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Kaithal News: परिघ, शिव और रवि योग के बीच मनाया जाएगा हरियाली तीज
Wed, 07 Aug 2024 05:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 07 Aug 2024 05:40 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। इस साल बुधवार को हरियाली तीज के अवसर पर तीन शुभ योग बन रहे हैं। ये परिघ योग, शिव योग और रवि योग हैं। रवि योग रात 8 बजकर 30 मिनट से अगले दिन 8 अगस्त को सुबह 5 बजकर 47 मिनट तक है। वहीं परिघ योग प्रात: काल से लेकर सुबह 11 बजकर 42 मिनट तक है और उसके बाद शिव योग लगेगा। शिव योग अगले दिन पारण तक रहेगा। यह जानकारी पंडित विशाल शांडिल्य ने दी।
उन्होंने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार हरियाली तीज का उत्सव प्रतिवर्ष श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस पर्व को हरियाली तीज या श्रावणी तीज के नाम से भी जाना जाता हैं। हर साल हरियाली तीज के उत्सव की तिथि चंद्रमा के चक्र के आधार पर निर्धारित की जाती है।
शिव पुराण में हरियाली तीज का वर्णन करते हुए कहा गया है कि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था इसलिए इस व्रत की विवाहित स्त्रियों के लिए बड़ी महिमा है। इस दिन महिलाएं महादेव और माता पार्वती के लिए व्रत एवं उनका पूजा-अर्चना करती हैं। सभी व्रतों में हरियाली तीज के व्रत को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इस व्रत को मुख्य रूप से पति की लंबी आयु के लिए किया जाता है।
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मान्यता यह है कि तीज का दिन भगवान शिव और मां पार्वती की उपासना करने के लिए श्रेष्ठ होता है। इस दिन महिलाओं को मायके से आने वाले वस्त्र ही धारण करने चाहिए साथ ही मायके से आई हुई शृंगार की वस्तुओं का ही प्रयोग करना चाहिए। यह सब हरियाली तीज की परंपरा है।
सावन के माह में आने वाले त्योहारों को नवविवाहित स्त्रियों के लिए अत्यंत विशेष माना गया है। हरियाली तीज के अवसर पर महिलाओं को ससुराल से मायके बुलाया जाता है। हरियाली तीज से एक दिन पूर्व सिंधारा मनाने की परंपरा है। इस दिन ससुराल पक्ष से नवविवाहित स्त्रियों को वस्त्र, आभूषण, श्रृंगार का सामान, मेहंदी और मिठाई आदि भेजी जाती है।
तीज के अवसर पर मेहंदी लगाना अत्यधिक शुभ माना जाता है। साथ ही हरियाली तीज पर पैरों में आलता भी लगाया जाता है। यह सुहागिन महिलाओं की सुहाग की निशानी मानी गई है। हरियाली तीज के दिन सुहागिन स्त्रियां अपनी सास के पैर छूकर उन्हें सुहागी देती हैं। अगर सास नहीं हो तो सुहागा जेठानी या किसी अन्य वृद्धा को दिया जा सकता है। हरियाली तीज के दिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं खेत या बाग में झूले झूलती हैं और लोक गीत पर नृत्य करती हैं।
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कलायत। इस साल बुधवार को हरियाली तीज के अवसर पर तीन शुभ योग बन रहे हैं। ये परिघ योग, शिव योग और रवि योग हैं। रवि योग रात 8 बजकर 30 मिनट से अगले दिन 8 अगस्त को सुबह 5 बजकर 47 मिनट तक है। वहीं परिघ योग प्रात: काल से लेकर सुबह 11 बजकर 42 मिनट तक है और उसके बाद शिव योग लगेगा। शिव योग अगले दिन पारण तक रहेगा। यह जानकारी पंडित विशाल शांडिल्य ने दी।
उन्होंने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार हरियाली तीज का उत्सव प्रतिवर्ष श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस पर्व को हरियाली तीज या श्रावणी तीज के नाम से भी जाना जाता हैं। हर साल हरियाली तीज के उत्सव की तिथि चंद्रमा के चक्र के आधार पर निर्धारित की जाती है।
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शिव पुराण में हरियाली तीज का वर्णन करते हुए कहा गया है कि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था इसलिए इस व्रत की विवाहित स्त्रियों के लिए बड़ी महिमा है। इस दिन महिलाएं महादेव और माता पार्वती के लिए व्रत एवं उनका पूजा-अर्चना करती हैं। सभी व्रतों में हरियाली तीज के व्रत को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इस व्रत को मुख्य रूप से पति की लंबी आयु के लिए किया जाता है।
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मान्यता यह है कि तीज का दिन भगवान शिव और मां पार्वती की उपासना करने के लिए श्रेष्ठ होता है। इस दिन महिलाओं को मायके से आने वाले वस्त्र ही धारण करने चाहिए साथ ही मायके से आई हुई शृंगार की वस्तुओं का ही प्रयोग करना चाहिए। यह सब हरियाली तीज की परंपरा है।
सावन के माह में आने वाले त्योहारों को नवविवाहित स्त्रियों के लिए अत्यंत विशेष माना गया है। हरियाली तीज के अवसर पर महिलाओं को ससुराल से मायके बुलाया जाता है। हरियाली तीज से एक दिन पूर्व सिंधारा मनाने की परंपरा है। इस दिन ससुराल पक्ष से नवविवाहित स्त्रियों को वस्त्र, आभूषण, श्रृंगार का सामान, मेहंदी और मिठाई आदि भेजी जाती है।
तीज के अवसर पर मेहंदी लगाना अत्यधिक शुभ माना जाता है। साथ ही हरियाली तीज पर पैरों में आलता भी लगाया जाता है। यह सुहागिन महिलाओं की सुहाग की निशानी मानी गई है। हरियाली तीज के दिन सुहागिन स्त्रियां अपनी सास के पैर छूकर उन्हें सुहागी देती हैं। अगर सास नहीं हो तो सुहागा जेठानी या किसी अन्य वृद्धा को दिया जा सकता है। हरियाली तीज के दिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं खेत या बाग में झूले झूलती हैं और लोक गीत पर नृत्य करती हैं।