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Kaithal News: डिजिटल बदलावों को आगे बढ़ाने में मदद करता है नवाचार
Wed, 26 Mar 2025 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 26 Mar 2025 01:15 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। उच्चतर शिक्षा विभाग पंचकूला के सौजन्य से बाबू अनंत राम जनता कॉलेज कौल में अभिनव अनुसंधान दृष्टिकोण विषय पर एक दिवसीय बहु-विषयक राष्ट्रीय सेमिनार को आयोजन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता के तौर पर पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के डाॅ. मंजीत सिंह ने शिरकत की। उन्होंने नवाचारी अनुसंधान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह समाज में चल रहे हरित और डिजिटल बदलावों को आगे बढ़ाने में मदद करता है।
उन्होंने विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नवाचारी अनुसंधान दृष्टिकोणों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हमें नवाचारी और प्रभावी तरीकों का उपयोग करना होगा। सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रौद्योगिकी का महत्व बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि हम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अभिनव दृष्टिकोणों का उपयोग करके सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं। द्वितीय सत्र में विशेष वक्ता प्रो. अनिल मित्तल ने कहा कि अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में नवाचारी दृष्टिकोणों का उपयोग करके हम सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं।
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विशेष वक्ता डाॅ. विकास सिंगला ने कहा सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अभिनव अनुसंधान दृष्टिकोण अपनाने का मतलब है, मौजूदा चुनौतियों के समाधान के लिए नए और रचनात्मक तरीके खोजना। जैसे कि जलवायु परिवर्तन, गरीबी और असमानता। इस दौरान सतत विकास के तीन स्तंभ आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान किया जाना चाहिए।
अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डा. ऋषिपाल ने कहा कि यह सेमिनार छात्रों और शिक्षकों के बीच एक अद्वितीय मंच प्रदान करने का उद्देश्य रखता है। जिससे उन्हें नवीनतम और प्रभावी तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त हो।
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ढांड। उच्चतर शिक्षा विभाग पंचकूला के सौजन्य से बाबू अनंत राम जनता कॉलेज कौल में अभिनव अनुसंधान दृष्टिकोण विषय पर एक दिवसीय बहु-विषयक राष्ट्रीय सेमिनार को आयोजन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता के तौर पर पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के डाॅ. मंजीत सिंह ने शिरकत की। उन्होंने नवाचारी अनुसंधान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह समाज में चल रहे हरित और डिजिटल बदलावों को आगे बढ़ाने में मदद करता है।
उन्होंने विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नवाचारी अनुसंधान दृष्टिकोणों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हमें नवाचारी और प्रभावी तरीकों का उपयोग करना होगा। सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रौद्योगिकी का महत्व बढ़ गया है।
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उन्होंने कहा कि हम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अभिनव दृष्टिकोणों का उपयोग करके सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं। द्वितीय सत्र में विशेष वक्ता प्रो. अनिल मित्तल ने कहा कि अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में नवाचारी दृष्टिकोणों का उपयोग करके हम सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं।
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विशेष वक्ता डाॅ. विकास सिंगला ने कहा सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अभिनव अनुसंधान दृष्टिकोण अपनाने का मतलब है, मौजूदा चुनौतियों के समाधान के लिए नए और रचनात्मक तरीके खोजना। जैसे कि जलवायु परिवर्तन, गरीबी और असमानता। इस दौरान सतत विकास के तीन स्तंभ आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान किया जाना चाहिए।
अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डा. ऋषिपाल ने कहा कि यह सेमिनार छात्रों और शिक्षकों के बीच एक अद्वितीय मंच प्रदान करने का उद्देश्य रखता है। जिससे उन्हें नवीनतम और प्रभावी तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त हो।