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Kaithal News: बाबा रूढ़ पुरी डेरा में हवन, डालीं आहुतियां

Tue, 13 May 2025 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 13 May 2025 01:02 AM IST
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Hawan and offerings were made at Baba Rood Puri camp
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर नगर में अनेक स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। बाबा रूढ़ पुरी डेरा में सामूहिक तौर पर हवन हुआ। इसमें आहुतियां डाली गईं। सत्यनारायण भगवान की कथा के बाद भंडारे का आयोजन भी किया गया। संकट मोचन बाला जी मंदिर में भी हवन यज्ञ का आयोजन हुआ।

बाबा रूढ़पुरी डेरा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पंडित विशाल शांडिल्य ने कहा कि पूर्णिमा प्रत्येक माह की शुक्ला पक्ष मे आने वाला मासिक उत्सव है। पूर्णिमा वर्ष मे 12 बार, तथा अधिक मास की स्थिति मे 13 बार भी हो सकती है। भगवान विष्णु के धरती पर भगवान बुद्ध रूप में अवतरण के दिन को ही बुद्ध पूर्णिमा के तौर पर मनाया जाता है।
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उन्होंने बताया कि भारत में प्रत्येक माह की पूर्णिमा को कोई न कोई पर्व अवश्य मनाया जाता हैं। इन्हीं मासिक तिथियों में कुछ लोकप्रिय एवं महत्वपूर्ण पूर्णिमा तिथि श्री हनुमान जन्मोत्सव, बुद्ध पूर्णिमा, गुरू पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कोजागरी लक्ष्मी पूजा, टेसू पूनै, वाल्मीकि जयंती, रक्षाबन्धन, श्री भैरव जयंती, देव दिवाली एवं अन्नपूर्णा जंयती, दत्त जयन्ती हैं। भारत का सबसे प्रसिद्ध रंगों भरा वाला त्योहार होली भी फाल्गुन की पूर्णिमा के दिन ही होता है। पूर्णिमा के दिन हिंदू व्रत, गंगा स्नान तथा सत्यनारायण जी के कथा का पाठ करते हैं।
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स्नान- दान का है विशेष महत्व

शांडिल्य ने कहा कि मान्यता है कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने धरती पर बुद्ध रूप मे अवतार लिया था। भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त कर समाज को नई दिशा प्रदान की थी। भगवान बुद्ध से ज्ञान को प्राप्त करने की कामना के लिए भगवान बुद्ध की आराधना की जाती है। सनातन धर्मं के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा पर गंगा या किसी भी तीर्थ स्नान का विशेष महत्व है। पूर्णिमा पर किया गया दान विशेष लाभ देने वाला होता है। इस लिए तीर्थ स्नान के बाद दान अवश्य करना चाहिए। भगवान बुद्ध ने भी यही कहा था कि सतकर्म और दान ये ही साथ में जाएंगे बाकी सब भौतिक है और यहीं रह जाएगा। संकट मोचन मंदिर प्रभारी रोहताश शर्मा ने बताया की बुद्ध पूर्णिमा के दिन मंदिर में सुबह से हवन आयोजित किया गया।
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