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Kaithal News: घर-परिवार छोड़ मंडी में किसानों का बसेरा
Tue, 28 Oct 2025 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 28 Oct 2025 01:46 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की मंडियों में किसान अपनी फसल के पहरे पर बैठने को मजबूर हैं। उन्हें बासमती किस्म की धान के खरीदार नहीं मिल रहे। जो किसान दो-चार दिन पहले धान लेकर पहुंचे थे, वे घर-परिवार को छोड़ कर मंडी में ही फसल के पहरे पर हैं। किसानों के आरोप हैं कि उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है ताकि वे कम दाम में धान को बेचने को बाध्य हो। व्यापारी आपस में साठगांठ करके रखते हैं और तय कर लेते हैं कि किसी भी ढेरी पर ज्यादा दाम नहीं लगाने। यही कारण है कि किसानों को फसल के अच्छे दाम नहीं मिल रहे। मंदे में धान को खरीदने की होड़ मची है। बता दें कि मंडियों में बारीक धान की किस्म 1718, 1121 आदि पहुंच रही हैं। इनके रेट 32-36 सौ प्रति क्विंटल तक लगाए जा रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। गत वर्ष धान के रेट चार हजार से 42 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक रहे थे।
876055 एमटी पीआर धान की आवक
जिले की विभिन्न मंडियों में 876055 एमटी पीआर धान की आवक हो चुकी है। इसमें से 860536 एमटी की खरीद व 138042 गेटपास काटे जा चुके हैं। हालांकि पीआर धान की आवक में कमी आई है। जबकि बारीक किस्म की धान की आवक बढ़ रही है। किसान लगातार कम दाम में धान खरीद के आरोप लगा रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसान नेता होशियार गिल का कहना है कि आढ़ती, मिलर और एजेंसी मिलिभगत कर किसान को नुकसान पहुंचाते हैं। कम दाम में धान खरीद कर एमएसपी पर चढ़ा कर मुनाफा कमाने का काम करते हैं।
ये कहते किसान
- क्योड़क निवासी नरेश का कहना है कि बासमती धान को कोई खरीदने को आगे नहीं आ रहा है। किसान के लिए खेती करना समस्या बनता जा रहा है। सरकार को संज्ञान लेना चाहिए।
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- महेंद्र सिंह ने कहा कि अगर किसान मंडी में ही बैठा रहेगा तो गेहूं बिजाई का कार्य प्रभावित होगा। प्रशासन आंखें बंद कर किसानों को परेशान होते देख रहा है।
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कैथल। जिले की मंडियों में किसान अपनी फसल के पहरे पर बैठने को मजबूर हैं। उन्हें बासमती किस्म की धान के खरीदार नहीं मिल रहे। जो किसान दो-चार दिन पहले धान लेकर पहुंचे थे, वे घर-परिवार को छोड़ कर मंडी में ही फसल के पहरे पर हैं। किसानों के आरोप हैं कि उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है ताकि वे कम दाम में धान को बेचने को बाध्य हो। व्यापारी आपस में साठगांठ करके रखते हैं और तय कर लेते हैं कि किसी भी ढेरी पर ज्यादा दाम नहीं लगाने। यही कारण है कि किसानों को फसल के अच्छे दाम नहीं मिल रहे। मंदे में धान को खरीदने की होड़ मची है। बता दें कि मंडियों में बारीक धान की किस्म 1718, 1121 आदि पहुंच रही हैं। इनके रेट 32-36 सौ प्रति क्विंटल तक लगाए जा रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। गत वर्ष धान के रेट चार हजार से 42 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक रहे थे।
876055 एमटी पीआर धान की आवक
जिले की विभिन्न मंडियों में 876055 एमटी पीआर धान की आवक हो चुकी है। इसमें से 860536 एमटी की खरीद व 138042 गेटपास काटे जा चुके हैं। हालांकि पीआर धान की आवक में कमी आई है। जबकि बारीक किस्म की धान की आवक बढ़ रही है। किसान लगातार कम दाम में धान खरीद के आरोप लगा रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसान नेता होशियार गिल का कहना है कि आढ़ती, मिलर और एजेंसी मिलिभगत कर किसान को नुकसान पहुंचाते हैं। कम दाम में धान खरीद कर एमएसपी पर चढ़ा कर मुनाफा कमाने का काम करते हैं।
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ये कहते किसान
- क्योड़क निवासी नरेश का कहना है कि बासमती धान को कोई खरीदने को आगे नहीं आ रहा है। किसान के लिए खेती करना समस्या बनता जा रहा है। सरकार को संज्ञान लेना चाहिए।
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- महेंद्र सिंह ने कहा कि अगर किसान मंडी में ही बैठा रहेगा तो गेहूं बिजाई का कार्य प्रभावित होगा। प्रशासन आंखें बंद कर किसानों को परेशान होते देख रहा है।