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Kaithal News: नहर विभाग के जेई और एसडीओ बरी
Thu, 16 Jan 2025 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 16 Jan 2025 01:24 AM IST
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कैथल। एडीजे अमित गर्ग की अदालत ने रिश्वत मांगने के एक मामले में नहर विभाग के एक जेई और एसडीओ को शक का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। इन दोनों पर एक ठेकेदार से पांच हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप था। इस बारे में ठेकेदार सुरेंद्र सिंह निवासी गांव कोलेखां ने एसीबी पुलिस स्टेशन अंबाला में मुकदमा दर्ज करवाया था।
शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता ने शेरगढ़ गुहना लिंक चैनल एक का काम लिया हुआ था। यह काम पूरी करके उसने वर्ष 2013 में विभाग को दे दिया जिसकी लगभग 4.50 लाख रुपये का भुगतान उसे मिल गया था। इसी काम का अंतिम भुगतान लगभग एक लाख रुपये बकाया था। इसके लिए सुरेंद्र ठेकेदार जेई बलवंत सिंह को मिला। जेई ने कहा कि एसडीओ बलजीत सिंह से मिलो।
इसके बाद वह बलजीत सिंह एसडीओ को मिला और बकाया राशि के लिए विनती की। एसडीओ ने कहा कि यह राशि भुगतान करवाने के लिए पांच-छह हजार रुपये लगेंगे। एसडीओ ने पांच हजार लेकर उसे अपने दफ्तर बुलाया। इसकी शिकायत सुरेंद्र ने एसीबी के इंस्पेक्टर एसीबी कैथल को कर दी।
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उसने इंस्पेक्टर को 500-500 रुपये के 10 नोट पेश कर दिए। एसीबी दबिश देने के लिए पार्टी तैयार की और बलवंत सिंह को सुरेंद्र से पांच हजार रुपए लेते हुए रंगेहाथों पकड़ लिया। एसीबी ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। संवाद
शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता ने शेरगढ़ गुहना लिंक चैनल एक का काम लिया हुआ था। यह काम पूरी करके उसने वर्ष 2013 में विभाग को दे दिया जिसकी लगभग 4.50 लाख रुपये का भुगतान उसे मिल गया था। इसी काम का अंतिम भुगतान लगभग एक लाख रुपये बकाया था। इसके लिए सुरेंद्र ठेकेदार जेई बलवंत सिंह को मिला। जेई ने कहा कि एसडीओ बलजीत सिंह से मिलो।
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इसके बाद वह बलजीत सिंह एसडीओ को मिला और बकाया राशि के लिए विनती की। एसडीओ ने कहा कि यह राशि भुगतान करवाने के लिए पांच-छह हजार रुपये लगेंगे। एसडीओ ने पांच हजार लेकर उसे अपने दफ्तर बुलाया। इसकी शिकायत सुरेंद्र ने एसीबी के इंस्पेक्टर एसीबी कैथल को कर दी।
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उसने इंस्पेक्टर को 500-500 रुपये के 10 नोट पेश कर दिए। एसीबी दबिश देने के लिए पार्टी तैयार की और बलवंत सिंह को सुरेंद्र से पांच हजार रुपए लेते हुए रंगेहाथों पकड़ लिया। एसीबी ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। संवाद