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फसल अवशेष जलाने पर रोक के लिए निगरानी बढ़ाएं अधिकारी : एडीसी
Thu, 07 May 2026 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 07 May 2026 12:20 AM IST
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एडीसी अवशेष प्रबंधन को लेकर अधिकारियों की बैठक लेते हुए।
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। एडीसी डॉ. सुशील कुमार ने जिले में गेहूं के फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए अधिकारियों को फील्ड में निगरानी बढ़ाने और गांव स्तर के कर्मचारियों को सक्रिय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को जागरूक करते हुए आगामी धान सीजन में ‘जीरो स्टबल बर्निंग’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अभी से तैयारी शुरू की जाए।
एडीसी बुधवार को लघु सचिवालय स्थित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में कृषि और पर्यावरण विभाग के अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के चेयरमैन राजेश वर्मा की अध्यक्षता में हरियाणा और पंजाब के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन की समीक्षा की गई।
बैठक में गेहूं के अवशेष जलाने की रोकथाम को लेकर कार्य योजना पर चर्चा हुई। पिछले एक सप्ताह में घटनाओं में बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए। हालांकि यह भी सामने आया कि अधिकांश घटनाएं अनजाने में हुई हैं, न कि जानबूझकर।
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एडीसी ने इन-सीटू प्रबंधन को मजबूत करने और कृषि विभाग से विस्तृत जानकारी लेने के निर्देश दिए। उन्होंने जीरो स्टबल बर्निंग वाले गांवों को प्रोत्साहित करने और व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों से नियमित फील्ड विजिट करने, गांव स्तर पर कर्मचारियों की सक्रियता सुनिश्चित करने और किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि किसानों के सहयोग से स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सरकार धान सीजन में पराली न जलाने पर किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़, फसल विविधीकरण पर 8000 रुपये प्रति एकड़ और डीएसआर तकनीक अपनाने पर 4500 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान करती है। इस अवसर पर एसडीएम संजय कुमार, कृषि उपनिदेशक डॉ. रविंद्र, डीआईपीआरओ नसीब सिंह, जगदीश चंद्र सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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कैथल। एडीसी डॉ. सुशील कुमार ने जिले में गेहूं के फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए अधिकारियों को फील्ड में निगरानी बढ़ाने और गांव स्तर के कर्मचारियों को सक्रिय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को जागरूक करते हुए आगामी धान सीजन में ‘जीरो स्टबल बर्निंग’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अभी से तैयारी शुरू की जाए।
एडीसी बुधवार को लघु सचिवालय स्थित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में कृषि और पर्यावरण विभाग के अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के चेयरमैन राजेश वर्मा की अध्यक्षता में हरियाणा और पंजाब के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन की समीक्षा की गई।
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बैठक में गेहूं के अवशेष जलाने की रोकथाम को लेकर कार्य योजना पर चर्चा हुई। पिछले एक सप्ताह में घटनाओं में बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए। हालांकि यह भी सामने आया कि अधिकांश घटनाएं अनजाने में हुई हैं, न कि जानबूझकर।
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एडीसी ने इन-सीटू प्रबंधन को मजबूत करने और कृषि विभाग से विस्तृत जानकारी लेने के निर्देश दिए। उन्होंने जीरो स्टबल बर्निंग वाले गांवों को प्रोत्साहित करने और व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों से नियमित फील्ड विजिट करने, गांव स्तर पर कर्मचारियों की सक्रियता सुनिश्चित करने और किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि किसानों के सहयोग से स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सरकार धान सीजन में पराली न जलाने पर किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़, फसल विविधीकरण पर 8000 रुपये प्रति एकड़ और डीएसआर तकनीक अपनाने पर 4500 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान करती है। इस अवसर पर एसडीएम संजय कुमार, कृषि उपनिदेशक डॉ. रविंद्र, डीआईपीआरओ नसीब सिंह, जगदीश चंद्र सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।