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रक्षक, पालक हैं भगवान क्षेत्रपाल : पं. रविदत्त
Mon, 28 Jul 2025 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 28 Jul 2025 12:24 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। नगर में स्थित गौतम भवन के समीप नगर खेड़े पर मंगलवार को हवन और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। यह आयोजन नगर की सुख-शांति और समृद्धि की कामना के साथ प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी आयोजित किया गया। आयोजनकर्ता भगत काली राम ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसमें नगरवासियों की आस्था और सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण रहती है।
हवन की विधि पंडित रवि दत्त शास्त्री ने संपन्न करवाई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित कीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “जब कोई ग्राम, डेरा या नगर बसता है, तो सर्वप्रथम खेड़ा बनाकर उसकी पूजा की जाती है। यह परंपरा क्षेत्र की सुरक्षा, समृद्धि और बुराइयों से रक्षा हेतु की जाती है। दादा खेड़ा, जिन्हें भगवान क्षेत्रपाल भी कहा जाता है, नगरवासियों के रक्षक और पालक के रूप में प्रतिष्ठित हैं।”
पंडित शास्त्री ने आगे कहा कि, दादा खेड़ा की पूजा शुभ कार्यों से पूर्व की जाती है, जिससे आत्मबल की प्राप्ति होती है और कार्य निर्विघ्न संपन्न होता है।
कार्यक्रम में शमशेर सिंह, नंबरदार शिवकुमार, फूल सिंह भगत, राधाकृष्ण जांगड़ा, रामस्वरूप, बहादुर सिंह, काली राम भगत, नरेंद्र जांगड़ा, कुलदीप, धर्म सिंह, प्रवीण शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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पूंडरी। नगर में स्थित गौतम भवन के समीप नगर खेड़े पर मंगलवार को हवन और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। यह आयोजन नगर की सुख-शांति और समृद्धि की कामना के साथ प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी आयोजित किया गया। आयोजनकर्ता भगत काली राम ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसमें नगरवासियों की आस्था और सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण रहती है।
हवन की विधि पंडित रवि दत्त शास्त्री ने संपन्न करवाई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित कीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “जब कोई ग्राम, डेरा या नगर बसता है, तो सर्वप्रथम खेड़ा बनाकर उसकी पूजा की जाती है। यह परंपरा क्षेत्र की सुरक्षा, समृद्धि और बुराइयों से रक्षा हेतु की जाती है। दादा खेड़ा, जिन्हें भगवान क्षेत्रपाल भी कहा जाता है, नगरवासियों के रक्षक और पालक के रूप में प्रतिष्ठित हैं।”
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पंडित शास्त्री ने आगे कहा कि, दादा खेड़ा की पूजा शुभ कार्यों से पूर्व की जाती है, जिससे आत्मबल की प्राप्ति होती है और कार्य निर्विघ्न संपन्न होता है।
कार्यक्रम में शमशेर सिंह, नंबरदार शिवकुमार, फूल सिंह भगत, राधाकृष्ण जांगड़ा, रामस्वरूप, बहादुर सिंह, काली राम भगत, नरेंद्र जांगड़ा, कुलदीप, धर्म सिंह, प्रवीण शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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