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नेट हाउस के जरिए खीरे की खेती से 10 लाख रुपये सालाना कमा रहे गौरव

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Jun 2021 10:48 PM IST
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Gaurav is earning Rs 10 lakh annually from the cultivation of cucumber through net house
जिले के किसानों का रुझान नेट हाउस की खेती की ओर बढ़ने लगा है। इस समय जिले में 200 के करीब किसान हैं, जो नेट हाउस के जरिए सब्जियों की खेती कर रहे हैं और अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं। पारंपरिक खेती में साल-दर साल पैदावार घटने लगी है। इस कारण से किसान अब फसल चक्र विधि अपनाने लगे हैं।
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किसान गौरव चंदाना ने बताया कि पहले वह पारंपरिक खेती करते थे। लेकिन कम जमीन होने की वजह से ठीक से गुजारा नहीं हो पाता था। वर्ष 2016 में बागवानी के बारे में पता चला था। तब से ही उन्होंने नेट हाउस के जरिए खेती करने का निर्णय लिया था। गांव में सबसे पहले उन्होंने ही नेट हाउस जरिए खेती की शुरुआत की थी। अब उनके गांव में पांच किसान और नेट हाउस के माध्यम से खेती करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि एक एकड़ जमीन में नेट हाउस के जरिए वह 10 लाख रुपये सालाना कमा रहा है।
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उन्होंने बताया कि किसान जितना गेहूं और धान से कमाते हैं, उससे कहीं ज्यादा रिजकवान खीरा की फसल से कमाई हो रही है। अब समय बदल रहा है। किसान को भी समय के साथ बदलना जरूरी है। खेती घाटे का सौदा नहीं है, यदि बेहतरी से और समय की मांग के अनुरूप किया जाए। प्रगतिशील किसान गौरव ने बताया कि रिजकवान खीरा को बेचने के लिए वह कभी मंडी में नहीं जाता है। व्यापारी खेत से ही अच्छे भाव में खीरा को खरीदने के लिए आते हैं। पंजाब के अमृतसर, पटियाला, बठिंडा, अमृतसर, जालंधर, हरियाणा के हिसार, जींद, नरवाना, कैथल, कुरुक्षेत्र के व्यापारी खरीदकर ले जाते हैं। फसल बेचने के बाद भुगतान को लेकर भी कोई दिक्कत नहीं आ रही है। रिजकवान खीरा की खासियत यह है कि इसका उत्पादन ज्यादा होता है। इसमें बीमारी बहुत कम आती है। इस वजह से इसको लगाने में और देखभाल में लागत कम आती है।
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गौरव ने बताया कि सरकार की और से 65 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। इसमें 50 प्रतिशत सब्सिडी केंद्र सरकार देती है और 15 प्रतिशत सब्सिडी राज्य सरकार देती है। बागवानी विभाग से 65 प्रतिशत सब्सिडी लेकर काम शुरू कियाज था। शुरुआत में 22 लाख रुपये का प्रोजेक्ट है। इसके बाद 65 प्रतिशत सरकार की ओर से वापस मिल जाते है। इसके बाद अब 10 लाख रुपये सालाना आमदनी हो रही है। गौरव का कहना है कि नेट हाउस में काम करने के लिए चार लोगों को रोजगार दे रखा है। उनकी तरफ से 10 हजार रुपये महीना दिया जा रहा है। खीरा की तुड़ाई, भराई व नेट हाउस देखभाल करते हैं।

डीएचओ बागवानी विभाग प्रमोद कुमार का कहना है कि नेट हाउस लगाकर किसान अच्छी खेती कर सकता है। इस समय जिले में करीब 200 किसान नेट हाउस के जरिए खेती कर रहे हैं। विभाग की तरफ से सब्सिडी भी दी जाती है। ताकि किसान को किसी प्रकार की परेशानी न हो। धीरे- धीरे लोगों का खेती की तरफ से रुझान बढ़ रहा है।
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