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Kaithal News: प्रकृति के करिश्मे के रूप में 250 सौ वर्ष पुराना तेंदू का पेड़ है कलायत में

Tue, 20 May 2025 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 20 May 2025 01:26 AM IST
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Kalayat has a 250-year-old Tendu tree as a miracle of nature
कृति के चमत्कार निराले हैं। कलायत में एक शापित तेंदू का पेड़ विद्यमान है जो करीब तीन मीटर का है। यह न तो बढ़ता है और न इस पर पतझड़ का प्रभाव पड़ता है। सदैव हराभरा रहने वाले इस पेड़ पर समय के साथ बौर तो आते हैं पर कभी फल नहीं लगते। जी हां हम बात कर रहे हैं राष्ट्रीय धरोहर ब्रिक टेंपल परिसर में बनी बाबा चिमन ऋषि की समाधि पर स्थित तेंदू के पेड़ की।
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बाबा चिमन ऋषि और इस शापित पेड़ का लिखित में इतिहास नहीं मिलता पर करीब 90 से 95 वर्ष की आयु के श्रीचंद, मामन राज, लक्ष्मी देवी, भागवंती देवी, अवधेश शर्मा से बताया कि उन्होंने अपने पूर्वजों से इनके बारे में चर्चा करते सुना है। इसके हिसाब से इस तेंदू के पौधे की आयु 250 वर्ष के आस पास है।
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बाबा की समाधि भंग होने पर दिया था श्राप
लक्ष्मी देवी ने बताया कि उनके ससुर कहा करते करते थे कि बाबा चिमन सिद्ध पुरुष हुए हैं और वे कपिल तीर्थ के किनारे तपस्या करते थे। एक बाद इस केंदू के पौधे पर खूब फल आया हुआ था। मान्यता है कि पौधे के नीचे बाबा समाधिस्थ थे और उनके ऊपर केंदू के फल टूट कर गिरने लगे। समाधि भंग होने के कारण क्रोधित बाबा चिमन ने केंदू के पौधे को श्राप दे दिया कि आज के बाद तुझ पर न तो कभी फल आऐगा और तू न बढ़ेगा तथा सदा हराभरा रहेगा। लक्ष्मी ने कहा कि चिमन बाबा की समाधि पर सैकड़ों लोग सुबह सायं पूजा करने आते हैं और इस वृक्ष के दर्शन भी करते हैं।
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तेंदू की ऊंचाई 8 से 18 मीटर होती है और आयु लगभग 200 साल हो सकती है। इसकी पत्तियों, छाल और फल का उपयोग त्वचा रोग, अल्सर और पाचन विकारों के इलाज के लिए किया जाता है। - प्रणपाल, वन अधिकारी, कलायत।


यह भी जानें

तेंदु को छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड समेत कई जगहों पर ''केंदु'' भी कहते हैं। इसकी छाल कठोर व सूखी होती है। इसे जलाने पर चिनगारी तथा आवाज निकलती हैं। तेंदू का फल मीठा होता है। इसे डायोस्पायरोस मेलानॉक्सिलन के नाम से भी जाना जाता है।
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