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सरकार व मिलर्स के लिए गले की फांस बना 1509 का 5 लाख क्विंटल धान
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथल
Updated Mon, 21 Mar 2016 12:23 AM IST
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धान
- फोटो : buerue
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पिछले सीजन में खरीदा गया 1509 किस्म का धान सरकार व मिलर्स के लिए गले की फांस बन गया है। सीजन के दौरान लगे आरोपों के बाद सरकार ने इसके स्टॉक को सील कर दिया था। जो मिलों में उसी तरह से सील बताया जा रहा है। कभी बरसात तो कभी तेज धूप का इस पर विपरीत असर हो रहा है। जिससे सरकार को ही करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है। मिलर्स ने सरकार से इस धान की मिलिंग की अनुमति देने की मांग है। हालांकि कई खरीद एजेंसियों के माध्यम से खरीदे गए इस धान की दोबारा से बिक्री के लिए सरकार द्वारा अलग-अलग टेंडर आमंत्रित किए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई खरीददार भी आगे नहीं आया है।
क्या है मामला
पिछले सीजन से पहले बासमती ग्रुप में मानी जाने वाली 1509 को सरकार ने अचानक फैसला लेते हुए ग्रेड ए धान में शामिल करते हुए इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 1450 रुपये निर्धारित करके मिलर्स को दे दिया था। जिसमें मिलर्स को ग्रेड ए धान की तर्ज पर इसकी मिलिंग के बाद चावल देने को कहा था, लेकिन विपक्ष के आरोपों के बाद सरकार ने इस धान की सभी मिलों में चेकिंग कर इसे वहीं पर सील कर दिया था। विपक्ष के आरोप थे कि सरकार ने मिलर्स के साथ मिलकर किसानों से सस्ते दामों पर धान लेकर उसे महंगे दामों पर बेचकर किसानों के साथ गड़बड़ी की है। करीब छह माह से धान का यह स्टॉक राइस मिलों में सील है।
खराब होने लगा है धान
मिलर एवं एक्सपोर्टर अनिल मस्ताना, राइस मिलर्स एसोसिएशन के पूर्व प्रधान संजय गर्ग का कहना है कि लंबे समय तक एक ही तरह से स्टॉक हुआ धान अब खराब हो सकता है। यह अगेती किस्म होती है। जिसमें नमी पहले से ही होती है। अब लगातार खुले में स्टॉक होने के कारण बरसात के बाद एकदम से निकली धूप का इस पर विपरीत असर पड़ेगा। इसकी गुणवत्ता पर असर होगा। धान से चावल निकालने पर इसके रंग में फर्क होगा। साथ ही टुकड़े ज्यादा होंगे। गुणवत्ता प्रभावित होने पर सरकार को भी काफी नुकसान हो सकता है।
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मिलर्स चाहते हैं मिलिंग की अनुमति दे सरकार
सरकार द्वारा अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से इस धान की ऑनलाइन बोली भी आमंत्रित की है, लेकिन अभी तक किसी खरीददार के इसकी खरीद के लिए आगे आने की जानकारी नहीं मिल पाई है। अब 22 मार्च को हैफेड द्वारा भी इसके लिए टेंडर आमंत्रित कर खोले जाएंगे। कैथल में हैफेड का करीब 11 हजार एमटी 1509 धान स्टॉक किया गया है।
जिले में स्टॉक है लगभग 5 लाख क्विंटल धान
अकेले कैथल जिले में करीब 5 लाख क्विंटल धान स्टॉक है। जिसकी कीमत करोड़ों रुपये बनती है। जबकि पूरे प्रदेश में यह 15 लाख क्विंटल के आस-पास है।
विधानसभा में भी उठा है मामला
राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल गुप्ता का कहना है कि मिलर्स की मांग को विधायकों ने विधानसभा में भी उठाया है। जिस पर सरकार ने विपक्ष से भी सुझाव मांगें हैं। मिलर्स की मांग है कि सरकार इस धान की मिलिंग की अनुमति दे। अन्यथा इसमें मिलर्स सहित सरकार को भी नुकसान होगा।
विभाग के निदेशक से भी मिले हैं कैथल के मिलर्स
