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Kaithal News: राजौंद में पराली प्रबंधन के लिए निकाला फ्लैग मार्च

Tue, 12 Nov 2024 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 12 Nov 2024 01:27 AM IST
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Flag march taken out for stubble management in Rajound
संवाद न्यूज एजेंसी
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राजौंद/सीवन। राजौंद में खंड कृषि अधिकारी डाॅ. हरमीत सिंह की अध्यक्षता में खंड में पराली प्रबंधन के संदर्भ में जागरूकता के लिए फ्लैग मार्च निकाला। उधर, सीवन में भी फसल अवशेष प्रबंधन पर किसानों को जानकारी दी गई।

इस दौरान खंड कृषि अधिकारी डाॅ. हरमीत सिंह बीडीपीओ अन्नू टांक नायब तहसीलदार व राजौंद थाना प्रभारी इंद्र सिंह मौजूद रहे। इस मौके पर राजौंद ब्लॉक के विभिन्न गांव में जाकर किसानों व लोगों को पराली प्रबंधन को लेकर जहां लोगों को जागरूक किया।
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उन्होंने पराली न जलाने को लेकर भी लोगों को जागरूक किया। समझाते हुए कहा कि पराली जलाने से जहां पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। खंड कृषि अधिकारी ने कहा कि धान उत्पादक किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सरकार एक हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से प्रोत्साहन राशि प्रदान करेगी।
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उन्होंने कहा कि किसान धान की कटाई के बाद अपने खेत में आग न लगाएं। आग लगने से वायु प्रदूषण होता है और मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से फसल अवशेष प्रबंध योजना एसबी के तहत अवशेषों को मशीनों की सहायता से मिट्टी मिलाने पर किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया है। कहा कि धान अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और वातावरण को स्वच्छ रखने में सहायता मिलेगी।

उधर, सीवन में गोहरां में ग्राम स्तरीय फसल अवशेष प्रबंधन प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसमें चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र कैथल के विस्तार शिक्षा वैज्ञानिक डॉ. जसबीर सिंह ने किसानों का आह्वान किया कि वह फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करके कृषि विश्वविद्यालय व प्रशासन का सहयोग करें।

उन्होंने किसानों को समझाते हुए कहा कि ऐसा कर वे अपनी भूमि की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ाएं। किसानों को बताया कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढऩे के साथ जमीनों में उपस्थित मित्र कीट भी नष्ट होते है जो हमारी पैदावार पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। केंद्र के सदस्य वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार ने बताया कि किसान भाई सरकार की ओर से अनुदान पर दी जाने वाली मशीनों जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्मार्ट सीडर, सरफेस सीडर, जीरो टिलेज मशीन, मल्चर, चॉपर व रोटावेटर की ओर से फसल अवशेषों का यथास्थान प्रबंधन कर सकते हैं तथा सरकार खेतों से बाहर फसल अवशेष प्रबंधन के लिए भी मशीनें जैसे हे रेकर, बेलर इत्यादि भी उपलब्ध करवा रही है। केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. दीपक कुमार ने किसानों को बताया कि जैविक कार्बन भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने का प्रमुख कारक हैं।


भूमि के जैविक कार्बन को तीन ही तरीकों से बढ़ाया जा सकता है। या तो खेतों में जैविक खादों जैसे गोबर खाद, केंचुआ खाद आदि डाले, या अपने खेत में हरी खाद जैसे -ढैंचा, मूंग इत्यादि उगाकर भूमि में मिला दे तथा तीसरा तरीका फसल अवशेषों का यथास्थान प्रबंधन करके खेत में ही मिला दे। इस शिविर में गांव गोहरा के लगभग 50 किसानों ने हिस्सा लिया।
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