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Kaithal News: चुनाव से संबंधित हर सामग्री पर मुद्रक और प्रकाशक का नाम जरूरी
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कैथल। जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने चुनाव प्रचार सामग्री प्रकाशित करने को लेकर हिदायतें जारी की है। इसके तहत प्रिंटिंग प्रेस मालिकों से बिना जांच पड़ताल व नियमों के विरुद्ध चुनाव प्रचार सामग्री प्रकाशित न करने का आह्वान किया गया है।
डीसी प्रशांत पंवार ने चुनाव के दौरान मुद्रक व प्रकाशक के नाम के बिना चुनाव से संबंधित पम्फलेट व पोस्टर आदि छापना जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 127 ए का उल्लंघन है। ऐसा करने वाले प्रिंटर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा-188 के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि चुनाव से संबंधित हर सामग्री पर मुद्रक और प्रकाशक का नाम अवश्य छापें। भारतीय चुनाव आयोग ने लोकसभा उम्मीदवारों के खर्च की सीमा निर्धारित की हुई है, इसलिए यह जरूरी है कि उनके पंफलेट व पोस्टर आदि के खर्च का पूरा हिसाब किताब रहे। लोकसभा आम चुनाव से संबंधित पंफलेट व पोस्टर आदि उसी स्थिति में छापें जब सामग्री छपवाने वाला व्यक्ति हलफनामे के साथ दो गवाह दे और उनके हस्ताक्षर भी लेने जरूरी हैं। ऐसे पोस्टर व पम्फलेट आदि छापने के बाद उनकी एक कॉपी जिला मजिस्ट्रेट को भेजनी होगी और राज्य स्तर पर मुख्य चुनाव अधिकारी को कॉपी भेजकर यह बताना होगा कि अमुक व्यक्ति ने चुनाव से संबंधित कितनी संख्या में पोस्टर अथवा पम्फलेट छपवाए हैं और उनके खर्च का भी विवरण देना होगा। उन्होंने कहा कि कॉपी से कॉपी करना भी इसी श्रेणी में आता है। चुनाव पंफलेट/पोस्टर का अर्थ प्रचार के लिए प्रयोग किए जाने वाले उन सभी कागजातों से है, जिनमें किसी भी राजनैतिक दल या लोकसभा चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार से संबंधित प्रचार की जानकारी हो।
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डीसी प्रशांत पंवार ने चुनाव के दौरान मुद्रक व प्रकाशक के नाम के बिना चुनाव से संबंधित पम्फलेट व पोस्टर आदि छापना जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 127 ए का उल्लंघन है। ऐसा करने वाले प्रिंटर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा-188 के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि चुनाव से संबंधित हर सामग्री पर मुद्रक और प्रकाशक का नाम अवश्य छापें। भारतीय चुनाव आयोग ने लोकसभा उम्मीदवारों के खर्च की सीमा निर्धारित की हुई है, इसलिए यह जरूरी है कि उनके पंफलेट व पोस्टर आदि के खर्च का पूरा हिसाब किताब रहे। लोकसभा आम चुनाव से संबंधित पंफलेट व पोस्टर आदि उसी स्थिति में छापें जब सामग्री छपवाने वाला व्यक्ति हलफनामे के साथ दो गवाह दे और उनके हस्ताक्षर भी लेने जरूरी हैं। ऐसे पोस्टर व पम्फलेट आदि छापने के बाद उनकी एक कॉपी जिला मजिस्ट्रेट को भेजनी होगी और राज्य स्तर पर मुख्य चुनाव अधिकारी को कॉपी भेजकर यह बताना होगा कि अमुक व्यक्ति ने चुनाव से संबंधित कितनी संख्या में पोस्टर अथवा पम्फलेट छपवाए हैं और उनके खर्च का भी विवरण देना होगा। उन्होंने कहा कि कॉपी से कॉपी करना भी इसी श्रेणी में आता है। चुनाव पंफलेट/पोस्टर का अर्थ प्रचार के लिए प्रयोग किए जाने वाले उन सभी कागजातों से है, जिनमें किसी भी राजनैतिक दल या लोकसभा चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार से संबंधित प्रचार की जानकारी हो।
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