचेत होने की जरूरत है। मोबाइल की लत बच्चों के व्यवहार को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, हिंसक प्रवृत्ति और जरा-जरा सी बात पर गुस्सा आने जैसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल के मनोरोग विभाग की ओपीडी में आने वाले केस इसकी पुष्टि कर रहे हैं।

ओपीडी में पहले जहां रोजाना बच्चों की समस्याओं के ऐसे पांच से आठ मामले आ रहे थे वहीं अब इनकी संख्या बढ़ गई है। रोजाना करीब 13-15 मामले पहुंच रहे हैं। अभिभावक बच्चों के बदलते व्यवहार से चिंतित होकर मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग करवा रहे हैं। एक बड़ा मामला कैथल के एक नामी निजी स्कूल के छात्र का सामने आया, जहां नौकरी के कारण माता-पिता बच्चे को समय नहीं दे पा रहे थे। बच्चे से संपर्क बनाए रखने के लिए दिया गया मोबाइल ही उसकी समस्या बन गया। बच्चा चिड़चिड़ा, जिद्दी हो गया और स्कूल से शिकायतें बढ़ने लगीं। स्थिति बिगड़ने पर अभिभावक उसे मनोचिकित्सक के पास लेकर पहुंचे।
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इन मामलों में 3 से 5 वर्ष के बच्चों के साथ 5 से 8 साल के भी बच्चे शामिल हैं। बच्चों के बदलते व्यवहार में माता-पिता की लापरवाही भी सामने आ रही है। कई माता-पिता खुद की व्यस्तता की वजह से बच्चो को मोबाइल थमा देते हैं।
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बच्चों में मोबाइल की लत छुड़ाने के उपाय



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बच्चों के साथ अधिक समय बिताएं। जैसे- उनके साथ कोई खेल खेल सकते हैं।

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परिवार का वातावरण नशे से मुक्त रखें।

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सुविधा या समय बचत के लिए बच्चों को मोबाइल फोन न दें।

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बच्चों का रुझान खेलों और आउटडोर गतिविधियों की ओर बढ़ाएं।

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फोन उपयोग के लिए सीमित समय निर्धारित करें और उसका पालन करवाएं।



मनोरोग ओपीडी में सामने आ रही समस्याएं

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उत्तेजित व्यवहार और शैक्षिक संघर्ष गंभीर समस्या बन रही।

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वर्चुअल दुनिया में खोए रहने से बच्चे वास्तविकता से दूर होते जा रहे हैं।

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छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, गालियां देना और मारपीट करने जैसी आदतें बढ़ रही हैं।

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पढ़ाई पर गंभीर असर, मासिक टेस्ट में लगातार कम नंबर।

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स्कूलों से अन्य बच्चों से लड़ाई-झगड़े की शिकायतें बढ़ रही हैं।





कई माता-पिता स्कूल में प्रदर्शन में गिरावट और बच्चों के उत्तेजित व्यवहार की शिकायतें लेकर आते हैं। नियमित मनोरोग ओपीडी में इन समस्याओं की पहचान, निदान और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाती है। एक समग्र दृष्टिकोण—जिसमें बच्चे, माता-पिता और स्कूल तीनों शामिल हों—से हम इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान कर सकते हैं। इससे बच्चे शैक्षणिक और भावनात्मक रूप से बेहतर विकास कर पाते हैं। -डॉ. विनय गुप्ता, निगरानी एवं मूल्यांकन अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल
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