{"_id":"5f02072c8ebc3e42b9253e9c","slug":"havy-rain-kaithal-news-knl36374344","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले में 42.57 एमएम बरसात से गिरे पेड़, मकानों के टीन-टप्पर उड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले में 42.57 एमएम बरसात से गिरे पेड़, मकानों के टीन-टप्पर उड़े
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Havy Rain
- फोटो : Kaithal
। जिले में शनिवार रात को हुई भारी बारिश से धान की रोपाई मेें किसानों को काफी लाभ मिला। बारिश से सब्जियों की फसल को नुकसान हुआ है। वहीं लोगों को गर्मी से राहत भी मिली है। वहीं तेज हवा के कारण शहर में दुकान, मकान व अन्य प्रतिष्ठानों के टीन-टप्पर उड़ गए और सड़कों पर पेड़ गिर गए। जिले में औसतन 42.57 एमएम बारिश दर्ज की गई। जिले के अधिकतम तापमान में भी चार डिग्री तक गिरावट आई। रविवार को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहा।
राजौंद में हुई सबसे ज्यादा 100 एमएम बरसात
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सदर कानूनगो पूर्ण सिंह ने बताया कि रविवार सुबह राजौंद में सबसे ज्यादा 100 एमएम बारिश दर्ज की गई। वहीं सबसे कम 11 एमएम बारिश कलायत में हुई। सुबह आठ बजे तक पूंडरी में 78 एमएम, गुहला क्षेत्र में 21 एमएम, सीवन में 24 व ढांड में 38 एमएम बरसात हुई। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में भी बरसात की प्रबल संभावना है।
रात एक बजे के करीब आए तेज तूफान से कई गांवों की बिजली सप्लाई बंद हो गई। विद्युत प्रसारण निगम के अधिकारी व कर्मचारी सप्लाई दुरुस्त करने में लगे रहे। देर शाम तक भी बिजली सप्लाई शुरू नही हो पाई थी। इससे लोगों को बिजली के साथ पानी के लिए भी दर दर भटकना पड़ा। गांव नरवल, सेरधा, जाखौली, कोटड़ा, नंदकरण माजरा, किच्छाना, तारागश्ढ़, कसान, सौंगरी गुलियाणा, माजरा, रोहेड़ा, किठाना, सौंगल, राजौंद, फरियाबाद, संतोख माजरा, बीर-बांगडा, बिरथे बाहरी, खुरड़ा, मंडवाल के साथ साथ अन्य गांव की सप्लाई पोल टूटने से 16 घंटे से लगातार बंद थी। ग्रामीण कुलदीप, बलविंद्र मंडवाल, महेंद्र, सिन्द्र, रिंकू, संजीव, ओमप्रकाश, जसबीर, कृष्ण, रमेश, कुलदीप ने बताया कि वे पानी के लिए दर दर भटकते रहे। एसडीओ मनीष लांबा ने बताया कि तूफान के बाद कई स्थानों पर पोल टूटे गए थे और वहीं कई लाइनों पर पेड़ गिरे हुए थे। इसे दुरुस्त करने में निगम की टीम लगी हुई है। । मूसलाधार बारिश और तेज हवा चलने से कई मार्गों पर पेड़ गिरने से रास्ते बंद हो गए और कई दुकानें के छप्पर व कई मकान की छतें उड़ गई। गांव नरवल के संजीव राणा व सतीश राणा ने बताया कि तेज हवा से जहां उनके मकान की छत उड़ने के साथ लगती एक लंबी दीवार गिर गई। घर के दरवाजे और खिड़कियां भी टूट गईं। गांव के स्कूल और मंदिर की लंबी दीवार गिर गई। प्राइमरी स्कूल के जय भगवान ने बताया कि उसके मकान में छत की गाडर व ग्रिल टूटकर आंगन में गिर गई। इसके अलावा गांव बीरबांगड़ा जींद मार्ग पूंडरी मार्ग, मंडवाल मार्ग, कैथल असंध मार्ग पर कई पेड़ गिरने से आवागमन बंद हो गया। गांव बीर बंागड़ा में गोशाला के संचालक ओमप्रकाश ने बताया कि रात को आए तूफान से गोशाला में बने सभी शेड उड़कर काफी दूरी पर गिर गए।
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कालू, बलिंद्र, प्रताप, राजपाल, सुलर मिस्त्री, राजू, राजपाल फौजी, कुलदीप, बलिंद्र ने बताया की पानी निकासी न होने के कारण बरसात का पानी उनके घरों व दुकानों में घुस गया। तेज तूफान के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दीवार गिर गई, नगर के असंध रोड़ पर स्थित जल घर की भी दीवार इस तूफान से गिर गई।
शनिवार की रात को हुई बारिश से लेकर पानी भरने से सब्जियों की पौध को भारी नुकसान हुआ है। इस बारे में गांव नरवल निवासी सत्यवान ने बताया कि उसने 25 हजार में आधा एकड़ जमीन ठेके पर ली है। जिसमें पानी भरने से उसके हजारों रुपये के पौध के पौधे खराब हो गए हैं। उसने बताया कि 70 हजार के लगभग खेत में पौध के बीज उगाए हुए थे।
