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Kaithal News: 1971 में शाम होते ही बंद कर दी जाती थीं लाइटें

Wed, 07 May 2025 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 07 May 2025 01:17 AM IST
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In 1971, the lights were switched off as soon as it was evening
संवाद न्यूज एजेंसी
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सीवन/कैथल। वर्ष 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध के समय शाम होते ही नगर व गांवों में अंधेरा छा जाता था। लोगों को हिदायत थी कि लालटेन भी न जलाई जाए, ताकि दुश्मन का विमान आ भी जाए तो नीचे आबादी की जानकारी न मिल सके। घरों की खिड़कियों पर काले रंग के परदे लगवाए गए थे। यहां तक कि रोशन दानों पर भी काले पर्दे लगवा दिए गए थे, ताकि रोशनी बाहर न जाए। यह कहना है युद्ध के दौरान का समय देख चुके बुजुर्ग लोगों का।

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच लगातार तनाव बना है। भारत की ओर से पाकिस्तान को दी जा रही सभी सुविधाओं पर रोक लगा दी गई है। कई जगहों पर युद्धाभ्यास के तहत पूर्वाभ्यास (मॉक ड्रिल) का फैसला लिया है।
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सीवन निवासी 68 वर्षीय लक्ष्मण कामरा ने बताया कि वर्ष 1971 में उनकी आयु महज 14 साल की थी। उस समय शहरों व गांवों में मुनादी करवाकर दी गई थी। गांवों में भी ब्लैक आउट रहता था। शाम होते ही लाइटें बंद कर दी जातीं थीं। घरों में लालटेन और अन्य रोशनी आदि जलाने पर भी मनाही थी। इसकी वजह यह थी कि रात में हवाई हमले का खतरा रहता था और कहीं पर भी रोशनी देख कर वहां पर हवाई हमला हो सकता था।
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रात का खाना शाम होने से पहले ही बना लिया जाता था

80 वर्षीय ऋषिकेश शर्मा ने कहा कि वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान के युद्ध के समय सभी लोगों को हिदायत थी कि कोई भी बाहर चूल्हा या तंदूर तक नहीं जलाएगा, क्योंकि उससे उठने वाला धुआं दूर से दिखाई दे जाता था। रात का खाना शाम होने से पहले ही बना लिया जाता था। शाम ढलते ही गांव सुनसान हो जाता था।

तब संचार के नहीं थे साधन

74 वर्षीय राज किशन सरदाना ने कहा कि 1971 के युद्ध के समय संचार के साधन नहीं थे। किसी-किसी के पास रेडियो होता था तो रेडियो पर ही युद्ध के समाचार सुन पाते थे। जानकारी बहुत ही कम मिल पाती थी। इसी से लोग संतुष्ट हो जाते थे। सभी के मन में एक ही बात थी कि युद्ध की स्थिति जैसी भी हो जीत भारत की होगी।
क्या है मामला

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते पहले से भी ज्यादा खराब दिख रहे हैं। युद्ध जैसे हालात हैं। दोनों देशों की फौजें कमर कसकर तैयार हैं। देश में पहली बार 1971 के युद्ध के दौरान मॉक ड्रिल हुई थी। इस बार भी कई जिलों में ऐसी तैयारी है।
ब्लैकआउट एक्सरसाइज ः ब्लैकआउट यानी एक तय समय के लिए इलाके की लाइटें बंद करना। इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि जब दुश्मन देश हमला करे तो इलाके को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है। दरअसल, अंधेरे में निशाना साधने में परेशानी होती है।


मॉक ड्रिल क्या है?
सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल एक तरह का अभ्यास है, जिसमें यह देखा जाता है कि अगर कभी कोई इमरजेंसी जैसे- हवाई हमला या बम हमला हो जाए तो आम लोग और प्रशासन कैसे और कितनी जल्दी रिएक्ट करता है। का उद्देश्य इमरजेंसी के समय दहशत को कम करना, अराजकता फैलने से रोकना और जान बचाना है। मॉक ड्रिल नागरिक सुरक्षा नियम , 1968 के अंतर्गत कराया जाता है।
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