{"_id":"b8985c36ec1f890d8f189233a5d1c71d","slug":"fraud-in-funds-sarpuch-suspended","type":"story","status":"publish","title_hn":"फंड में हेराफेरी, पपराला का सरपंच सस्पेंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फंड में हेराफेरी, पपराला का सरपंच सस्पेंड
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल
Updated Thu, 10 Jul 2014 12:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुहला चीका। गांव पपराला में पंचायत द्वारा करवाए गए कार्यों में गोलमाल को लेकर डीसी कैथल ने गांव के सरपंच गुरनाम सिंह को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया।
सरपंच पर आरोप है कि उसने गांव में जो स्ट्रीट लाइटें लगवाईं, उनकी क्वालिटी भी घटिया थी और कीमत भी वास्तविकता से ज्यादा दिखाई गई। इसके अलावा गांव में बनाई गई गलियों व भरत के लिए श्मशान घाट में डाली गई मिट्टी को लेकर भी सरपंच पर हेराफेरी के आरोप हैं।
पंचायत विभाग द्वारा करवाई गई प्रारंभिक जांच में सरपंच पर लगाए गए अधिकतर आरोप सच पाए गए हैं। इसी जांच रिपोर्ट की बिनाह पर डीसी एनके सोलंकी ने सरपंच गुरनाम सिंह को निलंबित करने के आदेश दिए और मामले की विस्तृत जांच एसडीएम गुहला राजेश कुमार को सौंपी है।
विज्ञापन
उन्हें एक महीने के भीतर भीतर जांच करके रिपोर्ट जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। डीसी ने अपने आदेशों में सरपंच से पंचायत का सारा रिकार्ड लेकर बहुमत वाले पंच को देने की बात कही है।
यह है मामला
गांव पपराला के नंबरदार एवं पूर्व सरपंच अजमेर सिंह व उनके साथियों ने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी को एक शिकायत सौंपकर सरपंच पर गबन के आरोप लगाए थे। यह शिकायत बाद में डीसी कैथल तक पहुंची तो उन्होंने पहले खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी गुहला को इस मामले की जांच सौंपी, जिसकी रिपोर्ट बीडीपीओ ने दो मई 2013 को डीसी कैथल को दे दी। इसके बाद एक बार फिर कैथल पंचायत विभाग के कार्यकारी अभियंता को गबन के आरोप की जांच दी गई। उन्होंने भी अपनी रिपोर्ट 18 फरवरी 2014 को जमा करवा दी। इन दोनों रिपोर्ट में पाए गए तथ्यों के आधार पर डीसी कैथल ने सरपंच को गबन का दोषी पाते हुए निलंबित करने के आदेश दिए हैं।
जांच में ये तथ्य सामने आए
डीसी कैथल द्वारा जिस जांच रिपोर्ट के आधार पर सरपंच को सस्पेंड करने के आदेश दिए गए हैं उसके अनुसार सरपंच ने गांव में जो 90 स्ट्रीट लाइटें लगवाईं हैं, उनकी कीमत 2500 रुपये प्रति लाइट थी, जबकि पंचायत के हिसाब में उसे 3500 रुपये दिखाया गया। सरपंच ने गांव में एक गली बनवाई, जिसमें घटिया सामान का इस्तेमाल किया गया। सरपंच गुरनाम सिंह पर तीसरा आरोप यह था कि उसने गांव में जो सबमर्सिबल पंप लगवाए, उनके फर्जी बिल लगाकर अधिक राशि वसूली गई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार सरपंच गुरनाम सिंह के पिता अजमेर सिंह पंचायत की 43 कनाल तीन मरले भूमि पर नाजायज काबिज था। सहायक कलेक्टर गुहला ने सरपंच के पिता पर 28 हजार 825 रुपये की पेनल्टी डाली थी। आरोप ये भी है कि सरपंच ने अपने कर्त्तव्यों के प्रति कोताही करते हुए इस राशि की रिकवरी नहीं की।
विज्ञापन
सरपंच पर आरोप है कि उसने गांव में जो स्ट्रीट लाइटें लगवाईं, उनकी क्वालिटी भी घटिया थी और कीमत भी वास्तविकता से ज्यादा दिखाई गई। इसके अलावा गांव में बनाई गई गलियों व भरत के लिए श्मशान घाट में डाली गई मिट्टी को लेकर भी सरपंच पर हेराफेरी के आरोप हैं।
विज्ञापन
पंचायत विभाग द्वारा करवाई गई प्रारंभिक जांच में सरपंच पर लगाए गए अधिकतर आरोप सच पाए गए हैं। इसी जांच रिपोर्ट की बिनाह पर डीसी एनके सोलंकी ने सरपंच गुरनाम सिंह को निलंबित करने के आदेश दिए और मामले की विस्तृत जांच एसडीएम गुहला राजेश कुमार को सौंपी है।
विज्ञापन
उन्हें एक महीने के भीतर भीतर जांच करके रिपोर्ट जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। डीसी ने अपने आदेशों में सरपंच से पंचायत का सारा रिकार्ड लेकर बहुमत वाले पंच को देने की बात कही है।
यह है मामला
गांव पपराला के नंबरदार एवं पूर्व सरपंच अजमेर सिंह व उनके साथियों ने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी को एक शिकायत सौंपकर सरपंच पर गबन के आरोप लगाए थे। यह शिकायत बाद में डीसी कैथल तक पहुंची तो उन्होंने पहले खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी गुहला को इस मामले की जांच सौंपी, जिसकी रिपोर्ट बीडीपीओ ने दो मई 2013 को डीसी कैथल को दे दी। इसके बाद एक बार फिर कैथल पंचायत विभाग के कार्यकारी अभियंता को गबन के आरोप की जांच दी गई। उन्होंने भी अपनी रिपोर्ट 18 फरवरी 2014 को जमा करवा दी। इन दोनों रिपोर्ट में पाए गए तथ्यों के आधार पर डीसी कैथल ने सरपंच को गबन का दोषी पाते हुए निलंबित करने के आदेश दिए हैं।
जांच में ये तथ्य सामने आए
डीसी कैथल द्वारा जिस जांच रिपोर्ट के आधार पर सरपंच को सस्पेंड करने के आदेश दिए गए हैं उसके अनुसार सरपंच ने गांव में जो 90 स्ट्रीट लाइटें लगवाईं हैं, उनकी कीमत 2500 रुपये प्रति लाइट थी, जबकि पंचायत के हिसाब में उसे 3500 रुपये दिखाया गया। सरपंच ने गांव में एक गली बनवाई, जिसमें घटिया सामान का इस्तेमाल किया गया। सरपंच गुरनाम सिंह पर तीसरा आरोप यह था कि उसने गांव में जो सबमर्सिबल पंप लगवाए, उनके फर्जी बिल लगाकर अधिक राशि वसूली गई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार सरपंच गुरनाम सिंह के पिता अजमेर सिंह पंचायत की 43 कनाल तीन मरले भूमि पर नाजायज काबिज था। सहायक कलेक्टर गुहला ने सरपंच के पिता पर 28 हजार 825 रुपये की पेनल्टी डाली थी। आरोप ये भी है कि सरपंच ने अपने कर्त्तव्यों के प्रति कोताही करते हुए इस राशि की रिकवरी नहीं की।