बारिश के बाद धान रोपाई के कार्य में भी तेजी आई है। जमीन गीली होने से किसान खेतों में धान रोपाई के कार्य को तेजी से करने में जुटे दिखाई दिए। उप कृषि निदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि जिले में इस बार 01 लाख 55 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई की जानी है। अब तक 01.10 लाख हेक्टेयर में धान रोपाई हुई है।
कुछ घंटों की बरसात ने कलायत नगरपालिका के दावों की पोल खोल कर रख दी। निकासी व्यवस्था दुरुस्त न होने के कारण रेलवे रोड़, श्री कपिल मुनि रोड़ पर स्थित दुकानों व आवासों में पानी भर गया। कपिल मुनि रोड़ पर जूतों की दुकान करने वाले अमित कुमार ने बताया कि शनिवार रात को ही उसकी दुकान में जूतों की सप्लाई आई थी। सुबह दुकान संभाली तो दुकान में करीब तीन फुट तक पानी भरा हुआ था तथा करीब 50 हजार रुपये कीमत के जूते उसमें तैर रहे थे। इसी तरह से कपिल मुनि रोड़ पर व्यापार करने वाले सुल्तान सिंह, अजमेर व रोहताश ने बताया कि पानी की निकासी न होने से पानी उनकी दुकानों में घुस गया।
बारिश से सड़कों के किनारे वृक्ष टूटने से आने जाने वाले रास्ते बंद हो गए। दोपहर तक वन विभाग के अधिकारियों ने टूटे वृक्षों को उठाने की जहमत नहीं उठाई। जिससे लोगों को काफी परेशानी हुई। राहगीर रमेश, तरसेम, नरेंद्र, सुरेश ने बताया कि ये वृक्ष रात्रि को आंधी आने से टूट कर गिरे थे। पाई निवासी सुभाष ने बताया कि उनकी जमीन बरसाना की तरफ है। जिसमें से हांसी बुटाना नहर भी निकलती है।
। गांव सीवन व आस पास के क्षेत्र में हुई तेज बारिश से लोगों ने गर्मी से राहत की सांस ली है। रविवार का दिन उमस और गर्मी से भरा रहा। तीन चार दिनों से गर्मी बहुत अधिक बढ़ चुकी थी बारिश से पारा कुछ नीचे आया है।
कृषि विभाग के एक अधिकारी के अनुमान के अनुसार प्रदेश भर में करीब 30 लाख हेक्टेयर से अधिक मेें फसलें उगाई जाती हैं। जिसमें से 13 लाख हेक्टेयर मेें धान की रोपाई होती है। जिसमें से करीब 80 प्रतिशत में रोपाई हो चुकी है। अब यह रोपाई तेजी पकड़ेगी। वहीेेें अन्य फसलों में भी करीब 10 लाख हेक्टेयर मेें बीजाई हो चुकी है। बारिश से धान की रोपाई में भी तेजी आएगी।
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राजौंद में हुई सबसे ज्यादा 100 एमएम बरसात
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सदर कानूनगो पूर्ण सिंह ने बताया कि रविवार सुबह राजौंद में सबसे ज्यादा 100 एमएम बारिश दर्ज की गई। वहीं सबसे कम 11 एमएम बारिश कलायत में हुई। सुबह आठ बजे तक पूंडरी में 78 एमएम, गुहला क्षेत्र में 21 एमएम, सीवन में 24 व ढांड में 38 एमएम बरसात हुई। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में भी बरसात की प्रबल संभावना है।
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रात एक बजे के करीब आए तेज तूफान से कई गांवों की बिजली सप्लाई बंद हो गई। विद्युत प्रसारण निगम के अधिकारी व कर्मचारी सप्लाई दुरुस्त करने में लगे रहे। देर शाम तक भी बिजली सप्लाई शुरू नही हो पाई थी। इससे लोगों को बिजली के साथ पानी के लिए भी दर दर भटकना पड़ा। गांव नरवल, सेरधा, जाखौली, कोटड़ा, नंदकरण माजरा, किच्छाना, तारागश्ढ़, कसान, सौंगरी गुलियाणा, माजरा, रोहेड़ा, किठाना, सौंगल, राजौंद, फरियाबाद, संतोख माजरा, बीर-बांगडा, बिरथे बाहरी, खुरड़ा, मंडवाल के साथ साथ अन्य गांव की सप्लाई पोल टूटने से 16 घंटे से लगातार बंद थी। ग्रामीण कुलदीप, बलविंद्र मंडवाल, महेंद्र, सिन्द्र, रिंकू, संजीव, ओमप्रकाश, जसबीर, कृष्ण, रमेश, कुलदीप ने बताया कि वे पानी के लिए दर दर भटकते रहे। एसडीओ मनीष लांबा ने बताया कि तूफान के बाद कई स्थानों पर पोल टूटे गए थे और वहीं कई लाइनों पर पेड़ गिरे हुए थे। इसे दुरुस्त करने में