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Kaithal News: कलायत स्टेशन 134 वर्ष पुराना पर रौनक नहीं
Mon, 16 Sep 2024 07:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 16 Sep 2024 07:29 AM IST
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कलायत। कलायत में अंग्रेजों के जमाने से व्यापार के साथ-साथ यात्रा की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे 134 वर्ष पुराने रेलवे स्टेशन पर रौनक नहीं है। पहले स्टेशन पर मालगाड़ियों का ठहराव होता था। इसलिए सामान के आयात-निर्यात के लिए भंडारण गृह भी स्टेशन परिसर मेंं बनाए थे।
वर्तमान मेंं भंडारण गृह भी अस्तित्व तलाश रहा है। इस तरह स्टेशन पर घटती सुविधाओंं के चलते न तो व्यापार को बढ़ावा मिल पा रहा है और न ही यात्रियोंं का आवागमन रहा। मुख्य रूप से कोरोना काल के बाद बड़े बदलाव हुए। इसके तहत दो यात्री गाड़ियों को तो सारणी से ही हटा दिया है। इनमें कुरुक्षेत्र से जींद और जींद से कुरुक्षेत्र जाने वाली गाड़ी शामिल हैं। इससे पहले वर्ष 1957 के बाद अंबाला से वाया कलायत नरवाना जाने वाली गाड़ी और नरवाना से अंबाला जाने वाली गाड़ी को बंद किया गया था।
पहले से सुदृढ़ हुई सुविधाएं : दीक्षित
कलायत के मुख्य स्टेशन मास्टर जयवीर दीक्षित ने बताया कि शीर्ष अधिकारियों के निर्देश अनुसार रेल सुविधा दी जा रही है। पहले की तुलना में यात्री गाडिय़ों की संख्या कम हुई है। जबकि ट्रेनों की स्पीड 65 से बढ़ाकर 110 हो गई है। इसके साथ ही भवन, आधुनिकीकरण और अन्य बुनियादी सुविधाएं बढ़ी हैं। स्टेशन पर यात्री गाड़ियों की संख्या बढ़ाने के लिए जो मांगें स्थानीय स्तर पर उठाई गई हैं। उनको नियम अनुसार मुख्यालय को भेजा गया है।
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तीन पीढि़यों से चल रही चाय की दुकान
कलायत रेलवे स्टेशन के पास आजादी के एक वर्ष बाद से अपने दादा दयाल राम कौशिक की ओर से शुरू चाय की दुकान की जिम्मेदारी संभाल रहे रवि शंकर शर्मा ने बताया कि पहले स्टेशन बेहद गुलजार रहता था। दादा के बाद पिता सूरजभान कौशिक चाय की दुकान संभालते थे। उन्होंने अपने पिता और अपने खुद के दौर मेंं बरातोंं को रेल से आते-जाते देखा। रथ मंझोली के जरिये स्टेशन से घर तक दुल्हन को ले जाया जाता था। उस समय मनोरंजन के मुख्य संसाधन सांग होते थे। घर से स्टेशन तक आने के लिए सामान्य रूप से बैलगाड़ी और घोड़ा गाड़ी का इस्तेमाल होता था।
कब-कब शुरू हुई गाड़ी
वर्ष 1970 में जींद से कुरुक्षेत्र व कुरुक्षेत्र से जींद की यात्री गाड़ी शुरू हुई। 2014 में कुरुक्षेत्र-दिल्ली व जयपुर-चंडीगढ़ ट्रेन शुरू हुई। जयपुर-चंडीगढ़ ट्रेन के कलायत स्टेशन पर ठहराव का मुद्दा बतौर सांसद मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी संसद में उठा चुके हैं। इससे पहले कलायत रेलवे स्टेशन पर 1890 से लेकर 1957 के बीच तक चार गाडिय़ां ही चलती थी। इसमेंं जींद से कुरुक्षेत्र, कुरुक्षेत्र से जींद, अंबाला से नरवाना और नरवाना से अंबाला यात्री गाड़ी शामिल रही।
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वर्तमान मेंं भंडारण गृह भी अस्तित्व तलाश रहा है। इस तरह स्टेशन पर घटती सुविधाओंं के चलते न तो व्यापार को बढ़ावा मिल पा रहा है और न ही यात्रियोंं का आवागमन रहा। मुख्य रूप से कोरोना काल के बाद बड़े बदलाव हुए। इसके तहत दो यात्री गाड़ियों को तो सारणी से ही हटा दिया है। इनमें कुरुक्षेत्र से जींद और जींद से कुरुक्षेत्र जाने वाली गाड़ी शामिल हैं। इससे पहले वर्ष 1957 के बाद अंबाला से वाया कलायत नरवाना जाने वाली गाड़ी और नरवाना से अंबाला जाने वाली गाड़ी को बंद किया गया था।
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पहले से सुदृढ़ हुई सुविधाएं : दीक्षित
कलायत के मुख्य स्टेशन मास्टर जयवीर दीक्षित ने बताया कि शीर्ष अधिकारियों के निर्देश अनुसार रेल सुविधा दी जा रही है। पहले की तुलना में यात्री गाडिय़ों की संख्या कम हुई है। जबकि ट्रेनों की स्पीड 65 से बढ़ाकर 110 हो गई है। इसके साथ ही भवन, आधुनिकीकरण और अन्य बुनियादी सुविधाएं बढ़ी हैं। स्टेशन पर यात्री गाड़ियों की संख्या बढ़ाने के लिए जो मांगें स्थानीय स्तर पर उठाई गई हैं। उनको नियम अनुसार मुख्यालय को भेजा गया है।
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तीन पीढि़यों से चल रही चाय की दुकान
कलायत रेलवे स्टेशन के पास आजादी के एक वर्ष बाद से अपने दादा दयाल राम कौशिक की ओर से शुरू चाय की दुकान की जिम्मेदारी संभाल रहे रवि शंकर शर्मा ने बताया कि पहले स्टेशन बेहद गुलजार रहता था। दादा के बाद पिता सूरजभान कौशिक चाय की दुकान संभालते थे। उन्होंने अपने पिता और अपने खुद के दौर मेंं बरातोंं को रेल से आते-जाते देखा। रथ मंझोली के जरिये स्टेशन से घर तक दुल्हन को ले जाया जाता था। उस समय मनोरंजन के मुख्य संसाधन सांग होते थे। घर से स्टेशन तक आने के लिए सामान्य रूप से बैलगाड़ी और घोड़ा गाड़ी का इस्तेमाल होता था।
कब-कब शुरू हुई गाड़ी
वर्ष 1970 में जींद से कुरुक्षेत्र व कुरुक्षेत्र से जींद की यात्री गाड़ी शुरू हुई। 2014 में कुरुक्षेत्र-दिल्ली व जयपुर-चंडीगढ़ ट्रेन शुरू हुई। जयपुर-चंडीगढ़ ट्रेन के कलायत स्टेशन पर ठहराव का मुद्दा बतौर सांसद मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी संसद में उठा चुके हैं। इससे पहले कलायत रेलवे स्टेशन पर 1890 से लेकर 1957 के बीच तक चार गाडिय़ां ही चलती थी। इसमेंं जींद से कुरुक्षेत्र, कुरुक्षेत्र से जींद, अंबाला से नरवाना और नरवाना से अंबाला यात्री गाड़ी शामिल रही।