फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   historical place

आस्था का प्रतीक कलायत का कपिल मुनि मंदिर व तीर्थ

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Oct 2019 01:30 AM IST
विज्ञापन
historical place
historical place - फोटो : Kaithal
कलायत में स्थित कपिल मुनि मंदिर और तीर्थ देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था की प्रतीक है। मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। कपिल मुनि भगवान विष्णु के मानव शरीर रूपी पहले अवतार माने जाते हैं। भगवान ने यह अवतार सतयुग में लिया था। श्री कपिल मुनि के नाम से ही कस्बे का नामकरण जुड़ा हुआ है। उनके समय में नगर का नाम कपलिायत रखा गया था, जिसे बाद में कलायत कहा जाने लगा। मंदिर में रोजाना पूजा-पाठ का कार्य तो होता ही है, साथ में विशेष अवसरों पर मेले भी लगाए जाते हैं। मंदिर में प्राचीन कपिल मुनि की प्रतिमा भी है। पास में बने तीर्थ में स्नान करने के बाद श्रद्धालु मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं।
विज्ञापन

कपिल मुनि ने अपने माता-पिता को दिया था सांख्य दर्शन का ज्ञान : मंदिर के मुख्य पुजारी वेद प्रकाश गौतम और कृष्ण गौतम ने बताया कि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार इसी धरती पर कपिल मुनि ने अपनी माता देवभूति और पिता करदम ऋषि को सांख्य दर्शन का ज्ञान दिया था, इस कारण इसका नाम कपिलायत पड़ा था। करीब 4500 वर्ष पूर्व क्षेत्र के तत्कालीन राजा सालभान ने मंदिर का निर्माण करवाया था। जो एक बार निर्माण के बाद जर्जर हालात में पहुंच गया था। सन 1970 में इस पुन: निर्माण करवाया गया और मंदिर में चार शिवालयों की स्थापना की गई। इनमें से दो जर्जर हो चुके हैं और दो अभी सही हालत में हैं। धार्मिक ग्रंथों और गीता में भी कपिल मुनि का उल्लेख मिलता है।
विज्ञापन

मंदिर में हर पूर्णिमा को लगता है मेला: पुजारी वेद प्रकाश ने बताया कि मंदिर में हर पूर्णिमा को मेला लगता है। इसके अलावा कार्तिक माह की अमावस्या को यहां अनकूट का त्योहार मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि मंदिर को इस समय कायाकल्प की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री भी मंदिर के कायाकल्प की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में कदम नहीं उठाया गया है। वहीं कपिल मुनि सरोवर में पानी की सफाई को लेकर भी समस्या बनी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कायाकल्प करवाने की मांग: पुरातत्व विभाग की टीम ने पिछले वर्ष तीर्थ और मंदिर की स्थिति को जानने के लिए जायजा भी लिया था, लेकिन अभी तक वहां से भी मंदिर के कायाकल्प के संबंध में कोई निर्देश नहीं आया है। पुजारियों ने मंदिर और तालाब का कायाकल्प करवाने की मांग की है, ताकि मंदिर और तीर्थ भावी पीढ़ियों के लिए आस्था का केंद्र बना रहे और इतिहास के बारे में लोग जानते रहें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed