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Kaithal News: गर्भवती के साथ पति की भी एचआईवी जांच अनिवार्य
Thu, 09 Apr 2026 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 09 Apr 2026 01:39 AM IST
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जिला नागरिक अस्पताल में काउंटर पर पंजीकरण करवाते मरीज
- फोटो : Archive
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में एचआईवी/एड्स के खिलाफ लड़ाई को और प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कई अहम कदम उठाए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब गर्भवती महिलाओं के साथ उनके पति का भी एचआईवी और सिफिलिस परीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे संक्रमण की शुरुआती अवस्था में ही पहचान संभव होगी। इससे न केवल संक्रमित व्यक्ति को समय पर उपचार मिल सकेगा, बल्कि मां से बच्चे में संक्रमण के खतरे को भी लगभग पूरी तरह खत्म किया जा सकेगा।
एड्स नियंत्रण सोसायटी के इन फैसलों का उद्देश्य संक्रमण की समय पर पहचान, रोकथाम और मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यह पहल परिवार आधारित स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने के साथ संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में भी सहायक होगी।
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जांच प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए वायरल लोड लैब की संख्या बढ़ाने की योजना है। पंचकूला में नई वायरल लोड लैब स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिससे मौजूदा लैब पर दबाव कम होगा। इससे मरीजों की जांच रिपोर्ट जल्दी मिल सकेगी और उपचार में देरी नहीं होगी, जिससे समय रहते मरीजों की स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग ने एचआईवी संक्रमित मरीजों के लिए एकीकृत देखभाल सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। इसके तहत आईसीटीसी, वीएसटीआई सेवाएं और एआरटी सेंटर को सुदृढ़ किया जाएगा। इन केंद्रों पर मरीजों को परामर्श, नियमित जांच, दवाइयां और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उन्हें अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा और उपचार में निरंतरता बनी रहेगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रेनू चावला ने बताया कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए सीडी4 मशीनें भी स्थापित की गई हैं। इनसे एचआईवी संक्रमित मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता की नियमित निगरानी की जा सकेगी।
डॉ. मीनाक्षी गोयल ने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य एचआईवी संक्रमण को जड़ से समाप्त करना, नए मामलों में कमी लाना और प्रभावित लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
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कैथल। जिले में एचआईवी/एड्स के खिलाफ लड़ाई को और प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कई अहम कदम उठाए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब गर्भवती महिलाओं के साथ उनके पति का भी एचआईवी और सिफिलिस परीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे संक्रमण की शुरुआती अवस्था में ही पहचान संभव होगी। इससे न केवल संक्रमित व्यक्ति को समय पर उपचार मिल सकेगा, बल्कि मां से बच्चे में संक्रमण के खतरे को भी लगभग पूरी तरह खत्म किया जा सकेगा।
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एड्स नियंत्रण सोसायटी के इन फैसलों का उद्देश्य संक्रमण की समय पर पहचान, रोकथाम और मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यह पहल परिवार आधारित स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने के साथ संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में भी सहायक होगी।
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जांच प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए वायरल लोड लैब की संख्या बढ़ाने की योजना है। पंचकूला में नई वायरल लोड लैब स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिससे मौजूदा लैब पर दबाव कम होगा। इससे मरीजों की जांच रिपोर्ट जल्दी मिल सकेगी और उपचार में देरी नहीं होगी, जिससे समय रहते मरीजों की स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग ने एचआईवी संक्रमित मरीजों के लिए एकीकृत देखभाल सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। इसके तहत आईसीटीसी, वीएसटीआई सेवाएं और एआरटी सेंटर को सुदृढ़ किया जाएगा। इन केंद्रों पर मरीजों को परामर्श, नियमित जांच, दवाइयां और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उन्हें अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा और उपचार में निरंतरता बनी रहेगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रेनू चावला ने बताया कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए सीडी4 मशीनें भी स्थापित की गई हैं। इनसे एचआईवी संक्रमित मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता की नियमित निगरानी की जा सकेगी।
डॉ. मीनाक्षी गोयल ने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य एचआईवी संक्रमण को जड़ से समाप्त करना, नए मामलों में कमी लाना और प्रभावित लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।