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गेहूं स्टॉक करने वाले व्यापारियों पर भारी केंद्र का फैसला
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केंद्र सरकार द्वारा गेहूं के निर्यात पर रोक लगाए जाने से जहां आटे की कीमतें नियंत्रित रहेंगी वहीं यह फैसला उन व्यापारियों पर भारी पड़ेगा, जिन्होंने गेहूं के निर्यात के लिए सीजन में गेहूं खरीद कर स्टॉक किया है।
इसके अलावा केंद्र सरकार के इस फैसले से उन किसानों को भी झटका लगा है, जिन्होंने गेहूं की कीमतों में वृद्धि की आस में अभी तक मंडी में गेहूं नहीं बेचा है। रविवार 15 तक ही गेहूं की सरकारी खरीद की अवधि थी। यह बात अलग है कि सरकार ने अब इसे बढ़ाकर 31 मई कर दिया है। इससे राहत यह है कि इस अवधि में गेहूं बेचने के लिए आने वाले किसानों को एमएसपी मिल सकेगा। जिले में इस बार कुछ गेहूं का उत्पादन कम हुआ तो कुछ किसानों और व्यापारियों ने स्टॉक किया है। केंद्र सरकार का यह फैसला स्टॉक करने वाले किसानों और व्यापारियों पर भारी पड़ेगा। इसका कारण यह है कि गेहूं के निर्यात पर रोक लगने से गेहूं की कीमत गिरने की संभावना है।
मंडियों में पिछले साल की अपेक्षा तीस प्रतिशत कम गेहूं पहुंचा
इस सीजन में जिले में लगभग 4.64 लाख एमटी गेहूं की आवक हुई है। जो पिछले साल छह लाख एमटी से अधिक थी। इस बार सबसे अधिक हेफेड ने खरीद की है। 113 662 मीट्रिक टन गेहूं खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा, 187269 हैफेड द्वारा, 98379 मीट्रिक टन भारतीय खाद्य निगम द्वारा तथा 64 433 मीट्रिक टन गेहूं हरियाणा वेयरहाउसिंग कारपोरेशन द्वारा खरीदा गया है। कम आवक का कारण एक तो उत्पादन ही कम बताया जा रहा है। दूसरा निर्यात की संभावनाओं के चलते कुछ लोगों ने गेहूं का स्टॉक भी किया हुआ है।
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निजी मार्केट में गेहूं खरीदने वाले व्यापारियों को नुकसान होगा
अनाज मंडी में आढ़ती धर्मपाल ने कहा कि मंडी में इस बार निर्यात की उम्मीद में व्यापारियों ने भी जमकर खरीदारी की है। व्यापारियों ने किसानों को एमएसपी से ज्यादा रेट देकर गेहूं खरीदा है। शनिवार को एक ढेरी 2070 रुपये प्रति क्विंटल बिकी थी। जबकि एमएसपी 2015 रुपये है। रविवार को जब पता चला कि निर्यात पर रोक लगा दी गई है तो कोई व्यापारी गेहूं खरीदने के लिए आगे नहीं आया। हेफेड ने 2015 के एमएसपी पर गेहूं खरीदा है। निजी मार्केट में गेहूं बेचने की उम्मीद में गेहूं खरीदने वाले व्यापारियों को निर्यात पर प्रतिबंध से नुकसान होगा। जिला आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी शोरेवाला ने कहा कि सरकार ने पहले तो कहा था कि गेहूं का निर्यात होगा। अब एकदम से निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से उन व्यापारियों को नुकसान होगा, जिन्होंने मार्केट में गेहूं बेचने के लिए इसकी खरीद की है।
नियंत्रण में रहेंगी आटे की कीमतें
आटा विक्रेता राजकुमार ने कहा कि गेहूं की कमी व निर्यात की खबरों के बीच आटे की कीमतें बढ़ने लगी हैं। अब निर्यात पर रोक लगी है तो उम्मीद है कि आटे सहित बेकरी उत्पाद की कीमतें नियंत्रण में रहेंगी।
किसानों और लोगों कोई परेशानी नहीं होगी
डीएफएससी प्रमोद शर्मा ने कहा कि इस बार 30 प्रतिशत उत्पादन ही कम हुआ है। किसानों द्वारा स्टॉक किए जाने की उन्हेें जानकारी नहीं है। कुछ व्यापारियों ने जरूर एमएसपी से ज्यादा कीमत देकर गेहूं की खरीद की है। गेहूं खरीद के लिए 15 मई तक की अनुमति थी। अब सरकारी खरीद के लिए केंद्र सरकार ने 31 मई तक का समय बढ़ा दिया है। किसानों को एमएसपी पूरा मिलेगा। सरकार के फैसले से किसानों व लोगों को कोई परेशानी नहीं होगी।
