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टीचर्स ने जून में डाटा अपलोड नहीं किया तो नहीं मिलेगा वेतन
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Sat, 13 Jun 2015 12:09 AM IST
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कैथल। जिले के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने अगर जून के अंत कर स्कूली बच्चों का डाटा ऑनलाइन नहीं किया तो उन्हें वेतन नहीं दिया जाएगा। शिक्षा विभाग ने यह फरमान जारी किया है।
30 जून तक जिस भी स्कूल के अध्यापकों ने विभाग की योजना अनुसार डाटा ऑनलाइन नहीं किया तो उन्हें वेतन के लिए इंतजार करना होगा। यह फरमान शुक्रवार को राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाखौली अड्डा में आयोजित प्रिंसिपलों की बैठक में जारी किया गया। बैठक में 106 स्कूलों के मुखिया डाटा अपलोड न होने के कारण बुलाए गए थे।
यह है एमआईएस योजना
योजना के तहत विद्यार्थियों से संबंधित पूरा विवरण ऑनलाइन किया जाना है। मैनेजमेंट स्टूडेंट्स इंफोरमेशन के लिए 30 जून का समय है। प्रत्येक बच्चे के बारे में कक्षा, नाम, आयु और पढ़ाई संबंधी जानकारी ऑनलाइन की जानी है।
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599 में 106 स्कूलों में नहीं हुई शुरूआत
जिले के 599 स्कूलों में से अब तक 106 स्कूलों ने शुरू डाटा अपलोड करना शुरू नहीं किया है। विभाग ने स्कूलों के प्रति कड़े आदेश दिए है। इसके अलावा शेष स्कूलों का केवल 44 प्रतिशत डाटा ही अपलोड हो पाया है।
एक लाख का डाटा अपलोड होगा : अधिकारी
उप जिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही ने बताया कि जिले के 599 स्कूलों में करीब एक लाख विद्यार्थी हैं। इनका डाटा अपलोड करना है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार स्कूल के डीडीसी की जिम्मेवारी बनती है कि स्कूल के प्रत्येक विद्यार्थी का डाटा अपलोड करें। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो विभाग के वेतन रोकने के आदेश हैं। अभी तक करीब 44 प्रतिशत डाटा ही अपलोड हो पाया है। जिन स्कूलों ने इसकी शुरूआत नहीं की गई है, उन्हें आदेश दिए गए हैं कि यदि जून तक यह ऑनलाइन नहीं हुआ तो वेतन रोक लिया जाएगा।
योजना से विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
डीपीसी सुरेन्द्र मोर ने बताया कि एमआईएस डाटा अपलोड होने के बाद विद्यार्थी के बारे में पूरी जानकारी एक क्लिक से पता चल जाएगी। इसके लिए विद्यार्थियों एसआरएन नंबर (स्टूडेंट्स रजिस्ट्रेशन नंबर) दिया जाएगा। स्कूल मुखिया द्वारा मासिक व वार्षिक परीक्षा परिणाम उसमें भरना होगा। इसके अलावा विद्यार्थियों के बैंक खाते के बारे में जानकारी व अन्य प्रकार से मिलने वाले लाभ का पूरी जानकारी एसआरएन नंबर में होगी। इसके अलावा विद्यार्थियों को स्कूल छोड़ने व दाखिला एसआरएन नंबर से किया जाएगा। इस अवसर पर उप जिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही, डीपीसी सुरेन्द्र मोर, खंड शिक्षा अधिकारी साहब सिंह, प्रेम पुनिया,दलीप सिंह, अनिक छाबड़ा मौजूद रहे।
इंटरनेट के अभाव में नहीं हो रहा डाटा अपलोड
बैठक में अध्यापकों ने कहा कि स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा न होने के कारण दिक्कतें आ रही हैं। कई अध्यापकों के पासवर्ड भी गलत हैं। ऐसे में इन तकनीकी खामियों के कारण डाटा ऑनलाइन नहीं किया जा रहा है। अध्यापकों की इस समस्या पर विभागीय अधिकारियों ने दो टूक आदेश दिया कि डाटा ऑनलाइन हर हाल में होगा। इसके लिए चाहे स्कूल से डाटा अपलोड किया जाए या फिर स्कूल के बाहर से। अध्यापकों को इस संबंध में हर संभव सुविधा दी जाएगी।
वेतन रोका गया तो होगा विरोध
अध्यापक संघ के सचिव सतबीर गोयत का कहना है कि स्कूलों के अंदर संसाधनों की कमी है। विशेष रूम से प्राइमरी स्कूलों में संसाधन नहीं है। यदि बाहर से करवाई जाती है तो उसके लिए फंडिंग नहीं है। विभाग फंड देने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में अध्यापक कैसे डाटा ऑनलाइन करवाए। इस तरह का दबाव डालना गलत है। किसी भी अध्यापक का वेतन ना रोका जाए। यदि अध्यापकों का वेतन रोका गया तो विरोध किया जाएगा।
