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पबनावा में कश्मीर सिंह को मिली सबसे बड़ी जीत
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20-ढांड। पबनावा जीत के बाद हुक्के पर बातचीत करते हुए सरपंच कश्मीर सिंह व ग्रामीण।
- फोटो : Kaithal
ढांड। पबनावा में कश्मीर सिंह ने सरपंच पद के लिए रिकार्ड मत हासिल कर जीत का परचम लहराया है। एमए, एमफिल पास युवा सरपंच ग्रामीणों की पहली पसंद रही है। इसके लिए ग्रामीणों ने जी तोड़ मतदान करके उसे गांव की चौधर देने का काम किया है।
पबनावा में कुल 8035 मतदाता है। इनमें से 6114 वोट पोल हुए है। 3635 मतदाताओं की पहली पसंद कशमीर सिंह रहे। उन्होंने रिकॉर्ड 2248 मतों के अंतर से जीत दर्ज कर जिला कैथल में सबसे अधिक मतों से सरपंच बनने का गौरव प्राप्त किया है। जिला कैथल में शायद ऐसा पहली बार ही हुआ है कि इतने भारी मतों के अंतर से कोई सरपंच चुनाव जीत पाया हो। कश्मीर सिंह के प्रतिद्वंधी को केवल 1187 मत ही मिले। जब इस बारे में गांव के 80 वर्षीय बुजुर्ग चमेल सिंह से बात की तो उन्होंने इस बड़ी जीत का राज बताते हुए कहा कि कश्मीर सिंह की पहचान एक समाज सेवी के तौर पर है। गांव के हर व्यक्ति के दुख सुख का साथी है।
सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का काम पिछले कई वर्षों से कर रहे हैं। कश्मीर सिंह ने इतने भारी मतों के अंतर से सरपंच पद की जिम्मेदारी सौंपने के लिए समस्त ग्रामीणों का आभार प्रकट किया है। कश्मीर सिंह ने बताया कि वह 2010 में भी सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ चुका है। उस समय वह चौथे नंबर पर रह गया था।
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पबनावा में कुल 8035 मतदाता है। इनमें से 6114 वोट पोल हुए है। 3635 मतदाताओं की पहली पसंद कशमीर सिंह रहे। उन्होंने रिकॉर्ड 2248 मतों के अंतर से जीत दर्ज कर जिला कैथल में सबसे अधिक मतों से सरपंच बनने का गौरव प्राप्त किया है। जिला कैथल में शायद ऐसा पहली बार ही हुआ है कि इतने भारी मतों के अंतर से कोई सरपंच चुनाव जीत पाया हो। कश्मीर सिंह के प्रतिद्वंधी को केवल 1187 मत ही मिले। जब इस बारे में गांव के 80 वर्षीय बुजुर्ग चमेल सिंह से बात की तो उन्होंने इस बड़ी जीत का राज बताते हुए कहा कि कश्मीर सिंह की पहचान एक समाज सेवी के तौर पर है। गांव के हर व्यक्ति के दुख सुख का साथी है।
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सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का काम पिछले कई वर्षों से कर रहे हैं। कश्मीर सिंह ने इतने भारी मतों के अंतर से सरपंच पद की जिम्मेदारी सौंपने के लिए समस्त ग्रामीणों का आभार प्रकट किया है। कश्मीर सिंह ने बताया कि वह 2010 में भी सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ चुका है। उस समय वह चौथे नंबर पर रह गया था।
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