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मंजूरी के डेढ़ साल बतीने के बाद भी अस्पताल में 200 बेड नसीब नहीं
ब्यूरो कैथल
Updated Thu, 29 Sep 2016 12:19 AM IST
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मरीजों की लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अधिकारियों की आरामपरस्ती जनता पर भारी पड़ रही है। यही कारण है कि करीब डेढ़ साल पहले 100 से 200 बेड के अस्पताल की मंजूरी के बावजूद जिले में लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से महरूम रहना पड़ रहा है। जिला अस्पताल की तीन मंजिला भवन से सीएमओ कार्यालय को पुराने अस्पताल में शिफ्ट होना है। लेकिन इस अवधि में यह काम नहीं हो पाया। जबकि पुराने अस्पताल में रिपेयर के बाद कार्यालय को शिफ्ट करके तीसरी मंजिल पर अतिरिक्त बेड व अन्य जरूरतों के लिए भवन को प्रयोग में लाया जाना है। इस दौरान तीन सीएमओ बदल चुके हैं। हालांकि इस समय पुराने अस्पताल में रिपेयर का काम किया जा रहा है। लेकिन अभी भी यह भविष्य के गर्भ में है कि कब जिले को बढ़े हुए बेडों की संख्या के हिसाब से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
लगातार बढ़ रही है जिला अस्पताल में ओपीडी
जिला अस्पताल में ओपीडी लगातार बढ़ती जा रही है। जिस कारण इस अस्पताल को 200 बेड किये जाने की मंजूरी दी गई थी। वहीं इससे आस जगी थी कि डॉक्टरों व स्टाफ की कमी से जूझ रहे अस्पताल में स्टाफ भी दोगुना होगा और लोगों को सुगमता से स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। लेकिन यह इंतजार अब बढ़ता ही जा रहा है।
मुरम्मत कार्य में हो चुका है विवाद
नए अस्पताल की दूसरी मंजिल से सीएमओ कार्यालय को पुराने अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए वहां रिपेयर का काम किया जाना था। साल भर पहले इसका ठेका भी दिया जा चुका था। लेकिन ठेकेदार का विभागीय अधिकारियों के साथ हुए विवाद के बाद निश्चित अवधि में निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया। मौजूदा सीएमओ डा. मनीष बंसल ने इस रिपेयर के काम को आगे बढ़ाया है। अब बताया जा रहा है कि रिपेयर का कार्य अंतिम चरण में हैं। लेकिन अभी यह निश्चित नहीं है कि यह कार्य कब तक पूरा हो जाएगा।
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स्टाफ की भी भारी कमी
जिला अस्पताल में 100 बेडों पर दाखिल मरीजों के लिए भी प्रयाप्त स्टाफ नहीं हैं। 42 के मुकाबले महज 13 डॉक्टरों से काम चल रहा है। इसमें भी कई छुट्टी पर जाने की तैयारी में हैं। वहीं नर्सिंग व अन्य स्टाफ की भी भारी कमी है। 200 बेड हो जाने पर स्टाफ के भी बढ़ने की उम्मीद जगी थी।
मैंने ज्वाइनिंग के बाद पुराने अस्पताल में रिपेयर के काम को तेज करने के निर्देश दिए थे। उम्मीद है कि अब यहां काम तेजी से पूरा होगा। दीपावली से पूर्व इस काम को पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद सीएमओ कार्यालय को शिफ्ट करवा दिया जाएगा।
मनीष बंसल, सीएमओ, कैथल।
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लगातार बढ़ रही है जिला अस्पताल में ओपीडी
जिला अस्पताल में ओपीडी लगातार बढ़ती जा रही है। जिस कारण इस अस्पताल को 200 बेड किये जाने की मंजूरी दी गई थी। वहीं इससे आस जगी थी कि डॉक्टरों व स्टाफ की कमी से जूझ रहे अस्पताल में स्टाफ भी दोगुना होगा और लोगों को सुगमता से स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। लेकिन यह इंतजार अब बढ़ता ही जा रहा है।
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मुरम्मत कार्य में हो चुका है विवाद
नए अस्पताल की दूसरी मंजिल से सीएमओ कार्यालय को पुराने अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए वहां रिपेयर का काम किया जाना था। साल भर पहले इसका ठेका भी दिया जा चुका था। लेकिन ठेकेदार का विभागीय अधिकारियों के साथ हुए विवाद के बाद निश्चित अवधि में निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया। मौजूदा सीएमओ डा. मनीष बंसल ने इस रिपेयर के काम को आगे बढ़ाया है। अब बताया जा रहा है कि रिपेयर का कार्य अंतिम चरण में हैं। लेकिन अभी यह निश्चित नहीं है कि यह कार्य कब तक पूरा हो जाएगा।
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स्टाफ की भी भारी कमी
जिला अस्पताल में 100 बेडों पर दाखिल मरीजों के लिए भी प्रयाप्त स्टाफ नहीं हैं। 42 के मुकाबले महज 13 डॉक्टरों से काम चल रहा है। इसमें भी कई छुट्टी पर जाने की तैयारी में हैं। वहीं नर्सिंग व अन्य स्टाफ की भी भारी कमी है। 200 बेड हो जाने पर स्टाफ के भी बढ़ने की उम्मीद जगी थी।
मैंने ज्वाइनिंग के बाद पुराने अस्पताल में रिपेयर के काम को तेज करने के निर्देश दिए थे। उम्मीद है कि अब यहां काम तेजी से पूरा होगा। दीपावली से पूर्व इस काम को पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद सीएमओ कार्यालय को शिफ्ट करवा दिया जाएगा।
मनीष बंसल, सीएमओ, कैथल।