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Kaithal News: सीवन के मंदिरों में मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना, गूंजे जयकारे
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नवरात्र के अवसर पर मां दुर्गा की मनमोहक प्रतिमा संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। शारदीय नवरात्र के सातवें दिन सीवन के मंदिरों में मां भगवती की आराधना के साथ वातावरण भक्तिमय हो गया। सुबह से ही श्रद्धालु मां कालरात्रि के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में पहुंचने लगे। मंदिरों में गूंजते भजनों और मां के जयकारों के बीच भक्तों ने परिवार की सुख-शांति, खुशहाली और समृद्धि की कामना की।
श्री कृष्ण कृपा सेवा मंदिर, स्वर्ग द्वार मंदिर, स्वर्गद्वार शिव मंदिर, श्री सनातन धर्म मंदिर और श्री राम मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में सुबह-शाम कीर्तन और पूजा-अर्चना की जा रही है। श्री कृष्ण कृपा सेवा मंदिर के पुजारी दीनानाथ उपाध्याय ने बताया कि नवरात्र आत्मसंयम, आस्था और अच्छे कर्मों की प्रेरणा देने वाला पर्व है। सातवें दिन मां दुर्गा के स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय से मुक्ति और साहस प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि पूजा-पाठ के साथ जीवन में विनम्रता, सेवा और परोपकार की भावना अपनाना भी जरूरी है।
पुजारी ने नवरात्र में जौ और खेतड़ी के महत्व के बारे में बताया कि पहले दिन बोए गए जौ के बीज कुछ दिनों में अंकुरित होकर हरे-भरे हो जाते हैं। इन अंकुरों को कई स्थानों पर खेतड़ी या जवारे कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में इन्हें हरियाली, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। वहीं, घरों और मंदिरों में प्रज्वलित अखंड ज्योत श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक है। भक्त जौ के अंकुर मां भगवती को अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस अवसर पर सुरेश सरदाना राजू, हरदीप नागपाल, अधिवक्ता सुरेंद्र सरदाना, अधिवक्ता ममता सरदाना, दीपिका सरदाना सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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सीवन। शारदीय नवरात्र के सातवें दिन सीवन के मंदिरों में मां भगवती की आराधना के साथ वातावरण भक्तिमय हो गया। सुबह से ही श्रद्धालु मां कालरात्रि के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में पहुंचने लगे। मंदिरों में गूंजते भजनों और मां के जयकारों के बीच भक्तों ने परिवार की सुख-शांति, खुशहाली और समृद्धि की कामना की।
श्री कृष्ण कृपा सेवा मंदिर, स्वर्ग द्वार मंदिर, स्वर्गद्वार शिव मंदिर, श्री सनातन धर्म मंदिर और श्री राम मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में सुबह-शाम कीर्तन और पूजा-अर्चना की जा रही है। श्री कृष्ण कृपा सेवा मंदिर के पुजारी दीनानाथ उपाध्याय ने बताया कि नवरात्र आत्मसंयम, आस्था और अच्छे कर्मों की प्रेरणा देने वाला पर्व है। सातवें दिन मां दुर्गा के स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय से मुक्ति और साहस प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि पूजा-पाठ के साथ जीवन में विनम्रता, सेवा और परोपकार की भावना अपनाना भी जरूरी है।
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पुजारी ने नवरात्र में जौ और खेतड़ी के महत्व के बारे में बताया कि पहले दिन बोए गए जौ के बीज कुछ दिनों में अंकुरित होकर हरे-भरे हो जाते हैं। इन अंकुरों को कई स्थानों पर खेतड़ी या जवारे कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में इन्हें हरियाली, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। वहीं, घरों और मंदिरों में प्रज्वलित अखंड ज्योत श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक है। भक्त जौ के अंकुर मां भगवती को अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस अवसर पर सुरेश सरदाना राजू, हरदीप नागपाल, अधिवक्ता सुरेंद्र सरदाना, अधिवक्ता ममता सरदाना, दीपिका सरदाना सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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