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Kaithal News: सुखमय जीवन चाहिए तो गीता के संदेश जरूर अपनाएं

Wed, 11 Dec 2024 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 11 Dec 2024 02:17 AM IST
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If you want a happy life, then definitely adopt the messages of Geeta.
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। तीन दिवसीय गीता जयंती के महोत्सव के दूसरे दिन आरकेएसडी कॉलेज में गीता सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें बतौर मुख्य अतिथि नगर परिषद अध्यक्ष सुरभि गर्ग ने कहा कि गीता के संदेश को अपने जीवन में जरूर अपनाएं, ताकि हमारा जीवन सुखमय बनें। हमें क्वांटिटी पर नहीं क्वालिटी पर विश्वास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि गीता की बात करें तो महाभारत के युद्ध में दुर्योधन के पास भगवान श्रीकृष्ण की पूरी सेना थी, वहीं दूसरी ओर पांडवों के पास अकेले स्वयं भगवान श्रीकृष्ण थे, जिसमें पांडवों की विजय हुई थी। इसलिए हमें हमेशा अपनी क्वालिटी को इम्प्रूव करना चाहिए, न कि क्वांटिटी को।
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सेमिनार में विषय विशेषज्ञ के रूप में आरकेएसडी के पूर्व प्रोफेसर बीबी भारद्वाज, रामनिवास पटवारी, संस्कृति विश्वविद्यालय से डॉ. बीपी पांडे, डॉ. नरेश कुमार, संस्कृत प्राध्यापक रोहित तथा कृष्ण कुमार शामिल रहे। सभी वक्ताओं ने गीता की शिक्षाओं के बारे में बहुमूल्य जानकारी दी और बताया कि कैसे मनुष्य गीता ज्ञान अपनाकर जीवन को सफल बना सकता है।
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आरकेएसडी के पूर्व प्रोफेसर बीबी भारद्वाज ने कहा कि गीता एक ऐसा पवित्र ग्रंथ है, जिसका अध्ययन करने से साधारण मनुष्य भी महान बन जाता है। जिस प्रकार शरीर को भोजन की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मन की अपनी एक खुराक होती है। इसलिए हमें गीता अध्ययन करके मन को अच्छे विचारों की खुराक देनी चाहिए।

वक्ता रामनिवास पटवारी ने कहा कि गीता जहां अपनी संस्कृति, आदर्शों और सामाजिक मूल्यों को परिभाषित करती हैं, वहीं दूसरी और हमें अध्यात्मवाद के क्षेत्र में रहते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती है। हमें गीता के संदेशों को आत्मसात करने की जरूरत है, जो व्यक्ति जिस भाव में गीता पढ़ता है, उसी भाव में उसे समझ आती है। गीता कांटों में गुलाब की तरह है। जिस तरह से मनुष्य परेशानियों के कांटों से घिर जाता है, उस समय गीता ज्ञान गुलाब की भांति मनुष्य का मार्गदर्शन करता है।

संस्कृति विश्वविद्यालय से पहुंचे वक्ता डॉ. बीपी पांडे ने कहा कि हमें गीता के संदेशों को अंगीकृत करते हुए आगे बढ़ने की जरूरत है। अध्यात्मवाद का परिवेश सेवा करने की सीख देता है। इसलिए यह सीख भावी पीढ़ी को भी जानी चाहिए।

वक्ता डॉ. नरेश ने पीपीटी के माध्यम से गीता के श्लोकों का जिक्र करते हुए मौजूदा परिवेश में समस्याओं के समाधान का रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि गीता प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत है। गीता भारत का गौरव है। संस्कृत अध्यापक कृष्ण कुमार ने कहा कि गीता हमें जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य की प्राप्ति करवाती है। गीता किसी विशेष वर्ग के लिए नहीं यह विश्वव्यापी सार है। समाज में जितने विवाद, बुराई, ईर्ष्या, द्वेष, विश्व की कोई भी समस्या का समाधान गीता में है। कहा कि संस्कृत का जब हम संरक्षण करेंगे तभी हमारी संस्कृति बचेगी।

प्राध्यापक रोहित ने गीता के अलग-अलग अध्यायों के श्लोकों को उपस्थितजनों के संस्कृत भाषा में भाषा में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि हमें अपना कर्म ईमानदारी से करना चाहिए और फल की इच्छा नहीं करना चाहिए। उच्चतर शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारी एवं कपिल मुनि राजकीय महिला काॅलेज कलायत के प्रिंसिपल डा. राजेश सैनी ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया और कहा कि हमें गीता का एकग्रता से अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि गीता के अंदर सभी समस्याओं का हल है।


मंच का संचालन डाॅ. एसपी वर्मा ने किया। इस अवसर पर आरकेएसडी के प्रिंसिपल मेहला, अशोक अत्री, राजेश देशवाल, बाबू अनंतराम जनता कालेज कौल से डाॅ. ईश्वर सिंह, डाॅ. बीआर आंबेडकर कालेज के प्रिंसिपल डा. मनोज बांभू, राजकीय कालेज चक्कू लदाना से अविनाश पाठक, जिओ गीता से दिनेश पाठक, शिवशंकर पाहवा मौजूद रहे।
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