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Kaithal News: रक्तदान करने पर मंजीत का सम्मान
Fri, 20 Jun 2025 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 20 Jun 2025 01:24 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। विश्व रक्तदाता दिवस के उपलक्ष्य में 14 जून से 27 जून तक प्रदेश सरकार के चलाए जा रहे कार्यक्रमों की शृंखला में कुराड़ गांव के मंजीत बूरा को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. रेनू चावला, रेडक्रॉस सचिव रामजी लाल और मोटिवेटर डॉ. बीरबल ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
मंजीत बूरा ने अब तक 60 बार स्वयं रक्तदान किया है और अपने संगठन जन नायक जन सेवा ट्रस्ट के माध्यम से 25 रक्तदान शिविरों का सफल आयोजन कर चुके हैं। जिला स्तर पर वे रक्तदान के क्षेत्र में अग्रणी माने जाते हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए मंजीत ने बताया कि वर्ष 1995 में डबवाली के एक मैरिज पैलेस में स्कूल के वार्षिक उत्सव के दौरान लगी आग की घटना ने उन्हें झकझोर दिया था। उस भीषण हादसे में 442 लोग जान गंवा बैठे थे, जिनमें 222 विद्यार्थी शामिल थे। उस समय वे स्वयं आठवीं कक्षा में पढ़ते थे। इस हादसे से भावुक होकर उन्होंने अपने स्कूल में आयोजित रक्तदान शिविर में पहली बार रक्तदान किया और संकल्प लिया कि जीवनभर रक्तदान करते रहेंगे।
उन्होंने अपना 60वां रक्तदान 13 अप्रैल को अपने ही ट्रस्ट द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में किया। उनका मानना है कि रक्तदान से शरीर में किसी भी प्रकार की कमजोरी नहीं आती, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। उन्होंने युवाओं से नियमित रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की। समर्पित सेवा और निरंतर योगदान के लिए मंजीत बूरा को राज्यपाल भी सम्मानित कर चुके हैं।
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कलायत। विश्व रक्तदाता दिवस के उपलक्ष्य में 14 जून से 27 जून तक प्रदेश सरकार के चलाए जा रहे कार्यक्रमों की शृंखला में कुराड़ गांव के मंजीत बूरा को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. रेनू चावला, रेडक्रॉस सचिव रामजी लाल और मोटिवेटर डॉ. बीरबल ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
मंजीत बूरा ने अब तक 60 बार स्वयं रक्तदान किया है और अपने संगठन जन नायक जन सेवा ट्रस्ट के माध्यम से 25 रक्तदान शिविरों का सफल आयोजन कर चुके हैं। जिला स्तर पर वे रक्तदान के क्षेत्र में अग्रणी माने जाते हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए मंजीत ने बताया कि वर्ष 1995 में डबवाली के एक मैरिज पैलेस में स्कूल के वार्षिक उत्सव के दौरान लगी आग की घटना ने उन्हें झकझोर दिया था। उस भीषण हादसे में 442 लोग जान गंवा बैठे थे, जिनमें 222 विद्यार्थी शामिल थे। उस समय वे स्वयं आठवीं कक्षा में पढ़ते थे। इस हादसे से भावुक होकर उन्होंने अपने स्कूल में आयोजित रक्तदान शिविर में पहली बार रक्तदान किया और संकल्प लिया कि जीवनभर रक्तदान करते रहेंगे।
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उन्होंने अपना 60वां रक्तदान 13 अप्रैल को अपने ही ट्रस्ट द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में किया। उनका मानना है कि रक्तदान से शरीर में किसी भी प्रकार की कमजोरी नहीं आती, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। उन्होंने युवाओं से नियमित रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की। समर्पित सेवा और निरंतर योगदान के लिए मंजीत बूरा को राज्यपाल भी सम्मानित कर चुके हैं।
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