Haryana: कैथल विधानसभा क्षेत्र में दिलचस्प होगा चुनाव, जाट समाज से 4 तो गुर्जर समाज से 2 उम्मीदवार मैदान में
कैथल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस से पूर्व मंत्री शमशेर सुरजेवाला की तीसरी पीढ़ी तो सुरजेवाला को हराने वाले लीलाराम भी मैदान में खड़े हैं। वहीं, आप और जजपा ने भी जाट उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।
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महाभारत की 48 कोस की परिधि में शामिल रही कैथल विधानसभा क्षेत्र की सीट अधिकतर चुनावों में चर्चित सीट रही है। इस बार भी यहां मुकाबला रोमांचक होने के आसार हैं। दरअसल, अबकी कांग्रेस से सुरजेवाला की तीसरी पीढ़ी मैदान में हैं वही भाजपा ने पुराने विजेता पर दांव खेला है। जातिगत रुझानों की बात करें तो जाट समाज से चार तो गुर्जर समाज से दो उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।
वर्ष 1967 के बाद कैथल से दो बार जीत हासिल करने वाली ओम प्रभा जैन प्रदेश की पहली वित्त मंत्री बनी थी। इसी प्रकार वर्ष 2005 के बाद से हरियाणा के पहले कृषि और सहकारिता मंत्री रहे शमशेर सिंह सुरजेवाला के परिवार का भी यहां वर्चस्व रहा है। अबकी लगातार पांचवीं बार सुरजेवाला परिवार फिर से चुनावी समर में उतर चुका है। रणदीप सिंह सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला चुनावी समर में कांग्रेस प्रत्याशी हैं वहीं पिछली बार के विजेता भाजपा के लीला राम फिर से ताल ठोंक रहे हैं। इस वजह से कैथल विधानसभा क्षेत्र में लड़ाई काफी दिलचस्प मानी जा रही है।
हालांकि आप व जजपा की ओर से जाट समाज का उम्मीदवार मैदान में आने तक कुछ हद तक समीकरण बदल सकते हैं। इसमें आप से सतबीर गोयत और जजपा संदीप गढ़ी शामिल है। इनेलो-बसपा से अनिल तंवर और जजपा के बागी बलराज नौच भी मैदान में हैं। जाट समाज से चार तो गुर्जर समाज से दो उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में कैथल विधानसभा क्षेत्र में जाट और नॉन जाट की लड़ाई हो सकती है। कैथल विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा के किसी भी नेता की अभी तक बगावत भी सामने नहीं आई है।
शहर में पिछले 10 साल से पार्किंग और सिटी स्क्वॉयर का नहीं हुआ काम
कैथल में शहर का ड्रीम प्रोजेक्ट सिटी स्क्वॉयर का निर्माण न होना और पार्किंग पर काम न होना बड़ी समस्या है। गौरतलब है कि वर्ष 2014 में इन दोनों ही परियोजनाओं पर काम शुरू किया गया था, लेकिन 10 साल के बाद भी यह पूरा नहीं हो पाया है। पूर्व पार्षद राकेश सरदाना ने बताया कि सिटी स्क्वॉयर का निर्माण जब भी शुरू हुआ। तब भी यह भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ा है।
यदि भाजपा सरकार की पर ईमानदारी से काम करती तो यह काम अब तक 10 साल में पूरा भी हो जाता। वहीं, समाजसेवी सुभाष गोयल ने कहा कि शहर में जाम की स्थिति से निपटने के लिए बहुमंजिला पार्किंग का न होना भी बड़ी परेशानी है। इस पर भी नई सरकार को प्रमुखता से ध्यान दिया जाना चाहिए। वहीं, सामान्य अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी के कारण जिला स्तर पर भी मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता है। अस्पताल में चिकित्सक की संख्या पूरी होने के बाद ही कुछ बात बन पाएगी।
सुरजेवाला परिवार से अब आदित्य सुरजेवाला
