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Kaithal News: फर्जी हस्ताक्षर मामले में जाएंगे उच्च न्यायालय
Tue, 23 Sep 2025 02:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 23 Sep 2025 02:04 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। सोलर पावर ग्रिड योजना के तहत भूमि अधिग्रहण से जुड़े फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी अंगूठे का मामला अब उच्च न्यायालय तक पहुंचने वाला है। किसानों का कहना है कि उन्होंने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री तक शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन अधिकारियों की कार्रवाई से संतोष नहीं है। इस कारण वे अति शीघ्र याचिका दाखिल करने का निर्णय ले रहे हैं।
मामले में नए खुलासों के अनुसार, मुढाढ़ गोशाला की 17 एकड़ भूमि पर गोशाला प्रबंध समिति के प्रधान योगेश गर्ग के कथित फर्जी हस्ताक्षर ई-भूमि पोर्टल पर पाए गए। गोशाला समिति के सदस्य बताते हैं कि यह भूमि कभी बिकने के लिए नहीं दी गई और किसी से भी इसकी सहमति नहीं ली गई थी। किसानों का आरोप है कि यह केवल सामान्य किसानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्राचीन 360 मुढाढ़ गोशाला की जमीन तक साजिश के दायरे में आ गई है।
किसानों ने कहा कि फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेज के माध्यम से उनकी भूमि को हड़पने की कोशिश को सफल नहीं होने देंगे। हरीश गर्ग, जसबीर सिंह, मोनू राणा, राम सिंह, सुरेश कुमार, तरसेम सिंह समेत अन्य किसानों ने बताया कि रविवार को उनका शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से फिर से मिला और आश्वासन मिला, लेकिन अधिकारियों की जांच प्रक्रिया में दिखाई दे रही ढीलापन से वे संतुष्ट नहीं हैं।
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पूर्व में हुई शिकायतों के अनुसार, ई-भूमि पोर्टल पर बड़े और छोटे रकबे के किसानों की असली और नकली सहमति फर्जी नेटवर्क द्वारा अपलोड की गई थी। निरक्षर किसानों के नाम पर अंग्रेजी में हस्ताक्षर और पढ़े-लिखे किसानों के नाम पर अंगूठे के निशान लगाना इस धोखाधड़ी के मुख्य संकेत हैं।
इनेलो किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सलिंद्र प्रताप राणा ने आरोप लगाया कि योजना के नाम पर कुछ राजस्व विभाग के अधिकारी किसानों को परेशान कर रहे और सहमति प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाया जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी में किसान मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष संजय राणा ने बताया कि सरकार की नीति के अनुसार किसानों की इच्छा के बिना किसी जमीन को योजना में शामिल नहीं किया जा सकता, लेकिन फर्जी नेटवर्क ने इस नीति को दरकिनार किया।
किसान और सामाजिक कार्यकर्ता उम्मीद जताते हैं कि सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को किसानों के साथ नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद जांच के नाम पर अधिकारियों का रवैया ठीक नहीं लग रहा। इसलिए इस मामले को लेकर वे अति शीघ्र उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करेंगे।
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कलायत। सोलर पावर ग्रिड योजना के तहत भूमि अधिग्रहण से जुड़े फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी अंगूठे का मामला अब उच्च न्यायालय तक पहुंचने वाला है। किसानों का कहना है कि उन्होंने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री तक शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन अधिकारियों की कार्रवाई से संतोष नहीं है। इस कारण वे अति शीघ्र याचिका दाखिल करने का निर्णय ले रहे हैं।
मामले में नए खुलासों के अनुसार, मुढाढ़ गोशाला की 17 एकड़ भूमि पर गोशाला प्रबंध समिति के प्रधान योगेश गर्ग के कथित फर्जी हस्ताक्षर ई-भूमि पोर्टल पर पाए गए। गोशाला समिति के सदस्य बताते हैं कि यह भूमि कभी बिकने के लिए नहीं दी गई और किसी से भी इसकी सहमति नहीं ली गई थी। किसानों का आरोप है कि यह केवल सामान्य किसानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्राचीन 360 मुढाढ़ गोशाला की जमीन तक साजिश के दायरे में आ गई है।
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किसानों ने कहा कि फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेज के माध्यम से उनकी भूमि को हड़पने की कोशिश को सफल नहीं होने देंगे। हरीश गर्ग, जसबीर सिंह, मोनू राणा, राम सिंह, सुरेश कुमार, तरसेम सिंह समेत अन्य किसानों ने बताया कि रविवार को उनका शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से फिर से मिला और आश्वासन मिला, लेकिन अधिकारियों की जांच प्रक्रिया में दिखाई दे रही ढीलापन से वे संतुष्ट नहीं हैं।
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पूर्व में हुई शिकायतों के अनुसार, ई-भूमि पोर्टल पर बड़े और छोटे रकबे के किसानों की असली और नकली सहमति फर्जी नेटवर्क द्वारा अपलोड की गई थी। निरक्षर किसानों के नाम पर अंग्रेजी में हस्ताक्षर और पढ़े-लिखे किसानों के नाम पर अंगूठे के निशान लगाना इस धोखाधड़ी के मुख्य संकेत हैं।
इनेलो किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सलिंद्र प्रताप राणा ने आरोप लगाया कि योजना के नाम पर कुछ राजस्व विभाग के अधिकारी किसानों को परेशान कर रहे और सहमति प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाया जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी में किसान मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष संजय राणा ने बताया कि सरकार की नीति के अनुसार किसानों की इच्छा के बिना किसी जमीन को योजना में शामिल नहीं किया जा सकता, लेकिन फर्जी नेटवर्क ने इस नीति को दरकिनार किया।
किसान और सामाजिक कार्यकर्ता उम्मीद जताते हैं कि सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को किसानों के साथ नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद जांच के नाम पर अधिकारियों का रवैया ठीक नहीं लग रहा। इसलिए इस मामले को लेकर वे अति शीघ्र उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करेंगे।