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Kaithal News: अध्यात्म के मार्ग पर चलकर ही भारत बनेगा विश्व गुरु

Fri, 08 Sep 2023 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 08 Sep 2023 01:41 AM IST
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India will become world guru only by following the path of spirituality

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कैथल। शहर की नई अनाज मंडी में वीरवार शाम के समय मानव उत्थान सेवा समिति ने विशाल सद्भावना सम्मेलन आयोजित किया। कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अध्यात्म के मार्ग पर चलकर ही भारत विश्व गुरु बन सकता है। देश को पूरे विश्व का सिरमौर बनाने के लिए हमें अपने अंदर छुपी आध्यात्मिक शक्ति को जागृत करना होगा।

इस सम्मेलन में हरियाणा के साथ-साथ अन्य प्रदेशों से श्रद्धालु पहुंचे। सतपाल महाराज ने गीता ज्ञान की चर्चा की और कहा कि महाभारत युद्ध में जब अर्जुन मोहग्रस्त होकर अपना गांडीव त्याग देता है और भगवान श्री कृष्ण से कहता है कि मैं इन सबका वध नहीं कर सकता, ये मेरे सगे-संबंधी हैं, नाते-रिश्तेदार हैं, तो भगवान कृष्ण अर्जुन को अपने निज स्वरूप का बोध कराते हैं और कहते हैं कि अर्जुन मैं तुझे दिव्य नेत्र देता हूं, जिनसे तू मेरे योगेश्वर रूप को देख सकेगा और जान सकेगा।
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महाराज जी ने कहा कि आज जानने और समझने की बात यह है कि वह कौन से दिव्य नेत्र थे, वह कौन सी दिव्य दृष्टि थी जिसका बोध होने के बाद अर्जुन धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में युद्ध के लिए तैयार होता है।
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महाराज ने अध्यात्म को विज्ञान के साथ जोड़ते हुए कहा कि जिस प्रकार विज्ञान कहता है कि सारी सृष्टि तीन फंडामेंटल एलीमेंट, इलेक्ट्रान, प्रोटोन एवं न्यूट्रॉन से बनी है, हमारे धर्म ग्रंथों में इसे कहा गया त्रयगुण्या विषया वेदा: अर्थात तीन गुणों सत, रज एवं तम से ये संसार ओत-प्रोत है। महाराज जी ने कहा कि कृष्ण जन्माष्टमी पर हमें भगवान कृष्ण के उस स्वरूप को जानने का प्रयास करना चाहिए, जिस के बारे में संतों ने कहा कि जर्रे जर्रे में है झांकी भगवान की, किसी सूझ वाली आंख ने पहचान की। वह सूझ वाली आंख हमें अपने भीतर खोलनी होगी, जिससे हम उस महा स्पंदन का बोध अपने भीतर कर पाएंगे।


महाराज जी ने कहा कि वह ज्ञान जो युद्ध के मैदान में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिया, उस ज्ञान को समय के तत्वदर्शी सद्गुरुदेव की शरण में जाकर ही जाना जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान श्री कृष्ण भगवान की लीलाओं पर आधारित एक संगीत नाटिका भी प्रस्तुत की। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में हरियाणा की सांस्कृतिक प्रस्तुति भी की गई। सद्भावना सम्मेलन को देश के विभिन्न तीर्थों से आए संत-महात्माओं ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में मंच संचालन मास्टर हरि संतोषानंद ने किया।
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