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Kaithal News: कैलरम की बेटी कविता ने फुटबाॅल में बनाई पहचान
Wed, 16 Sep 2026 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 16 Sep 2026 12:14 AM IST
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फुटबॉल खिलाड़ी कविता
कसान। आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी यदि हौसले बुलंद हो तो सफलता की राह जरूर बनती है। गांव कैलरम की 18 वर्षीय फुटबॉल खिलाड़ी कविता ने इसकी मिसाल पेश की हैं। उन्होंने प्रतियोगिताओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाई।
कविता ने बताया कि वह राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। हाल ही में गोवा में आयोजित राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में उन्होंने हरियाणा की टीम का प्रतिनिधित्व किया। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रदेश की ओर से खेलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे उनके परिवार के साथ-साथ गांव और जिले का नाम भी रोशन हुआ है।
कविता ने बताया कि उन्होंने सीमित संसाधनों और मुश्किल हालात के बावजूद फुटबॉल के प्रति अपने जुनून को कमजोर नहीं पड़ने दिया। वे पिछले करीब तीन वर्षों से गांव के सरकारी स्कूल में संचालित फुटबॉल खेल नर्सरी में नियमित अभ्यास कर रही हैं। 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद उनके पिता सुरेंद्र, जो पेशे से चालक हैं, गंभीर रूप से बीमार हो गए। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। हालात कठिन हुए तो उन्होंने अपने सपने को छोड़ने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। उन्होंने एक निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ फुटबॉल का भी अभ्यास किया।
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परिवार का सहारा भी, सपना भी बरकरार
चार भाई-बहनों वाले परिवार में आर्थिक चुनौतियां आज भी बनी हुई हैं। इसके बावजूद परिवार ने कविता का हौसला कम नहीं होने दिया। कविता भी परिस्थितियों के आगे हार मानने को तैयार नहीं हैं। उनका सपना फुटबॉल में कॅरिअर बनाकर देश के लिए पदक जीतना और अपने गांव का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करना है।
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कविता ने बताया कि वह राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। हाल ही में गोवा में आयोजित राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में उन्होंने हरियाणा की टीम का प्रतिनिधित्व किया। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रदेश की ओर से खेलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे उनके परिवार के साथ-साथ गांव और जिले का नाम भी रोशन हुआ है।
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कविता ने बताया कि उन्होंने सीमित संसाधनों और मुश्किल हालात के बावजूद फुटबॉल के प्रति अपने जुनून को कमजोर नहीं पड़ने दिया। वे पिछले करीब तीन वर्षों से गांव के सरकारी स्कूल में संचालित फुटबॉल खेल नर्सरी में नियमित अभ्यास कर रही हैं। 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद उनके पिता सुरेंद्र, जो पेशे से चालक हैं, गंभीर रूप से बीमार हो गए। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। हालात कठिन हुए तो उन्होंने अपने सपने को छोड़ने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। उन्होंने एक निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ फुटबॉल का भी अभ्यास किया।
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परिवार का सहारा भी, सपना भी बरकरार
चार भाई-बहनों वाले परिवार में आर्थिक चुनौतियां आज भी बनी हुई हैं। इसके बावजूद परिवार ने कविता का हौसला कम नहीं होने दिया। कविता भी परिस्थितियों के आगे हार मानने को तैयार नहीं हैं। उनका सपना फुटबॉल में कॅरिअर बनाकर देश के लिए पदक जीतना और अपने गांव का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करना है।