जिले से मिलर्स का एक प्रतिनिधिमंडल विभाग के निदेशक से भी मिला है। उनसे मिलकर लगातार हो रहे नुकसान की जानकारी दी और इस समस्या के समाधान की मांग की है, लेकिन फिलहाल कोई समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा है।
जिले में सरकार के निर्देशानुसार 1509 धान का स्टॉक सील किया गया था। जिसके लिए मिलर्स को देखभाल के निर्देश दिए गए हैं। जैसे ही सरकार के अगले आदेश आएंगे, उसी अनुसार मिलर्स को सूचित कर दिया जाएगा। अभी धान के खराब होने संबंधी मेरे पास कोई सूचना नहीं है।
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क्या है मामला
पिछले सीजन से पहले बासमती ग्रुप में मानी जाने वाली 1509 को सरकार ने अचानक फैसला लेते हुए ग्रेड ए धान में शामिल करते हुए इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 1450 रुपये निर्धारित करके मिलर्स को दे दिया था। जिसमें मिलर्स को ग्रेड ए धान की तर्ज पर इसकी मिलिंग के बाद चावल देने को कहा था, लेकिन विपक्ष के आरोपों के बाद सरकार ने इस धान की सभी मिलों में चेकिंग कर इसे वहीं पर सील कर दिया था। विपक्ष के आरोप थे कि सरकार ने मिलर्स के साथ मिलकर किसानों से सस्ते दामों पर धान लेकर उसे महंगे दामों पर बेचकर किसानों के साथ गड़बड़ी की है। करीब छह माह से धान का यह स्टॉक राइस मिलों में सील है।
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खराब होने लगा है धान
मिलर एवं एक्सपोर्टर अनिल मस्ताना, राइस मिलर्स एसोसिएशन के पूर्व प्रधान संजय गर्ग का कहना है कि लंबे समय तक एक ही तरह से स्टॉक हुआ धान अब खराब हो सकता है। यह अगेती किस्म होती है। जिसमें नमी पहले से ही होती है। अब लगातार खुले में स्टॉक होने के कारण बरसात के बाद एकदम से निकली धूप का इस पर विपरीत असर पड़ेगा। इसकी गुणवत्ता पर असर होगा। धान से चावल निकालने पर इसके रंग में फर्क होगा। साथ ही टुकड़े ज्यादा होंगे। गुणवत्ता प्रभावित होने पर सरकार को भी काफी नुकसान हो सकता है।
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मिलर्स चाहते हैं मिलिंग की अनुमति दे सरकार
सरकार द्वारा अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से इस धान की ऑनलाइन बोली भी आमंत्रित की है, लेकिन अभी तक किसी खरीददार के इसकी खरीद के लिए आगे आने की जानकारी नहीं मिल पाई है। अब 22 मार्च को हैफेड द्वारा भी इसके लिए टेंडर आमंत्रित कर खोले जाएंगे। कैथल में हैफेड का करीब 11 हजार एमटी 1509 धान स्टॉक किया गया है।
जिले में स्टॉक है लगभग 5 लाख क्विंटल धान
अकेले कैथल जिले में करीब 5 लाख क्विंटल धान स्टॉक है। जिसकी कीमत करोड़ों रुपये बनती है। जबकि पूरे प्रदेश में यह 15 लाख क्विंटल के आस-पास है।
विधानसभा में भी उठा है मामला
राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल गुप्ता का कहना है कि मिलर्स की मांग को विधायकों ने विधानसभा में भी उठाया है। जिस पर सरकार ने विपक्ष से भी सुझाव मांगें हैं। मिलर्स की मांग है कि सरकार इस धान की मिलिंग की अनुमति दे। अन्यथा इसमें मिलर्स सहित सरकार को भी नुकसान होगा।
विभाग के निदेशक से भी मिले हैं कैथल के मिलर्स
जिले से मिलर्स का एक प्रतिनिधिमंडल विभाग के निदेशक से भी मिला है। उनसे मिलकर लगातार हो रहे नुकसान की जानकारी दी और इस समस्या के समाधान की मांग की है, लेकिन फिलहाल कोई समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा है।
जिले में सरकार के निर्देशानुसार 1509 धान का स्टॉक सील किया गया था। जिसके लिए मिलर्स को देखभाल के निर्देश दिए गए हैं। जैसे ही सरकार के अगले आदेश आएंगे, उसी अनुसार मिलर्स को सूचित कर दिया जाएगा। अभी धान के खराब होने संबंधी मेरे पास कोई सूचना नहीं है।
-मोनिका मलिक, डीएफएससी, कैथल।