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फंडों के नाम पर निजी स्कूल अभिभावकों के जेबों पर डाल रहे डाका

Fri, 01 Apr 2016 12:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल Updated Fri, 01 Apr 2016 12:50 AM IST
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Funds in the name of private school parents are put on pockets robbery
स्कूल - फोटो : school
अधिकतर निजी स्कूल संचालक बेवजह के फंडों से अभिभावकों को जमकर लूट रहे हैं। स्कूल संचालक ऐसे फंड ले रहे हैं, जिनकी एवज में स्कूलों में वे सुविधाएं ही नहीं दी जा रही। अभिभावकों का कहना है कि इस तरह की वसूली के कारण उन पर नाजायज दबाव डाला जा रहा है। लेकिन बच्चों के भविष्य के कारण उन्हें मजबूरन चुप रहना पड़ रहा है।
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इन फंडों के नाम पर हो रही है वसूली
लाइब्रेरी खर्च 250 से 300 रुपये
इन्फार्मेशन खर्च 80 से 120 
लैब चार्ज  300 से 350 
विकास खर्च 400 से 700 
उत्सव खर्च 250 से 350 
वार्षिक चार्ज 400 से 600 
बिजली बिल 400 से 600 
परीक्षा फीस  350 से 800  
कंप्यूटर फीस 500 से 750 
स्मार्ट कलास 450 से 750 
मैग्जीन खर्च 300 से 450
स्पोर्टस खर्च 250 से 350 रुपये
वाहन स्टैंड खर्च 50 से 100 रुपये लिया जा रहा है।

इसके अलावा एक स्कूल ने मासिक फीस 3 हजार रुपये, वार्षिक चार्ज 12 हजार रुपये व दाखिला फीस 5 हजार रुपये निर्धारित की गई है। वहीं साल भर लिए जाने वाले अन्य खर्च इनसे अलग हैं। अभिभावक डा. राजेन्द्र ढुल, मुकेश कुमार, ओपी सैनी, विकास ने बताया कि निजी स्कूल संचालकों पर कोई एजूकेशन एक्ट लागू नहीं हो रहा है। जिसके कारण अभिभावकों को लूटा जा रहा है। निजी स्कूल संचालक फंडों के नाम पर नाजायज वसूली कर रहे है। स्कूलों खेल का मैदान नहीं है, स्पोटर्स फंड वसूला जा रहा है। स्कूलों में कंप्यूटर लैब नहीं होने के बावजूद कंप्यूटर फंड लिया जा रहा है। वहीं  लाइब्रेरी फंड भी लाइब्रेरी के ना होने पर वसूला जा रहा है। अब स्कूलों ने स्मार्ट कक्षाओं के नाम पर वसूली का नया फंडा भी जोड़ दिया गया है।
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उप जिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही ने बताया कि जिले में उनके पास विभाग द्वारा निजी स्कूल संचालकों द्वारा ली जाने वाली फीस के बारे में कोई गाइड लाइन नहीं है। लेकिन निजी स्कूल संचालक पिछले साल के मुकाबले सुविधाएं देकर 10 प्रतिशत बढ़ोत्तरी कर सकता है। इससे ज्यादा नही कर सकता है। उनके पास ऐसा कोई डाटा नहीं है कि निजी स्कूल संचालक कितनी फीस वसूल रहे है।
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