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30 जून तक जिस भी स्कूल के अध्यापकों ने विभाग की योजना अनुसार डाटा ऑनलाइन नहीं किया तो उन्हें वेतन के लिए इंतजार करना होगा। यह फरमान शुक्रवार को राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाखौली अड्डा में आयोजित प्रिंसिपलों की बैठक में जारी किया गया। बैठक में 106 स्कूलों के मुखिया डाटा अपलोड न होने के कारण बुलाए गए थे।
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यह है एमआईएस योजना
योजना के तहत विद्यार्थियों से संबंधित पूरा विवरण ऑनलाइन किया जाना है। मैनेजमेंट स्टूडेंट्स इंफोरमेशन के लिए 30 जून का समय है। प्रत्येक बच्चे के बारे में कक्षा, नाम, आयु और पढ़ाई संबंधी जानकारी ऑनलाइन की जानी है।
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599 में 106 स्कूलों में नहीं हुई शुरूआत
जिले के 599 स्कूलों में से अब तक 106 स्कूलों ने शुरू डाटा अपलोड करना शुरू नहीं किया है। विभाग ने स्कूलों के प्रति कड़े आदेश दिए है। इसके अलावा शेष स्कूलों का केवल 44 प्रतिशत डाटा ही अपलोड हो पाया है।
एक लाख का डाटा अपलोड होगा : अधिकारी
उप जिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही ने बताया कि जिले के 599 स्कूलों में करीब एक लाख विद्यार्थी हैं। इनका डाटा अपलोड करना है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार स्कूल के डीडीसी की जिम्मेवारी बनती है कि स्कूल के प्रत्येक विद्यार्थी का डाटा अपलोड करें। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो विभाग के वेतन रोकने के आदेश हैं। अभी तक करीब 44 प्रतिशत डाटा ही अपलोड हो पाया है। जिन स्कूलों ने इसकी शुरूआत नहीं की गई है, उन्हें आदेश दिए गए हैं कि यदि जून तक यह ऑनलाइन नहीं हुआ तो वेतन रोक लिया जाएगा।
योजना से विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
डीपीसी सुरेन्द्र मोर ने बताया कि एमआईएस डाटा अपलोड होने के बाद विद्यार्थी के बारे में पूरी जानकारी एक क्लिक से पता चल जाएगी। इसके लिए विद्यार्थियों एसआरएन नंबर (स्टूडेंट्स रजिस्ट्रेशन नंबर) दिया जाएगा। स्कूल मुखिया द्वारा मासिक व वार्षिक परीक्षा परिणाम उसमें भरना होगा। इसके अलावा विद्यार्थियों के बैंक खाते के बारे में जानकारी व अन्य प्रकार से मिलने वाले लाभ का पूरी जानकारी एसआरएन नंबर में होगी। इसके अलावा विद्यार्थियों को स्कूल छोड़ने व दाखिला एसआरएन नंबर से किया जाएगा। इस अवसर पर उप जिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही, डीपीसी सुरेन्द्र मोर, खंड शिक्षा अधिकारी साहब सिंह, प्रेम पुनिया,दलीप सिंह, अनिक छाबड़ा मौजूद रहे।
इंटरनेट के अभाव में नहीं हो रहा डाटा अपलोड
बैठक में अध्यापकों ने कहा कि स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा न होने के कारण दिक्कतें आ रही हैं। कई अध्यापकों के पासवर्ड भी गलत हैं। ऐसे में इन तकनीकी खामियों के कारण डाटा ऑनलाइन नहीं किया जा रहा है। अध्यापकों की इस समस्या पर विभागीय अधिकारियों ने दो टूक आदेश दिया कि डाटा ऑनलाइन हर हाल में होगा। इसके लिए चाहे स्कूल से डाटा अपलोड किया जाए या फिर स्कूल के बाहर से। अध्यापकों को इस संबंध में हर संभव सुविधा दी जाएगी।
वेतन रोका गया तो होगा विरोध
अध्यापक संघ के सचिव सतबीर गोयत का कहना है कि स्कूलों के अंदर संसाधनों की कमी है। विशेष रूम से प्राइमरी स्कूलों में संसाधन नहीं है। यदि बाहर से करवाई जाती है तो उसके लिए फंडिंग नहीं है। विभाग फंड देने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में अध्यापक कैसे डाटा ऑनलाइन करवाए। इस तरह का दबाव डालना गलत है। किसी भी अध्यापक का वेतन ना रोका जाए। यदि अध्यापकों का वेतन रोका गया तो विरोध किया जाएगा।