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इसके अलावा केंद्र सरकार के इस फैसले से उन किसानों को भी झटका लगा है, जिन्होंने गेहूं की कीमतों में वृद्धि की आस में अभी तक मंडी में गेहूं नहीं बेचा है। रविवार 15 तक ही गेहूं की सरकारी खरीद की अवधि थी। यह बात अलग है कि सरकार ने अब इसे बढ़ाकर 31 मई कर दिया है। इससे राहत यह है कि इस अवधि में गेहूं बेचने के लिए आने वाले किसानों को एमएसपी मिल सकेगा। जिले में इस बार कुछ गेहूं का उत्पादन कम हुआ तो कुछ किसानों और व्यापारियों ने स्टॉक किया है। केंद्र सरकार का यह फैसला स्टॉक करने वाले किसानों और व्यापारियों पर भारी पड़ेगा। इसका कारण यह है कि गेहूं के निर्यात पर रोक लगने से गेहूं की कीमत गिरने की संभावना है।
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मंडियों में पिछले साल की अपेक्षा तीस प्रतिशत कम गेहूं पहुंचा
इस सीजन में जिले में लगभग 4.64 लाख एमटी गेहूं की आवक हुई है। जो पिछले साल छह लाख एमटी से अधिक थी। इस बार सबसे अधिक हेफेड ने खरीद की है। 113 662 मीट्रिक टन गेहूं खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा, 187269 हैफेड द्वारा, 98379 मीट्रिक टन भारतीय खाद्य निगम द्वारा तथा 64 433 मीट्रिक टन गेहूं हरियाणा वेयरहाउसिंग कारपोरेशन द्वारा खरीदा गया है। कम आवक का कारण एक तो उत्पादन ही कम बताया जा रहा है। दूसरा निर्यात की संभावनाओं के चलते कुछ लोगों ने गेहूं का स्टॉक भी किया हुआ है।
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निजी मार्केट में गेहूं खरीदने वाले व्यापारियों को नुकसान होगा
अनाज मंडी में आढ़ती धर्मपाल ने कहा कि मंडी में इस बार निर्यात की उम्मीद में व्यापारियों ने भी जमकर खरीदारी की है। व्यापारियों ने किसानों को एमएसपी से ज्यादा रेट देकर गेहूं खरीदा है। शनिवार को एक ढेरी 2070 रुपये प्रति क्विंटल बिकी थी। जबकि एमएसपी 2015 रुपये है। रविवार को जब पता चला कि निर्यात पर रोक लगा दी गई है तो कोई व्यापारी गेहूं खरीदने के लिए आगे नहीं आया। हेफेड ने 2015 के एमएसपी पर गेहूं खरीदा है। निजी मार्केट में गेहूं बेचने की उम्मीद में गेहूं खरीदने वाले व्यापारियों को निर्यात पर प्रतिबंध से नुकसान होगा। जिला आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी शोरेवाला ने कहा कि सरकार ने पहले तो कहा था कि गेहूं का निर्यात होगा। अब एकदम से निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से उन व्यापारियों को नुकसान होगा, जिन्होंने मार्केट में गेहूं बेचने के लिए इसकी खरीद की है।
नियंत्रण में रहेंगी आटे की कीमतें
आटा विक्रेता राजकुमार ने कहा कि गेहूं की कमी व निर्यात की खबरों के बीच आटे की कीमतें बढ़ने लगी हैं। अब निर्यात पर रोक लगी है तो उम्मीद है कि आटे सहित बेकरी उत्पाद की कीमतें नियंत्रण में रहेंगी।
किसानों और लोगों कोई परेशानी नहीं होगी
डीएफएससी प्रमोद शर्मा ने कहा कि इस बार 30 प्रतिशत उत्पादन ही कम हुआ है। किसानों द्वारा स्टॉक किए जाने की उन्हेें जानकारी नहीं है। कुछ व्यापारियों ने जरूर एमएसपी से ज्यादा कीमत देकर गेहूं की खरीद की है। गेहूं खरीद के लिए 15 मई तक की अनुमति थी। अब सरकारी खरीद के लिए केंद्र सरकार ने 31 मई तक का समय बढ़ा दिया है। किसानों को एमएसपी पूरा मिलेगा। सरकार के फैसले से किसानों व लोगों को कोई परेशानी नहीं होगी।