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Kaithal News: सात्विक आहार का बताया महत्व
Sat, 19 Jul 2025 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 19 Jul 2025 12:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। डॉ. भीम राव आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय, जगदीशपुरा में एंटी ड्रग कमेटी द्वारा जिला स्तर पर चलाए जा रहे चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन मुख्य वक्ता साध्वी डॉ. अमृता रहीं।
उन्होंने कहा कि नशे की लत को छोड़ने में योग एक प्रभावी साधन है। नियमित रूप से सूर्य नमस्कार, सर्वांगासन, हलासन, पृष्ठासन, धनुरासन, भद्रासन, नाड़ी शोधन, प्राणायाम, उज्जायी प्राणायाम, कपालभाति, जल नेती तथा ध्यान का अभ्यास नशे की आदत से छुटकारा दिलाने में सहायक होता है। साथ ही उन्होंने सात्विक और शुद्ध आहार के महत्व को भी रेखांकित किया।
सात्विक आहार शुद्ध, हल्का और आसानी से पचने वाला होता है। इससे शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक विकास होता है।
डॉ. अनुराधा ने कहा कि नशे की प्रवृत्ति से समाज में असंतुलन पैदा होता है, जो युवा शक्ति के लिए विनाशकारी हो सकता है। इसे जड़ से उखाड़ने के लिए सामूहिक सामाजिक पहल जरूरी है, ताकि हम एक सभ्य और स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकें।महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार भांभू ने कहा कि युवा ही समाज की वह शक्ति हैं, जो नशा मुक्त अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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डॉ. अभिषेक गोयल ने कहा कि नशीली दवाओं का दुरुपयोग आज एक गंभीर वैश्विक समस्या बन चुका है। यह व्यक्ति को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है, परिवारों को तोड़ता है और समाज को कमजोर करता है।
इस अवसर पर डॉ. सुभाष शर्मा ने कहा, जो भी चीज व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक रूप से कमजोर करे, उसे जहर की तरह त्याग देना चाहिए। प्रशिक्षण सत्र में डॉ. अभिषेक गोयल, डॉ. सुभाष शर्मा, प्रो. वीरेंद्र खटकड़, डॉ. मोनिका जाखड़, लैब सहायक ममता कुमारी, भगवान शर्मा सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे।
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कैथल। डॉ. भीम राव आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय, जगदीशपुरा में एंटी ड्रग कमेटी द्वारा जिला स्तर पर चलाए जा रहे चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन मुख्य वक्ता साध्वी डॉ. अमृता रहीं।
उन्होंने कहा कि नशे की लत को छोड़ने में योग एक प्रभावी साधन है। नियमित रूप से सूर्य नमस्कार, सर्वांगासन, हलासन, पृष्ठासन, धनुरासन, भद्रासन, नाड़ी शोधन, प्राणायाम, उज्जायी प्राणायाम, कपालभाति, जल नेती तथा ध्यान का अभ्यास नशे की आदत से छुटकारा दिलाने में सहायक होता है। साथ ही उन्होंने सात्विक और शुद्ध आहार के महत्व को भी रेखांकित किया।
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सात्विक आहार शुद्ध, हल्का और आसानी से पचने वाला होता है। इससे शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक विकास होता है।
डॉ. अनुराधा ने कहा कि नशे की प्रवृत्ति से समाज में असंतुलन पैदा होता है, जो युवा शक्ति के लिए विनाशकारी हो सकता है। इसे जड़ से उखाड़ने के लिए सामूहिक सामाजिक पहल जरूरी है, ताकि हम एक सभ्य और स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकें।महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार भांभू ने कहा कि युवा ही समाज की वह शक्ति हैं, जो नशा मुक्त अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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डॉ. अभिषेक गोयल ने कहा कि नशीली दवाओं का दुरुपयोग आज एक गंभीर वैश्विक समस्या बन चुका है। यह व्यक्ति को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है, परिवारों को तोड़ता है और समाज को कमजोर करता है।
इस अवसर पर डॉ. सुभाष शर्मा ने कहा, जो भी चीज व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक रूप से कमजोर करे, उसे जहर की तरह त्याग देना चाहिए। प्रशिक्षण सत्र में डॉ. अभिषेक गोयल, डॉ. सुभाष शर्मा, प्रो. वीरेंद्र खटकड़, डॉ. मोनिका जाखड़, लैब सहायक ममता कुमारी, भगवान शर्मा सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे।