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Kaithal News: मेहनत से लक्ष्मी ने बदली जिंदगी
Sat, 15 Nov 2025 12:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 15 Nov 2025 12:16 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर गांव क्योड़क की लक्ष्मी की जिंदगी बदल गई है। स्व–सहायता समूह से प्रशिक्षण लेने के बाद लक्ष्मी ने बैंक से 1 लाख रुपये का ऋण लेकर फास्ट फूड का कारोबार शुरू किया। शुरुआती संघर्षों के बाद आज वह हर महीने 15 से 18 हजार रुपये तक की कमाई कर रही हैं।
सरकार की योजनाओं का लाभ पाकर उन्होंने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि अपने परिवार को भी आर्थिक मजबूती दी। लक्ष्मी के पति पहले ऑटो चलाते थे, लेकिन काम कम मिलने के कारण घर खर्च निकालना मुश्किल हो गया था। बढ़ते कर्ज के बीच लक्ष्मी ने स्व–सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। प्रशिक्षण के बाद जब काम बढ़ा तो पति भी साथ आ गए और उन्होंने अपने ऑटो को ही फास्ट फूड स्टॉल में बदल दिया। अब पति–पत्नी दोनों अलग–अलग जगहों, आयोजनों और मेलों में स्टॉल लगाकर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं।
इन दिनों लक्ष्मी पंचकूला में चल रहे सरस मेले में अपना स्टॉल लगाए हुए हैं। राज्य के विभिन्न जिलों में जहां भी मेले लगते हैं, वह अपने ऑटो–स्टॉल के साथ पहुंच जाती हैं और अपने स्वादिष्ट व्यंजनों से ग्राहकों को आकर्षित करती हैं। लक्ष्मी का कहना है कि समूह से जुड़ना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा निर्णय था। कभी बढ़ते कर्ज और आर्थिक तंगी से परेशान उनका परिवार अब स्थिर है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर के खर्च तक सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है।
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लक्ष्मी के पति बताते हैं कि सरकारी ऋण सहायता ने उनकी दुनिया बदल दी है। पहले ऑटो से मुश्किल से खर्च निकलता था, लेकिन अब फास्ट फूड कारोबार ने उनकी आय बढ़ा दी है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
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कैथल। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर गांव क्योड़क की लक्ष्मी की जिंदगी बदल गई है। स्व–सहायता समूह से प्रशिक्षण लेने के बाद लक्ष्मी ने बैंक से 1 लाख रुपये का ऋण लेकर फास्ट फूड का कारोबार शुरू किया। शुरुआती संघर्षों के बाद आज वह हर महीने 15 से 18 हजार रुपये तक की कमाई कर रही हैं।
सरकार की योजनाओं का लाभ पाकर उन्होंने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि अपने परिवार को भी आर्थिक मजबूती दी। लक्ष्मी के पति पहले ऑटो चलाते थे, लेकिन काम कम मिलने के कारण घर खर्च निकालना मुश्किल हो गया था। बढ़ते कर्ज के बीच लक्ष्मी ने स्व–सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। प्रशिक्षण के बाद जब काम बढ़ा तो पति भी साथ आ गए और उन्होंने अपने ऑटो को ही फास्ट फूड स्टॉल में बदल दिया। अब पति–पत्नी दोनों अलग–अलग जगहों, आयोजनों और मेलों में स्टॉल लगाकर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं।
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इन दिनों लक्ष्मी पंचकूला में चल रहे सरस मेले में अपना स्टॉल लगाए हुए हैं। राज्य के विभिन्न जिलों में जहां भी मेले लगते हैं, वह अपने ऑटो–स्टॉल के साथ पहुंच जाती हैं और अपने स्वादिष्ट व्यंजनों से ग्राहकों को आकर्षित करती हैं। लक्ष्मी का कहना है कि समूह से जुड़ना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा निर्णय था। कभी बढ़ते कर्ज और आर्थिक तंगी से परेशान उनका परिवार अब स्थिर है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर के खर्च तक सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है।
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लक्ष्मी के पति बताते हैं कि सरकारी ऋण सहायता ने उनकी दुनिया बदल दी है। पहले ऑटो से मुश्किल से खर्च निकलता था, लेकिन अब फास्ट फूड कारोबार ने उनकी आय बढ़ा दी है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।