पूर्व मंत्री स्व. शमशेर सुरजेवाला 1967 में पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद 1977, 1982, 1991 और 2005 में विधायक और 1993 में सांसद बने। इसके बाद रणदीप सुरजेवाला ने अपने पिता की सियासी विरासत संभाली और 1993 उपचुनाव में विधायक बने। रणदीप सुरजेवाला 1996, 2000, 2005, 2009, 2014 और 2019 में छह चुनाव लड़े, जिसमें 1996 और 2005 में पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला को चुनाव हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।
साल 2005 और 2009 में हुड्डा सरकार में मंत्री रहे, लेकिन 2019 में वह चुनाव हार गए। कांग्रेस ने रणदीप सुरजेवाला के बेट आदित्य सुरजेवाला को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, जिस कैथल की जनता ने सुरजेवाला परिवार को जश्न मनाने के कई मौका दिए, उसी जनता ने 2019 के चुनाव में रणदीप सुरजेवाला को चुनाव हराया था। भाजपा उम्मीदवार लीला राम ने हराया था। उधर, छात्र संघ के चुनावों से से अपनी राजनीति की शुरूआत करने वाले नेता लीला राम तीसरी बार चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वे पहली बार 2000 में इनेलो से विधायक बने थे। इसके बाद 2019 में भाजपा से विधायक बने। अब वे तीसरी बाद चुनाव लड़ रहे हैं। अब उनका दूसरी बार सामना सुरजेवाला परिवार से हो रहा है।
कैथल में यह है मतदाताओं का गणित
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार के विधानसभा चुनाव के दौरान कैथल निर्वाचन क्षेत्र में दो लाख 20 हजार 459 मतदाता हैं। इनमें से एक हजार 15 हजार 566 पुरुष और एक लाख चार हजार 892 महिला मतदाता हैं। एक थर्ड जेंडर मतदाता हैं। आंकड़ों के अनुसार कैथल विधानसभा सीट पर पंजाबी व वैश्य और जाट व गुर्जर समाज के लगभग बराबर वोट हैं। इसमें जाट व गुर्जर समाज की 35-35 हजार के करीब वोट हैं। इसी प्रकार से पंजाबी और वैश्य समाज भी 25-25 हजार के करीब वोट हैं। वहीं, एसी व बीसी वर्ग के करीब 70 हजार और करीब 30 हजार अन्य वर्ग के वोट हैं।
यह है पिछले तीन चुनाव का परिणाम
वर्ष 2009 के चुनाव में रणदीप सुरजेवाला ने इनेलो प्रत्याशी कैलाश भगत को मात दी थी। सुरजेवाला ने 58889 वोट हासिल किए थे। उन्होंने 22 हजार 502 मतों से हराया था। वर्ष 2014 में भी रणदीप सुरजेवाला ने इनेलो प्रत्याशी कैलाश भगत को हराया था। जबकि भाजपा के राव सुरेंद्र तीसरे नंबर पर रहे थे। सुरजेवाला को उस चुनाव में 65 हजार 524 वोट मिल थे। जीत का अंतर 23 हजार से अधिक वोटों का था। वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा के लीला राम ने रणदीप सुरजेवाला को महज 1246 वोटों से हराया था।
राजा युधिष्ठिर ने बसाया था कैथल
इतिहासकारों के अनुसार, राजा युधिष्ठिर ने महाभारत युग के दौरान कैथल की स्थापना की थी। कैथल का नाम कपिस्थल से बना है। कपिस्थल का अर्थ बंदरों की जगह है। बड़ी संख्या में बंदर यहां मिले थे। मान्यता यह भी है कि भगवान हनुमान जी का जन्म कैथल में हुआ था। महान अंजनी के टीला यहां भी स्थित है, जिसका नाम उनकी मां अंजनी के नाम पर है। महाभारत व रामायणकालीन इतिहास से भी इस शहर का नाम जुड़ा हुआ माना जाता है। महाराजा युधिष्ठिर ने यहां नवग्रह कुंडों की स्थापना करवाई थी। भगवान शिव का ऐतिहासिक श्री ग्यारह रुद्री मंदिर भी यहां स्थापित है। कैथल के प्रशासक को भाई उदय सिंह के नाम से जाना गया। भाई उदय सिंह 1843 ई पू तक कैथल पर शासन किया था।