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Kaithal News: न्यायिक परिसर में वकीलों ने किया नमन
Fri, 10 May 2024 03:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 10 May 2024 03:44 AM IST
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कैथल। जिला न्यायिक परिसर में वकीलों ने महाराणा प्रताप की जयंती धूमधाम से मनाई। चेंबर नंबर 258 पर अमित सिंह राणा की ओर से मनाई गई जयंती में वकीलों ने एकत्रित होकर होकर महाराणा प्रताप को नमन किया।
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान बलजिंद्र सिंह मलिक ने कहा कि महाराणा प्रताप ने तकलीफ सहन करने के बावजूद कभी गुलामी सहन नहीं की और ना ही पीठ दिखाई। युद्ध में मुगलों के दांत खट्टे किए और अपनी सेना का लोहा मनवाया।
उन्होंने हिंदुत्व को बचाने के लिए बलिदान दिया। अमन सिंह राणा ने बताया कि महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को राजस्थान के मेवाड़ में हुआ था। राजपूत राजघराने में जन्म लेने वाले प्रताप उदय सिंह द्वितीय और महारानी जयवंता बाई के सबसे बड़े पुत्र थे। वे एक महान पराक्रमी और युद्ध रणनीति कौशल में दक्ष थे। महाराणा प्रताप ने मुगलों के बार-बार हुए हमलों से मेवाड़ की रक्षा की। उन्होंने अपनी आन, बान और शान के लिए कभी समझौता नहीं किया। विपरीत से विपरीत परिस्थिति ही क्यों ना हों, कभी हार नहीं मानी।
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इस मौके पर संगठन के पूर्व प्रधान वेद प्रकाश ढुल, बलबीर बंसल, रमेश राणा, प्रदीप हरित, कृष्ण सैनी, नरेश शर्मा, सुनील राणा, राजेश गोरसी, दिनेश सोंगल, रामफल शर्मा, अंकुश जिंदल, गुलाब सिंह विर्क, भूपेंद्र राणा, अनुज खनौदा, जितेंद्र काद्यान, साकेत मंगल, बलबीर धीमान, राहुल गुप्ता, अजय शर्मा, सतीश धीमान और मनोज चौहान सहित भारी संख्या में वकील उपस्थित थे। संवाद
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जिला बार एसोसिएशन के प्रधान बलजिंद्र सिंह मलिक ने कहा कि महाराणा प्रताप ने तकलीफ सहन करने के बावजूद कभी गुलामी सहन नहीं की और ना ही पीठ दिखाई। युद्ध में मुगलों के दांत खट्टे किए और अपनी सेना का लोहा मनवाया।
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उन्होंने हिंदुत्व को बचाने के लिए बलिदान दिया। अमन सिंह राणा ने बताया कि महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को राजस्थान के मेवाड़ में हुआ था। राजपूत राजघराने में जन्म लेने वाले प्रताप उदय सिंह द्वितीय और महारानी जयवंता बाई के सबसे बड़े पुत्र थे। वे एक महान पराक्रमी और युद्ध रणनीति कौशल में दक्ष थे। महाराणा प्रताप ने मुगलों के बार-बार हुए हमलों से मेवाड़ की रक्षा की। उन्होंने अपनी आन, बान और शान के लिए कभी समझौता नहीं किया। विपरीत से विपरीत परिस्थिति ही क्यों ना हों, कभी हार नहीं मानी।
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इस मौके पर संगठन के पूर्व प्रधान वेद प्रकाश ढुल, बलबीर बंसल, रमेश राणा, प्रदीप हरित, कृष्ण सैनी, नरेश शर्मा, सुनील राणा, राजेश गोरसी, दिनेश सोंगल, रामफल शर्मा, अंकुश जिंदल, गुलाब सिंह विर्क, भूपेंद्र राणा, अनुज खनौदा, जितेंद्र काद्यान, साकेत मंगल, बलबीर धीमान, राहुल गुप्ता, अजय शर्मा, सतीश धीमान और मनोज चौहान सहित भारी संख्या में वकील उपस्थित थे। संवाद