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Kaithal News: धान खरीद की कच्ची पर्ची पर बैठी जांच

Sat, 25 Oct 2025 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 25 Oct 2025 01:05 AM IST
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Investigation on raw slip of paddy purchase
अमर उजाला में प्रका​शित समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। अनाज मंडियों में किसानों से सरकारी दर से कम रेट पर धान खरीदकर कच्ची पर्ची देने के मामले ने अब प्रशासन को भी सक्रिय कर दिया है। एसडीएम अजय सिंह ने कहा कि मामला मेरे संज्ञान में है। इसकी जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी किसान की पीआर फसल को एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) से कम दाम पर नहीं खरीदा जाएगा। यदि किसी की संलिप्तता पाई गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

एसडीएम ने मंडियों में आढ़तियों द्वारा किसानों को दी जाने वाली कच्ची पर्चियों को लेकर विभागीय जांच बिठा दी है। अब जांच का दायरा किन तक पहुंचेगा, यह देखने वाली बात होगी। सूत्रों के अनुसार, यह खेल आढ़ती, राइस मिलर और सरकारी खरीद एजेंसियों की मिलीभगत से चल रहा था। इन तीनों के माध्यम से ही धान की खरीद का अधिकांश लेनदेन होता है।
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खबर प्रकाशित होने के बाद मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद ही जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है।

किसानों को नुकसान ः मंडियों में धान लेकर पहुंचने वाले किसानों को पहले तो अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है, ऊपर से कच्ची पर्ची का खेल अलग मुसीबत बन गया है। किसानों का आरोप है कि आढ़ती, राइस मिलर और खरीद एजेंसियां योजनाबद्ध तरीके से मिलकर उन्हें कम दाम पर फसल बेचने को मजबूर कर रही हैं।
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कभी फसल की गुणवत्ता में कमी तो कभी नमी अधिक होने का बहाना बनाकर खरीद टाल दी जाती है। किसान कई दिनों तक मंडी में अटके रहते हैं और आखिरकार मजबूरी में कम दाम पर धान बेच देते हैं।


बाद में आढ़ती उन्हें कच्ची पर्ची देकर कहते हैं कि “एमएसपी के अंतर के रुपये खाते में आने के बाद

वापस करने होंगे।” सालभर के

लेनदेन के कारण किसान विरोध भी नहीं कर पाते।

इस कथित ठगी के खेल में किसान पिस रहे हैं, लेकिन एजेंसियों और मंडी अधिकारियों ने अब तक चुप्पी साध रखी है। इस पर मंडी सचिव का कहना है कि किसानों से लिखित शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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