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Kaithal News: विजिलेंस की निगाह में अवैध कॉलोनियां, रिकॉर्ड तलब
Sun, 16 Nov 2025 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 16 Nov 2025 01:21 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। विजिलेंस की ओर से अवैध कॉलोनियों का पूरा रिकार्ड तलब किए जाने के बाद नगर परिषद के अधिकारी तेजी से डाटा संकलन में जुट गए हैं। विजिलेंस ने शीघ्र ही संपूर्ण रिकार्ड उपलब्ध कराने को कहा है।
आरोप है कि अधिकांश कालोनियों के पीछे राजनीतिक संरक्षण होने के कारण कार्रवाई केवल एफआईआर तक सीमित रह जाती है और गिरफ्तारी तक बात नहीं पहुंच पाती। इसी लापरवाही और मिलीभगत का फायदा उठाकर कालोनाइजर बेखौफ होकर सरकार को करोड़ों की आर्थिक चपत लगा रहे हैं।
विजिलेंस ने संकेत दिए हैं कि जांच में जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, उस पर सख्त कार्रवाई तय है। जिले में रिकॉर्ड के अनुसार करीब 75 अवैध कालोनियां चिन्हित हैं। विजिलेंस इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने बताया कि नगर परिषद को जल्द से जल्द पूरा रिकार्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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गरीब लोग अपनी जीवनभर की पूंजी गंवा रहे : शहर, कस्बों और अब गांवों तक फैल चुकी अवैध कालोनियों की वजह से गरीब लोग अपनी जमा-पूंजी गंवा रहे हैं। आरोप है कि डीटीपी का अमला कालोनी काटने के दौरान तो उदासीन रहता है, लेकिन मकान बनने के बाद कार्रवाई में सक्रिय हो जाता है। ऐसे मामलों में नुकसान सिर्फ खरीदारों को उठाना पड़ता है, क्योंकि कालोनाइजरों तक अक्सर कार्रवाई की आंच पहुंच ही नहीं पाती। हैरानी की बात यह है कि कई कालोनाइजर अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री करवाने का लालच देकर लोगों को गुमराह करते हैं।
सवाल यह भी उठता है कि क्या अफसर किसी राजनीतिक दबाव में हैं या फिर कोई और वजह है, जिसके चलते वर्षों से यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। डीटीपी टीम अक्सर औपचारिक कार्रवाई करके लौट आती है, जिससे कालोनाइजरों के हौसले और भी बुलंद हो जाते हैं। शहर में अवैध कालोनियों का जाल तेजी से फैल रहा है और सुविधाओं के अभाव में लोग परेशानियों से जूझ रहे हैं। यह मुद्दा परिषद की बैठकों में कई बार उठ चुका है और प्रशासन के संज्ञान में भी है, फिर भी इस पर कोई ठोस लगाम नहीं लग पाई है।
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कैथल। विजिलेंस की ओर से अवैध कॉलोनियों का पूरा रिकार्ड तलब किए जाने के बाद नगर परिषद के अधिकारी तेजी से डाटा संकलन में जुट गए हैं। विजिलेंस ने शीघ्र ही संपूर्ण रिकार्ड उपलब्ध कराने को कहा है।
आरोप है कि अधिकांश कालोनियों के पीछे राजनीतिक संरक्षण होने के कारण कार्रवाई केवल एफआईआर तक सीमित रह जाती है और गिरफ्तारी तक बात नहीं पहुंच पाती। इसी लापरवाही और मिलीभगत का फायदा उठाकर कालोनाइजर बेखौफ होकर सरकार को करोड़ों की आर्थिक चपत लगा रहे हैं।
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विजिलेंस ने संकेत दिए हैं कि जांच में जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, उस पर सख्त कार्रवाई तय है। जिले में रिकॉर्ड के अनुसार करीब 75 अवैध कालोनियां चिन्हित हैं। विजिलेंस इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने बताया कि नगर परिषद को जल्द से जल्द पूरा रिकार्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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गरीब लोग अपनी जीवनभर की पूंजी गंवा रहे : शहर, कस्बों और अब गांवों तक फैल चुकी अवैध कालोनियों की वजह से गरीब लोग अपनी जमा-पूंजी गंवा रहे हैं। आरोप है कि डीटीपी का अमला कालोनी काटने के दौरान तो उदासीन रहता है, लेकिन मकान बनने के बाद कार्रवाई में सक्रिय हो जाता है। ऐसे मामलों में नुकसान सिर्फ खरीदारों को उठाना पड़ता है, क्योंकि कालोनाइजरों तक अक्सर कार्रवाई की आंच पहुंच ही नहीं पाती। हैरानी की बात यह है कि कई कालोनाइजर अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री करवाने का लालच देकर लोगों को गुमराह करते हैं।
सवाल यह भी उठता है कि क्या अफसर किसी राजनीतिक दबाव में हैं या फिर कोई और वजह है, जिसके चलते वर्षों से यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। डीटीपी टीम अक्सर औपचारिक कार्रवाई करके लौट आती है, जिससे कालोनाइजरों के हौसले और भी बुलंद हो जाते हैं। शहर में अवैध कालोनियों का जाल तेजी से फैल रहा है और सुविधाओं के अभाव में लोग परेशानियों से जूझ रहे हैं। यह मुद्दा परिषद की बैठकों में कई बार उठ चुका है और प्रशासन के संज्ञान में भी है, फिर भी इस पर कोई ठोस लगाम नहीं लग पाई है।