हरियाणा-पंजाब की सीमा पर स्थित जिले का गांव बैहर-पिसौल ऐतिहासिक स्मृतियों को समेटे हुए है। गांव में स्थापित प्राचीन अरंतुक यक्ष की प्रतिमा का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। बैहर गांव इस समय पंजाब में आता है जबकि पिसौल गांव हरियाणा में कैथल जिले के सीवन खंड का हिस्सा है। ऐसा माना जाता है कि महाभारत के युद्ध के दौरान कुरुक्षेत्र की 48 कोस परिधि में चारों दिशाओं में चार यक्ष विराजमान किए गए थे, जिनमें से कैथल जिले के इस गांव में अरंतुक यक्ष स्थापित है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार अरंतुक यक्ष को सबसे शक्तिशाली माना जाता था। जब महाभारत का युद्ध शुरू हो जाता था तो यक्षों की आज्ञा के बिना कोई भी सैनिक या सामान्य व्यक्ति युद्ध भूमि में प्रवेश नहीं कर सकता था। यक्ष इसके लिए निगरानी रखते थे।
पुराणों में भी यक्ष का उल्लेख: इतिहासकार प्रो. बीबी भारद्वाज ने बताया कि अरंतुक यक्ष का उल्लेख पुराणों में भी है। 1995 गांव बैहर-पिसौल में यक्ष की प्रतिमा बनाई गई थी। इसके पास एक सरोवर व मंदिर भी है, जिसमें आसपास के गांवों से श्रद्धालु पूजा पाठ करने के लिए आते हैं। इस क्षेत्र का कुछ हिस्सा पंजाब में भी आता है। बैहर-पिसौल गांव हरियाणा-पंजाब दोनों राज्यों का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्थान माना गया है। अप्रैल माह में यहां मेला लगता है। अमावस्या के दिन लोग यहां पूजा-अर्चना करते हैं। ऐतिहासिक धरोहर की हो रही अनदेखी :ग्रामीण बलविंद्र सिंह संधा, कृष्ण कुमार, गुरमुख सिंह, गुरमेल सिंह, रामदिया व दर्शन सिंह गांव में बनी यह प्रतिमा अनदेखी का शिकार हो रही है। सुरक्षा को लेकर भी कोई प्रबंध नहीं किया गया है। सफाई न होने के कारण प्रतिमा के आसपास में गांव के लोग इसकी सुरक्षा कर रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 2007 में उस समय के डीसी राजेंद्र कटारिया ने इनके जीर्णोद्धार को लेकर कार्य शुरू किया था। प्रतिमा की सुरक्षा के लिए उस समय कर्मचारी लगाए गए थे । ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के ऐतिहासिक स्थलों को संजोए रखने की आवश्यकता है। ताकि भावी पीढ़ियों को इसके बारे में पता चल सके