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#हिंदीहैंहमः कम पढ़े लिखे लोगों को भी आसानी से समझ में आने वाली भाषा है हिंदी, प्रचार करें
Wed, 26 Aug 2020 12:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला, कैथल
अमर उजाला, कैथल
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2020 12:58 PM IST
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हिंदी हैं हम... अभियान के तहत अमर उजाला ने जिले के शिक्षाविद से बातचीत में मातृभाषा को बढ़ावा देने के सुझाव जाने। जिसमें उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा कम पढे़-लिखे लोगों के भी आसानी से समझ में आने वाली भाषा है, जिससे राष्ट्र एकसूत्र में बंधता है।
राजकीय कन्या स्कूल जाखौली अड्डा प्रिसिंपल पवन गर्ग का कहना है कि हिंदी भाषा को पूरे देश में मातृभाषा को महत्व दिया जाता है। दिनचर्या से लेकर हर विभाग में हिंदी भाषा में काम हो तो हिंदी भाषा को राष्ट्र स्तर पर पहुंचा सकते हैं।
हिंदी प्राध्यापक रामेश्वर दास ने बताया कि हिंदी भाषा विशाल जनसमूह की भाषा है। हिंदी भाषा का प्रयोग लगभग सभी जगह होने लगा है। बदलते दौर के साथ हिंदी का प्रचलन भी बढ़ता जा रहा हैै इससे राष्ट्र स्तर पर परिणाम सकारात्मक होंगे।
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अध्यापिका उमा देवी ने कहा कि मातृभाषा की महता को बनाए रखने के लिए सरकार के साथ हमें भी प्रयास करने चाहिए। दिनचर्या में हिंदी भाषा के शब्दों अपनाना चाहिए। हिंदी स्वाभिमान व गौरव का प्रतीक है। हिंदी भाषा संस्कारों का खजाना है।
लेक्चरर पवन धीमान का कहना है कि सरकार द्वारा राष्ट्र स्तर पर लागू करने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इससे मातृभाषा में काम करने का अवसर मिलेगा। साथ ही कम पढे़-लिखे लोग भी आसानी से समझ सकेंगे। जिससे राष्ट्र एक सूत्र मे बंधेगा।
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राजकीय कन्या स्कूल जाखौली अड्डा प्रिसिंपल पवन गर्ग का कहना है कि हिंदी भाषा को पूरे देश में मातृभाषा को महत्व दिया जाता है। दिनचर्या से लेकर हर विभाग में हिंदी भाषा में काम हो तो हिंदी भाषा को राष्ट्र स्तर पर पहुंचा सकते हैं।
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हिंदी प्राध्यापक रामेश्वर दास ने बताया कि हिंदी भाषा विशाल जनसमूह की भाषा है। हिंदी भाषा का प्रयोग लगभग सभी जगह होने लगा है। बदलते दौर के साथ हिंदी का प्रचलन भी बढ़ता जा रहा हैै इससे राष्ट्र स्तर पर परिणाम सकारात्मक होंगे।
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अध्यापिका उमा देवी ने कहा कि मातृभाषा की महता को बनाए रखने के लिए सरकार के साथ हमें भी प्रयास करने चाहिए। दिनचर्या में हिंदी भाषा के शब्दों अपनाना चाहिए। हिंदी स्वाभिमान व गौरव का प्रतीक है। हिंदी भाषा संस्कारों का खजाना है।
लेक्चरर पवन धीमान का कहना है कि सरकार द्वारा राष्ट्र स्तर पर लागू करने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इससे मातृभाषा में काम करने का अवसर मिलेगा। साथ ही कम पढे़-लिखे लोग भी आसानी से समझ सकेंगे। जिससे राष्ट्र एक सूत्र मे बंधेगा।