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फसल अवशेषों का प्रबंधन समय की है मांग : प्रो. बलदेव
Fri, 14 Mar 2025 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 14 Mar 2025 01:01 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। बात्ता गांव में वीरवार को जिला स्तरीय फसल अवशेष प्रबंधन किसान मेले का आयोजन किया गया। इसमें चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष नहीं, बल्कि किसानों के लिए विशेष है और इसका प्रबंधन समय की मांग है। ऐसा करने से जहां किसान की आय बढ़ेगी। वहीं, हमारा वातावरण भी शुद्ध रहेगा और जमीन की उर्वरा शक्ति मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना होगा क्योंकि धरती मां इंसान को कभी भूखा मरने नहीं देती, लेकिन इसके लिए हमें अपने कर्म को ईमानदारी के साथ करना होगा। किसान को समय पर एवं सही तरीके से उन्नत किस्म के बीज बोने होंगे और वैज्ञानिकों को समय समय पर किसानों को मार्गदर्शन करना होगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि देश को वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाना है। हमें मिलकर उनके सपने को साकार करना है और देश को विकसित भारत बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी है। आज का युग आईटी एवं मशीनीकरण का युग है। इसकी वजह से समय की काफी बचत होती है। इस समय का व्यर्थ न गंवाकर इसका सही सदुपयोग करना चाहिए। किसानी के साथ साथ सहायक व्यवसाय करने चाहिए तथा अपने प्रोडक्ट बनाकर स्वयं उनको बेचना चाहिए। ऐसा करने से किसान की आय में निश्चित रूप से बढ़ोतरी होगी।
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चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह मंडल ने कहा कि धान के फानों में आग लगाने से आबो-हवा प्रदूषित होती हैं तथा वायु गुणवत्ता सूचकांक पर विपरीत प्रभाव पड़ता हैं, जिससे आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, हृदय समस्या आदि होती हैं। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें ताकि उनकी कमाई भी बढ़ सके।
कृषि विज्ञान केंद्र, कैथल के वरिष्ठ समन्वयक डॉ. रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ जमीनों में उपस्थित मित्र कीट भी नष्ट होते हैं जो हमारी पैदावार पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। जैविक कार्बन भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने का प्रमुख कारक हैं।
इस मेले में आसपास के सैकड़ों किसानों ने भाग लिया और कृषि विज्ञान से संबंधित आधुनिक तकनीकों की जानकारी हासिल की। इस अवसर पर प्रगतिशील किसान जॉनी राणा, प्रदीप कुमार, राजेश खेड़ी सिकंदर, पूजा आर्य, रणबीर सिंह एवं फकीर चांद आदि को सम्मानित किया गया।
मेले में विभिन्न कंपनियों एवं किसानों की स्टालें लगाई। इस अवसर पर सतीश जिंदल, डॉ. प्रसून सिंह नरवाल सहित अन्य लोग मौजूद रहें।
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कलायत। बात्ता गांव में वीरवार को जिला स्तरीय फसल अवशेष प्रबंधन किसान मेले का आयोजन किया गया। इसमें चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष नहीं, बल्कि किसानों के लिए विशेष है और इसका प्रबंधन समय की मांग है। ऐसा करने से जहां किसान की आय बढ़ेगी। वहीं, हमारा वातावरण भी शुद्ध रहेगा और जमीन की उर्वरा शक्ति मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना होगा क्योंकि धरती मां इंसान को कभी भूखा मरने नहीं देती, लेकिन इसके लिए हमें अपने कर्म को ईमानदारी के साथ करना होगा। किसान को समय पर एवं सही तरीके से उन्नत किस्म के बीज बोने होंगे और वैज्ञानिकों को समय समय पर किसानों को मार्गदर्शन करना होगा।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि देश को वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाना है। हमें मिलकर उनके सपने को साकार करना है और देश को विकसित भारत बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी है। आज का युग आईटी एवं मशीनीकरण का युग है। इसकी वजह से समय की काफी बचत होती है। इस समय का व्यर्थ न गंवाकर इसका सही सदुपयोग करना चाहिए। किसानी के साथ साथ सहायक व्यवसाय करने चाहिए तथा अपने प्रोडक्ट बनाकर स्वयं उनको बेचना चाहिए। ऐसा करने से किसान की आय में निश्चित रूप से बढ़ोतरी होगी।
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चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह मंडल ने कहा कि धान के फानों में आग लगाने से आबो-हवा प्रदूषित होती हैं तथा वायु गुणवत्ता सूचकांक पर विपरीत प्रभाव पड़ता हैं, जिससे आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, हृदय समस्या आदि होती हैं। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें ताकि उनकी कमाई भी बढ़ सके।
कृषि विज्ञान केंद्र, कैथल के वरिष्ठ समन्वयक डॉ. रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ जमीनों में उपस्थित मित्र कीट भी नष्ट होते हैं जो हमारी पैदावार पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। जैविक कार्बन भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने का प्रमुख कारक हैं।
इस मेले में आसपास के सैकड़ों किसानों ने भाग लिया और कृषि विज्ञान से संबंधित आधुनिक तकनीकों की जानकारी हासिल की। इस अवसर पर प्रगतिशील किसान जॉनी राणा, प्रदीप कुमार, राजेश खेड़ी सिकंदर, पूजा आर्य, रणबीर सिंह एवं फकीर चांद आदि को सम्मानित किया गया।
मेले में विभिन्न कंपनियों एवं किसानों की स्टालें लगाई। इस अवसर पर सतीश जिंदल, डॉ. प्रसून सिंह नरवाल सहित अन्य लोग मौजूद रहें।