निगम की टीम लगी हुई है। । मूसलाधार बारिश और तेज हवा चलने से कई मार्गों पर पेड़ गिरने से रास्ते बंद हो गए और कई दुकानें के छप्पर व कई मकान की छतें उड़ गई। गांव नरवल के संजीव राणा व सतीश राणा ने बताया कि तेज हवा से जहां उनके मकान की छत उड़ने के साथ लगती एक लंबी दीवार गिर गई। घर के दरवाजे और खिड़कियां भी टूट गईं। गांव के स्कूल और मंदिर की लंबी दीवार गिर गई। प्राइमरी स्कूल के जय भगवान ने बताया कि उसके मकान में छत की गाडर व ग्रिल टूटकर आंगन में गिर गई। इसके अलावा गांव बीरबांगड़ा जींद मार्ग पूंडरी मार्ग, मंडवाल मार्ग, कैथल असंध मार्ग पर कई पेड़ गिरने से आवागमन बंद हो गया। गांव बीर बंागड़ा में गोशाला के संचालक ओमप्रकाश ने बताया कि रात को आए तूफान से गोशाला में बने सभी शेड उड़कर काफी दूरी पर गिर गए।
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कालू, बलिंद्र, प्रताप, राजपाल, सुलर मिस्त्री, राजू, राजपाल फौजी, कुलदीप, बलिंद्र ने बताया की पानी निकासी न होने के कारण बरसात का पानी उनके घरों व दुकानों में घुस गया। तेज तूफान के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दीवार गिर गई, नगर के असंध रोड़ पर स्थित जल घर की भी दीवार इस तूफान से गिर गई।
शनिवार की रात को हुई बारिश से लेकर पानी भरने से सब्जियों की पौध को भारी नुकसान हुआ है। इस बारे में गांव नरवल निवासी सत्यवान ने बताया कि उसने 25 हजार में आधा एकड़ जमीन ठेके पर ली है। जिसमें पानी भरने से उसके हजारों रुपये के पौध के पौधे खराब हो गए हैं। उसने बताया कि 70 हजार के लगभग खेत में पौध के बीज उगाए हुए थे।
बारिश के बाद धान रोपाई के कार्य में भी तेजी आई है। जमीन गीली होने से किसान खेतों में धान रोपाई के कार्य को तेजी से करने में जुटे दिखाई दिए। उप कृषि निदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि जिले में इस बार 01 लाख 55 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई की जानी है। अब तक 01.10 लाख हेक्टेयर में धान रोपाई हुई है।
कुछ घंटों की बरसात ने कलायत नगरपालिका के दावों की पोल खोल कर रख दी। निकासी व्यवस्था दुरुस्त न होने के कारण रेलवे रोड़, श्री कपिल मुनि रोड़ पर स्थित दुकानों व आवासों में पानी भर गया। कपिल मुनि रोड़ पर जूतों की दुकान करने वाले अमित कुमार ने बताया कि शनिवार रात को ही उसकी दुकान में जूतों की सप्लाई आई थी। सुबह दुकान संभाली तो दुकान में करीब तीन फुट तक पानी भरा हुआ था तथा करीब 50 हजार रुपये कीमत के जूते उसमें तैर रहे थे। इसी तरह से कपिल मुनि रोड़ पर व्यापार करने वाले सुल्तान सिंह, अजमेर व रोहताश ने बताया कि पानी की निकासी न होने से पानी उनकी दुकानों में घुस गया।
बारिश से सड़कों के किनारे वृक्ष टूटने से आने जाने वाले रास्ते बंद हो गए। दोपहर तक वन विभाग के अधिकारियों ने टूटे वृक्षों को उठाने की जहमत नहीं उठाई। जिससे लोगों को काफी परेशानी हुई। राहगीर रमेश, तरसेम, नरेंद्र, सुरेश ने बताया कि ये वृक्ष रात्रि को आंधी आने से टूट कर गिरे थे। पाई निवासी सुभाष ने बताया कि उनकी जमीन बरसाना की तरफ है। जिसमें से हांसी बुटाना नहर भी निकलती है।
। गांव सीवन व आस पास के क्षेत्र में हुई तेज बारिश से लोगों ने गर्मी से राहत की सांस ली है। रविवार का दिन उमस और गर्मी से भरा रहा। तीन चार दिनों से गर्मी बहुत अधिक बढ़ चुकी थी बारिश से पारा कुछ नीचे आया है।
कृषि विभाग के एक अधिकारी के अनुमान के अनुसार प्रदेश भर में करीब 30 लाख हेक्टेयर से अधिक मेें फसलें उगाई जाती हैं। जिसमें से 13 लाख हेक्टेयर मेें धान की रोपाई होती है। जिसमें से करीब 80 प्रतिशत में रोपाई हो चुकी है। अब यह रोपाई तेजी पकड़ेगी। वहीेेें अन्य फसलों में भी करीब 10 लाख हेक्टेयर मेें बीजाई हो चुकी है। बारिश से धान की रोपाई में भी तेजी आएगी।

Havy Rain- फोटो : Kaithal

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