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गणेश महोत्सव : सजे पंडाल, आज से पूजा-अर्चना

Sat, 07 Sep 2024 05:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 07 Sep 2024 05:22 AM IST
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Ganesh Mahotsav: Decorated pandals, worship from today
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। गणेश चतुर्थी महोत्सव का आगाज शनिवार से होगा। शहर में बप्पा के स्वागत के लिए पंडाल सज चुके हैं। इनमें शनिवार से पूजा-अर्चना शुरू होगी, जो लगातार 10 दिन तक चलेगी। शुक्रवार को पूर्व संध्या पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाएं घरों में स्थापित करने के लिए बाजार से लाएं।

उधर, विभिन्न संगठनों ने महोत्सव की तैयारी पूरी कर ली है। उधर, बाजार में खूब रौनक रही। भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के लिए लोगों ने भी जमकर खरीदारी की। घरों के लिए भी लोगों ने भगवान गणपति की प्रतिमाएं खरीदीं। शहर में 25 से अधिक जगहों पर पंडाल लगे हैं।
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गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद शुक्ल की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व विनायक चतुर्थी या कलंक चतुर्थी के नाम से भी प्रसिद्ध है।

शहर में यहां होगा आयोजन ः शहर में श्री ग्यारह रुद्री मंदिर, प्रताप गेट, सीवन गेट स्थित महादेव कॉलोनी, पूंज मोहल्ला, खरादियां मोहल्ला, प्रोफेसर कॉलोनी, डोगरा गेट, सीवन नगर में बो-पट्टी मोहल्ला सहित जिले में कई स्थानों पर गणेश चतुर्थी पर्व को लेकर भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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हनुमान वाटिका के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार गणेश उत्सव भाद्रपद मास की चतुर्थी तिथि से लेकर चतुर्दशी तिथि यानि अनंत चतुर्दशी तक चलता है। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान श्री गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विद्या-बुद्धि, विवेक का प्रदाता, विघ्न-विनाशक, मंगलकारी, रक्षाकारक, सिद्धिदायक तथा समृद्धि का देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले भगवान गणेश का पूजन किया जाता है।


मान्यता है कि भगवान गणेश का पूजन करने से जीवन की सारी परेशानियां दूर होती हैं। भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि, दिन सोमवार, स्वाति नक्षत्र एवं सिंह लग्न में दोपहर के समय हुआ था। इसलिए यह चतुर्थी गणेश या विनायक चतुर्थी कहलाती है। इस दिन गणपति जी को सिंदूर लगाकर षोडशोपचार पूजन करके, मोदक का भोग लगाकर, व्रत किया जाता है। शाम को बिना चंद्रमा देखे पश्चिम दिशा में चंद्रमा की कल्पना करके ही जल दिया जाता है।
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