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Haryana: पुरानी पेंशन की बहाली के लिए आर-पार की लड़ाई का एलान, सभी जिलों में निकाले जाएंगे आक्रोश मार्च
Sat, 08 Jun 2024 11:12 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sat, 08 Jun 2024 11:12 PM IST
सार
पुरानी पेंशन की बहाली के लिए हरियाणा के सभी जिलों में एक जुलाई से 10 अगस्त तक आक्रोश मार्च निकालने का निर्णय लिया गया है। एक सितंबर को पंचकूला में रैली कर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की भी चेतावनी दी है। पेंशन बहाली संघर्ष समिति की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में आंदोलन का निर्णय लिया है।
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पेंशन बहाली संघर्ष समिति की बैठक में सदस्यों को संबोधित करते प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल।
- फोटो : संवाद
विस्तार
हरियाणा में पेंशन बहाली संघर्ष समिति की राज्य कार्यकारिणी की बैठक कैथल के जाखौली अड्डा स्थित अग्रसेन धर्मशाला में हुई। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल मुख्य रूप से शामिल हुए। संचालन समिति के महासचिव ऋषि नैन ने किया। बैठक में पुरानी पेंशन की बहाली के लिए सरकार से आर-पार की लड़ाई का एलान किया गया।
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विजेंद्र धारीवाल ने कहा कि प्रदेश का हर कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली के लिए लगातार आंदोलन कर रहा है, लेकिन सरकार कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकार बहाल करने को तैयार नहीं है। ऐसे में पेंशन बहाली संघर्ष समिति ने प्रदेश के सभी जिलों में एक जुलाई से लेकर 10 अगस्त तक आक्रोश मार्च निकालने का निर्णय लिया है। इसके बाद भी सुनवाई नहीं होने पर एक सितंबर को पंचकूला में रैली करके चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
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प्रदेश महासचिव ऋषि नैन ने कहा कि प्रदेश का हर कर्मचारी पेंशन बहाली के लिए संघर्ष को तैयार है। इससे पहले 19 फरवरी 2024 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष कर्मचारी अपनी मांग लेकर गए थे, लेकिन बदले में कर्मचारियों पर लाठियां बरसाई गईं और आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
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उन्होंने कहा कि समय रहते सरकार या तो कर्मचारियों की पुरानी पेंशन को बहाल करे या आगामी विधानसभा चुनावों में भी नाराजगी झेलने को तैयार रहे। भविष्य में प्रदेश का कर्मचारी पेंशन बहाली संघर्ष समिति के बैनर तले वोट फॉर ओपीएस की मुहिम से जुड़कर आवाज बुलंद करेगा।
धारीवाल ने कहा कि प्रदेश का कर्मचारी किसी पूंजीपति परिवार न होकर गरीब किसान, मजदूर और दुकानदार के परिवार से आता है, जिसका बुढ़ापे में एकमात्र सहारा पेंशन होती है। उन्होंने कहा कि एक देश में दो विधान नहीं चलेंगे कि विधायक और सांसद शपथ लेते ही पेंशन का अधिकारी हो जाता है और कर्मचारी 30 से 35 साल की सेवा देने के बाद भी पेंशन नहीं।
यहां तक विधायक या सांसद एक से अधिक बार विधायक या सांसद बनने पर एक पेंशन की बजाय कई-कई पेंशन पाते हैं। इस अवसर पर जिला प्रधान सुरेंद्र माजरा, सचिव सुरेश सीड़ा, उप प्रधान परविंद्र जागड़ा, कैथल ब्लॉक प्रधान रामफल शर्मा, राज्य कोषाध्यक्ष ज्ञान गिल, उप प्रधान सुरेंद्र चहल, मेवा राम व अन्य मौजूद रहे।